नवीन समाचार, उत्तराखंड, 5 अगस्त 2026 (UK-Tickets of 32 BJP MLAs at Risk)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2027) से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठनात्मक स्तर पर चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस संबंध में नई दिल्ली में आज पार्टी की कोर कमेटी की बैठक को इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया है कि पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वेक्षण में भाजपा के 47 वर्तमान विधायकों में से 32 के प्रति जनता की ओर से नाराजगी दर्ज की गई है। इनमें से 25 पर्वतीय और 7 मैदानी क्षेत्र के बताए गए हैं।
ऐसे में आगामी चुनाव में कई मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने की संभावना पर संगठन स्तर पर मंथन चल रहा है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पार्टी बिहार की बाँकेपुर सीट पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद भी इस दिशा में अधिक सतर्क हुई बताई जा रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले दो महीनों के दौरान उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, सामाजिक प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से विभिन्न माध्यमों से फीडबैक लिया गया। इसी आधार पर तैयार रिपोर्ट में सरकार की तुलना में कई क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के कार्यों को लेकर अधिक असंतोष सामने आने का दावा किया गया है।
सरकार से अधिक स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन पर सवाल
सूत्रों के अनुसार सर्वेक्षण में अधिकांश लोगों ने माना कि भाजपा के लगभग दस वर्षों के शासनकाल में राज्य में विकास कार्य हुए हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली, जनसंपर्क और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान को लेकर असंतोष बना हुआ है। रिपोर्ट में स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक शिथिलता, संगठनात्मक गुटबाजी तथा युवाओं में बढ़ती नाराजगी जैसे बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है। पार्टी नेतृत्व इन कमियों को समय रहते दूर कर सत्ता विरोधी प्रभाव को कम करने की रणनीति तैयार कर रहा है। दूसरे दलों से आए नेताओं से आकर बने विधायकों से पार्टीजनों में विशेष नाराजगी की बात भी कही जा रही है।
हारी हुई सीटों पर भी बदले समीकरण
हालांकि बताया जा रहा है कि सर्वेक्षण में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथ से निकली 23 सीटों का भी विश्लेषण किया गया। इनमें से लगभग 10 सीटों पर संगठन ने स्थिति पहले की तुलना में बेहतर होने का आकलन किया है। पार्टी का मानना है कि उपयुक्त उम्मीदवार चयन और स्थानीय रणनीति के माध्यम से इन सीटों पर पुनः सफलता प्राप्त की जा सकती है।
मुख्यमंत्री धामी के लिए सुरक्षित सीट पर भी विचार
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के लिए भी अपेक्षाकृत सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के विकल्पों पर विचार कर रहा है। उद्देश्य यह है कि चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों पर पूरा ध्यान दे सकें। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री धामी खटीमा (Khatima) सीट से चुनाव हार गए थे, जिसके बाद उन्होंने चंपावत (Champawat) विधानसभा उपचुनाव जीतकर पुनः विधानसभा की सदस्यता प्राप्त की थी।
विपक्ष नहीं, स्थानीय स्वीकार्यता को माना जा रहा अहम
सूत्रों का कहना है कि संगठन का मानना है कि उत्तराखंड की राजनीति में विपक्ष की मजबूती या कमजोरी से अधिक प्रभाव उम्मीदवार की स्थानीय स्वीकार्यता का होता है। पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि यदि किसी क्षेत्र में विधायक के प्रति असंतोष अधिक है तो उसका सीधा प्रभाव चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। इसी कारण इस बार प्रत्याशी चयन में स्थानीय फीडबैक को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।
पहले ही तय हो चुका है टिकट चयन का पैमाना
इससे पूर्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट (Mahendra Bhatt) भी स्पष्ट कर चुके हैं कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण का सबसे महत्वपूर्ण आधार उम्मीदवार की जीतने की क्षमता होगी। उन्होंने कहा था कि प्रत्याशियों के चयन के लिए पांच अलग-अलग सर्वे कराए जाएंगे और अंतिम निर्णय उन्हीं के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने पार्टी नेताओं और दायित्वधारियों से समय से पहले टिकट की दावेदारी करने के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने की अपील भी की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंतरिक सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर निर्णय लिया जाता है तो भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में नए चेहरों को अवसर दे सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय पार्टी के संसदीय बोर्ड और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।


















