जिम कॉर्बेट : प्रख्यात शिकारी व पर्यावरणप्रेमी: जो कीन्या में भी खुद को बताते थे ‘एजे कॉर्बेट फ्रॉम नैनीताल’

Jim Corbett

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Nainital Chori : नैनीताल में पहली बार पेट्रोल पम्प के ताले तोड़कर करीब 75 हजार की नगदी चोरी…

Police Action on Drunk driving and Triple Riding Driver found driving drunk on Mall Road-Arrested, Policeman suspend, Tourists Creating Problems

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जुलाई 2023। (Nainital Chori) जिला मुख्यालय नैनीताल में पहली बार नगर के तल्लीताल फांसी गधेरा स्थित पेट्रोल पंप में शटर का ताला तोड़कर अंदर से करीब 75 हजार की नगदी चोरी होने की घटना हुई है। घटना का सीसीटीवी भी पुलिस ने बरामद किया है, जिसमें घटना को सुबह करीब 4 … Read more

हल्द्वानी (Road Accident): 19 वर्षीय बाइक सवार को ओवरटेक कर रहे ट्रक ने मारी टक्कर, मौत…

Bike Accident

Road Accident, A tragic accident occurred in Uttarakhand when a car collided with two scooties, resulting in the death of four individuals, including three women from the same family. The deceased were identified as 60-year-old Nem Bahadur Chand’s son Dev Bahadur Chand, his wife Dhana Devi (55), daughter-in-law Narmada Chand (27), and brother’s wife Kalpana Chand (42). They were returning home from Mahendra Nagar in Nepal when the accident took place near Juria drain in the Chakarpur Banbasa forest. The collision was severe, causing two women to be thrown from the scooty and into the bushes. The car driver fled the scene, and the police are searching for the absconding driver. The bodies have been kept in the mortuary for postmortem, and the accident car has been seized by the police.

नैनीताल Samaj : साह-चौधरी समाज के बच्चों को मिले उत्कृष्टता पुरस्कार

Samaj

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Daud : नैनीताल मॉनसून माउंटेन मैराथन की तिथि घोषित, जानें क्या रहेगा खास ?

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Paudhropan : युवती को अश्लील फोटो-वीडियो भेजने वाले युवक को हाईकोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा कि जीवन भर याद रखेगा…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2023। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक युवती को अश्लील फोटो और वीडियो भेजने वाले युवक को अनूठी सजा दी है। उसे एक माह के भीतर 50 पौधे लगाने और पौधरोपण (Paudhropan) करने की पुष्टि के लिए प्रमाण पत्र जमा करने का आदेश दिया है।

Paudhropanमामले के अनुसार 3 फरवरी 2021 को एक युवती ने नीरज नाम के युवक के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि वह दोस्ती करने के बाद उसे अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेज रहा था। लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसने युवती से मांफी मांग ली और युवती ने उसे मांफ भी कर दिया। इसके बाद यह मामला प्राथमिकी निरस्त कराने की मांग पर उच्च न्यायालय पहुंचा।

युवती ने कहा कि दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। इसलिए आपस में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए उनके बीच समझौता आवेदन पर विचार करना आवश्यक है। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने इस आधार पर समझौता आवेदन का विरोध किया कि छेड़छाड़ की धारा में मामला समझौता योग्य नहीं है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध समझौता योग्य है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने इस पर सुनवाई करने के बाद आदेश में कहा है कि युवती ने आरोपित को क्षमा कर दिया है और वह उस पर आगे अभियोग नहीं चलाना चाहती है। ऐसे में आपराधिक कार्रवाई को इस आधार पर रद्द किया जाएगा कि आरोपित युवक बागवानी विभाग की देखरेख में अपनी लागत पर एक माह के भीतर 50 पौधे लगाएगा, तथा सीजेएम यानी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पौधरोपण की पुष्टि से संबंधित प्रमाण पत्र जमा कराएगा। तभी आपराधिक कार्रवाई समाप्त होगी। 

एकलपीठ ने यह भी ताकीद की कि भविष्य में आरोपित खुद को इस प्रकार के अपराधों में शामिल नहीं करेगा और उसे यह सोचना चाहिए कि मैत्रीपूर्ण रिश्ते की पवित्रता को कैसे बनाये रखा जाए।

(डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें सहयोग करें..यहां क्लिक कर हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें। यहां क्लिक कर यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से, हमारे टेलीग्राम पेज से और यहां क्लिक कर हमारे फेसबुक ग्रुप में जुड़ें। हमारे माध्यम से अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल : भाजपा नेत्री ने गांव में गोद ली डेढ़ हेक्टेयर भूमि, किया गया वृहद पौधरोपण (Paudhropan)..

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2022। भाजपा सरकार में दायित्वधारी रहीं शांति मेहरा की पहल पर गुरुवार को जनपद की ग्राम सभा नलिनी की डेढ़ हेक्टेयर भूमि पर पौध रोपण किया गया। बताया गया है कि यह क्षेत्र श्रीमती मेहरा ने पौधरोपण के लिए लिया है। वह इसमें पिछले कुछ वर्षों से पौधरोपण कर रही है।

गुरुवार को इसी कड़ी में विधायक सरिता आर्या की मौजूदगी में यहां विभिन्न प्रजातियों के फलदार पौधे भी लगाए गए हैं जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी श्रीमती मेहरा ने स्वयं ली हुई है। इस मौके पर पौधरोपण में डीएफओ नैनीताल चंद्रशेखर जोशी, श्रीमती मेहरा के पुत्र मयंक मेहरा, मयंक पावर हाउस की टीम के अरुण मेहरा, भाजपा मंडल अध्यक्ष आनंद बिष्ट, कुंदन अधिकारी, सभासद तारा राणा, दया सुयाल, हरीश राणा, डॉ. सरस्वती खेतवाल, मंजू कोटलिया, मधु बिष्ट, तारा बोरा, उमा पढालनी, मीनू बुधलाकोटी, अमिता शाह, दुर्गा मल्होत्रा, देवकी देवी, रेखा पंत, दीपा शर्मा, हेमा बिष्ट, आशा पालीवाल, हेमा पांडे, अरुण कुमार, रोहित भाटिया, संजय चंदेल, गणेश मेहरा, पूरन अधिकारी के साथ ही वन विभाग के मुकुल शर्मा, अतुल भगत सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी भी शामिल हुए।

इस दौरान विधायक सरिता आर्या ने परिवार उप कल्याण केंद्र मंगोली का निरीक्षण भी किया। वहां पर विद्युत आपूर्ति की समस्या को देखते हुए उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। देखें नैनीताल में हरेला पर किये गए पौधरोपण (Paudhropan) का विडियो :

यह भी पढ़ें : परंपरागत हर्षोल्लास के साथ पौधरोपण (Paudhropan) अभियानों के साथ मनाया गया हरेला पर्व…

In the Harela festival festival MLA Sarita Arya planted saplings in  Bhumiyadhar - हरेला पर्व महोत्सव में विधायक सरिता आर्या ने भूमियाधार में  किया पौधारोपणडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जुलाई 2022। उत्तराखंड का सर्वप्रमुख प्रकृति एवं पर्यावरण से जुड़ा ऋतु पर्व हरेला सरोवरनगरी में हर्षोल्लास से मनाया गया। कहा जाता है कि इस मौके पर लगाये जाने वाले पौधे सूखते नहीं हैं। इस दौरान घर के बड़े-बुजुर्ग 10 दिन पूर्व से परंपरागत तरीके से घर के भीतर मंदिर में टोकरियों में उगाए जाने वाले 7 अनाजों के हरेला कहे जाने वाले पीले तिनके ‘जी रया जागि रया यो दिन यो मास भेटनै रया’ की आशीषें देते हुए घर के सदस्यों को चढ़ाए जाते हैं। हालिया वर्षों से इस दिन राज्य सरकार के आह्वान के साथ पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे हैं।

इस मौके पर रोटरी क्लब नैनीताल के द्वारा हरेला त्योहार के उपलक्ष्य में नगर के विभिन्न विद्यालयों के करीब 200 छात्र-छात्राएं एवं क्लब के सदस्य डीएसए मैदान के बास्केटबॉल कोर्ट में जुटे, और यहां से मॉल रोड होते हुए कैनेडी पार्क तक पैदल पर्यावरण शांति मार्च निकाला। आगे कैनेडी पार्क में क्लब के द्वारा ही स्थापित जॉगर्स पार्क एवं खुले जिम के पास नगर के प्रकृति प्रेमी यशपाल रावत की संस्था नासा व एस-3 ग्रीन आर्मी के सदस्यों के साथ मिलकर हैडरंजिया के 250 पौधे पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में क्लब के डिस्ट्रिक्ट 3110 के पर्यावरण समिति के अध्यक्ष विक्रम स्याल सहित सेंट जोसेफ कॉलेज से 30, सेंट मैरी कॉन्वेंट के 70, मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर की 30, सैनिक स्कूल के 30 सहित बिड़ला विद्या मंदिर, सनवाल स्कूल और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं सहित विद्यालयों के शिक्षक एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उधर नैनीताल वन प्रभाग के तत्वावधान में भूमियाधार में मुख्य अतिथि विधायक सरिता आर्या की अगुवाई में उप प्रभागीय वनाधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी, भाजपा नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट, भवाली के नगर पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा, बृज मोहन जोशी, जगदीश नेगी, ममता बिष्ट की अगुवाई में भवाली नगर पालिका, राजकीय इंटर कॉलेज भूमियाधार के प्रधानाचार्य एवं स्कूली बच्चों आदि ने देवदार, क्वैराल, नीबू, दाड़िम, पांगर, कनौल, उतीस व चमेली आदि के 25 पौधों का रोपण किया।

इसके अलावा रंगकर्मी अनिल घिल्डियाल की अगुवाई में ‘पिरूल से रोजगार’ गाने का विमोचन किया गया। इस दौरान हुई नृत्य प्रतियोगिता में सैंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज प्रथम, विशप शॉ इंटर कॉलेज प्रथम व द्वितीय तथा नाटक प्रतियोगिता में विशप शॉ प्रथम व सेंट मेरीज द्वितीय स्थान पर रहे। इस दौरान वन क्षेत्राधिकारी अजय रावत, ममता चंद, प्रमोद तिवारी, सोनल पनेरू, प्रमोद कुमार आर्या, मुकुल शर्मा, भूपाल मेहता, ललित मोहन कार्की, महेश जोशी, नवीन जोशी, विजय भट्ट, विजय मेलकानी, बच्चे सिंह बजेठा, दीपक तिवारी, मनोज भगत, ललित, नरेंद्र सिंह, हर्षित नेगी, आनंद सिंह, सूरज सहित नैनीताल वन प्रभाग के सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

नगर के पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार में वंदना के दौरान सामाजिक विज्ञान के अध्यापक धनश्याम ने हरेला पर्व की विस्तार से जानकारी दी। छात्र मृदुल पंत, आयुष पांडे, यथार्थ शुक्ला, प्रद्युम्न बघेल आदि ने हरेला पर्व पर गीत आदि प्रस्तुत किया। प्रधानाचार्य डॉ. सूर्य प्रकाश ने कहा कि प्रकृति को समर्पित हरेला पर्व सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाना चाहिए। यदि हरेला पर्व के सिद्धांतों पर चले तो ग्लोबल वार्मिगं नियंत्रित हो जायेगी और पृथ्वी हरीभरी हो जायेगी। संचालन अरुण यादव ने किया। कार्यक्रम में उमेश शर्मा, डॉ. डीएस नयाल, अतुल पाठक व रजत ंिसंह सहित सभी आचार्य उपस्थित रहे।

इधर वन विभाग की ओर से हनुमानगढ़ी में इस अवसर पर विशेष पौधरोपण अभियान चलाया गया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी ने बतौर मुख्य अतिथि पौधे रोपे। कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद तिवारी, पूनम हरीश धानिक, संतोष व नगर पालिका के शिवराज नेगी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। इधर नगर की ‘आशा फाउंडेशन’ संस्था के द्वारा हरेला पर्व पर ‘पहाड़ बचाओ’ अभियान के तहत बिड़ला विद्या मंदिर के ऊपर मजार के पास 300 पौधे लगाए गए। अध्यक्ष आशा शर्मा ने बताया कि उनका प्रयास पहाड़ बचाना और युवा पीढ़ी को जागरूक करना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण किया जा सके। इस दौरान संस्था के सचिव निश्चल शर्मा, दीपक कुमार ‘भोलू’ के मार्गदर्शन में बच्ची सिंह, गौरव, दीवान, किशन पालीवाल, बिडला विद्यालय के कर्मी और संस्था के सदस्य शामिल रहे।

इसके अलावा एनसीसी के कैडेटों ने डीएसबी परिसर में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एलएस लोधियाल, प्रो. पद्म सिंह बिष्ट, शोध निदेशक प्रो. ललित तिवारी के साथ संगीत एवं भौतिकी विभाग के पास तेजपत्ता, सुरई व तिमूर के पौधे रोपे तथा कार्बन उत्सर्जन को कम करने की अपील की। पौधरोपण में हिमांशु महरा, सौरभ रावत, बसंत, अंकित, गौरव मेहरा, दीपांशु, नवनीत, भूमिका बिष्ट, रूपा, भावना, सलोनी, मिस्कत, सब्बाग, निशा बिष्ट, कोमल मेहरा, अंजू, शिवानी, रीतिका व मनीषा आदि उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : दिवंगत पत्रकार प्रशांत दीक्षित की स्मृति में किया पौधरोपण (Paudhropan)

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 11 सितंबर 2021। नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक समाचार पत्र आज के ब्यूरो प्रमुख एवं टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि व नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया के तत्कालीन नैनीताल जिलाध्यक्ष स्वर्गीय प्रशांत दीक्षित की स्मृति में शनिवार सुबह मुख्यालय में पौधरोपण किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रशांत का 24 अप्रैल 2021 को करीब 10 दिन तक कोरोना की बीमारी से जूझते हुए असामयिक निधन हो गया था।

Prashant Dixit
स्वर्गीय प्रशांत दीक्षित

गौरव कोहली के नेतत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक नगर पालिका नैनीताल के सभासद मनोज साह जगाती, पवन आर्या, हेमंत डंगवाल व वैभव चंद्र ने अरविंद आश्रम के पास स्वर्गीय दीक्षित की स्मृति में 50 से अधिक बांज के पौधे लगाए। श्री जगाती ने बताया कि यह पौधे संस्था को कविता गंगोला, स्वर्गीय पंकज वर्मा के परिवार, भुवन लोहनी, अनीता तिवाड़ी व गिरीश साह ‘बॉबी’ से प्राप्त हुए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सुहावने मौसम में कई संस्थाओं ने किया पौधरोपण (Paudhropan)

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जुलाई 2021। तराई-भावर व मैदानी क्षेत्रों में नमी युक्त झुलसाती गर्मी से इतर पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम बेहद खुशगवार बना हुआ है। रविवार को भी खासकर नैनीताल एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में हल्के कोहरे के बीच कभी-कभी आ रही फुहारें मौसम को दिलकश बना रही हैं। ऐसे में मौसम में यहां विभिन्न संगठन पौधरोपण के अभियान चलाए हुए हैं।

इसी कड़ी में एस-3 फाउंडेशन की ग्रीन आर्मी की टीम की ओर से भवाली रोड पर तेजपात, कचनार, बुरांस, देवदार व रीठा आदि प्रजातियों के लगभग 400 पौधे लगाए। साथ ही आगे भी इसी स्थान पर पौध रोपण किये जाने का संकल्प जताया गया। टीम की ओर से अन्य लोगों से अपने आसपास साफ सफाई रखने और इस बरसात के मौसम में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाने व उसकी देखरेख भी करने की अपील की गई। अभियान में जय जोशी, अजय कुमार, गोविंद प्रसाद, मानिक शाह, सुरेश चंद्र, राजेंद्र प्रसाद, सुनील चंद्रा, पंकज कुमार, बबली आर्या, पुरोधा कांडपाल, ज्योति दुर्गापाल, अनुकृति, विक्की व कुंदन आदि लोग शामिल रहे।

इसके अलावा ‘जय जननी-जय भारत’ संस्था की ओर से नगर के अयारपाटा क्षेत्र में कंकर वाली कोठी के पास हल्द्वानी के एलआईसी कर्मी भुवन लोहनी द्वारा उपलब्ध कराए गए पौधे लगाए गए। अभियान में सभासद मनोज साह जगाती, पवन आर्या व प्रियांशु शामिल रहे। इसके अलावा संस्था के द्वारा अपने दो वर्ष पूर्व लगाए गए पौधों की प्रगति भी जांची। साथ ही अयारपाटा वार्ड में बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग भी की गई।

इसके अलावा आशा फाउंडेशन की ओर से पुनः बिड़ला विद्या मंदिर के ऊपर मजार के पास चिनार, बांज, देवदार, तितली, पुतली व मेहल आदि के करीब 120 पौधे लगाने की जानकारी दी गई। संस्था की प्रमुख आशा शर्मा ने कहा कि इस खाली पहाड़ में भूस्खलन शुरू हो रहा है। इसे रोकने के लिए वन महोत्सव के तहत डीएफओ बीजू लाल टीआर, रेंजर ममता जोशी व प्रमोद तिवारी द्वारा उपलब्ध कराए गए पौधों से यह अभियान शुरू किया गया है। इस दौरान पौधे लगाने वालों में संभव, निश्चल, नीलू एल्हेंस, डॉ. गीतिका गंगोला, डॉ. अभिनव गंगोला, रश्मि, सुमा, राजमित, मंजू जोशी, दीपिका शर्मा, दीपक चौधरी, मोनू, बच्ची सिंह, किशन पालीवाल, दीवान, भोलू, रजत, नंदन, संतोष जोशी सहित अनय लोग शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : महिलाओं ने ग्रामीणों को बांटे फलदार पौधे, जंगलों में डालीं ‘सीड बॉल’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जुलाई 2021। श्रीश्री रविशंकर की संस्था ‘आर्ट आफ लिविंग’ संस्था के ‘हैप्पीनेस वीमन कलेक्टिव’ समूह की महिलाओं ने बृहस्पतिवार को जनपद के दूरस्थ ग्राम बजेडी-धनियाकोट क्षेत्र के ग्रामीणों को पौध रोपण हेतू माल्टा एवं नीबू के 400 फलदार पौधे वितरित किये और कुछ पौधे मौके पर लगाए। इसके अलावा समूह की सदस्यों द्वारा बनाई गई 650 ‘सीड बॉल’ यानी बीज युक्त गोबर-मिट्टी के गोले भी आस-पास के जंगलों में डाले गए। ताकि भविष्य में वन्य जीवों को इनसे उगने वाले पेड़ों से चारा व भोजन मिल सके और वह ग्रामीण क्षेत्रों का रुख न करें।

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ग्राम बजेठी में ग्रामीणों को फलदार पौधे भेंट करती संस्था की महिलाएं।

आयोजन में समूह की शीर्ष सदस्य रेशमा टंडन, प्रशिक्षिका ज्योति मेहरा, कविता गंगोला सुनीता वर्मा, सिम्मी अरोरा, पूजा सिंह शाही, सोनी अरोरा, उमा कांडपाल, किरन टंडन, बीना शर्मा, पूजा मल्होत्रा, श्वेता अरोरा, कामना कम्बोज, रमा तिवारी, मंजू नेगी, प्रेमा गोसाई, मंजू बिष्ट, मंजू सनवाल, संगीता साह, सोमा साह, निम्मी कीर, मधु बिष्ट, संध्या तिवारी, नेहा डालाकोटी, प्रणव टंडन, उत्कर्षा व देवांश तथा क्षेत्रीय ग्राम प्रधान दीप बिष्ट, भूपेंद्र बिष्ट एवं संजय शाह आदि का सहयोग रहा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पौधरोपण जारी… विधायक ने कहा जीवन के लिए जरूरी जल व वायु दोनों देते हैं पौधे

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जुलाई 2021। ऑल इंडिया वीमन कांफ्रेंस के तत्वावधान में हरेला पर्व के उपलक्ष्य में रविवार को मुख्यालय के निकटवर्ती मंगोली-नलनी क्षेत्र में पौधरोपण किया गया। कार्यक्रम में संगठन की वरिष्ठ सदस्य शांति मेहरा के आमंत्रण पर क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य भी पहुंचे और उन्होंने भी सदस्यों के साथ चौड़ी पत्ती वाले एवं फलदार व औषधीय गुणों युक्त पौधों का रोपण किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि पौधों की मानव जीवन में हवा एवं पानी दोनों देने के लिए बड़ी उपयोगिता है। इस मौके पर पौध रोपण करने वालों में मुन्नी तिवारी, तारा राणा व मंजू कोटलिया तथा पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गणेश मेहरा सहित बड़ी संख्याा में सदस्य, स्थानीय युवा एवं वन विभाग के कर्मी मौजूद रहे।

आशा फाउंडेशन ने बिड़ला टॉप पर रोपे पौधे
नैनीताल। आशा फांउंडेशन के द्वारा अध्यक्ष आशा शर्मा की अगुवाई में रविवार को नगर के बिड़ला विद्या मंदिर से ऊपर टॉप पर मजार के पास भूस्खलन की जद में आ रहे खाली पहाड़ पर बांस, तितली, देवदार, सिल्वर ओक आदि प्रजातियों के 50-60 पौधों का रोपण किया गया। इस अभियान में नीलू एल्हेंस, दीपक कुमार ‘भोलू’, दीपिका शर्मा, संभव शर्मा, मंजू जोशी, सुमा, सुनीता, अर्चना, राजमित कौर, किशन पालीवाल, सीमा साह, मुन्नी आर्य, आशा आर्य, बिड़ला विद्या मंदिर के दीपक, गौरव, निश्चय शर्मा व बच्चे सिंह आदि लोग शामिल रहे। बताया गया कि यहां 200 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अब ‘रात की रानी’ की दिलकश खुशबू से महकेगी सरोवरनगरी की नैनीझील-माल रोड-ठंडी सड़क…

-मिशन पहाड़ के सदस्यों ने ताल के चारों ओर माल रोड, ठंडी सड़क, पंत पार्क, कैनेडी पार्क आदि खाली स्थानों पर रोपे गए खुशबूदार रात की रानी के करीब 300 पौधे

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रविवार को पंत पार्क में रात की रानी के पौधे रोपते मिशन पहाड़ संस्था के लोग।

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2020। सरोवरनगरी की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील अब रात्रि में ‘रात की रानी’ के फूलों की खुशबू से महकेगी। ‘मिशन पहाड़’ संस्था के सदस्यों ने रविवार को नैनी झील के चारों ओर ठंडी सड़कें, माल रोड, मल्लीताल के पंत पार्क, कैनेडी गार्डन आदि स्थानों पर जहां भी जगह मिली, रात्रि में दिलकश खुशबू के लिए प्रसिद्ध रात की रानी के 300 पौधे रोपे हैं। उम्मीद की जा रही है यह पौधे एक वर्ष से भी कम समय में अपने फूलों की खुशबू रात्रि में महकाएंगे।

संस्था के प्रमुख सदस्य बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल ने बताया कि रात की रानी के फूलों की खुशबू मस्तिष्क में सकारात्मक विचार लाती है तथा इससे मानसिक तनाव भी घटता है। नगर में शाम की सैर करने वाले लोग एवं सैलानी इससे लाभान्वित हों, इस उद्देश्य से ही संस्था के सदस्यों ने अपने संपर्कों से रात की रानी की पौध एकत्र कर शहर में रोपी हैं। इस अभियान में प्रभागीय वनाधिकारी बीजू लाल टीआर, संस्था के नरेंद्र बिष्ट, भावना बिष्ट, डा. कासिम, शिवशंकर मजूमदार, डा. सरस्वती खेतवाल, नजर अली, कमल जगाती सहित अन्य लोग शामिल हुए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय ने गोद लिये पांच गांव, किया पौधरोपण

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जुलाई 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने ‘उन्नत भारत’ अभियान के तहत डीएम नैनीताल द्वारा आवंटित पांच गांवों-हल्द्वानी विकासखंड के विजयपुर गौलापार व बसानी-फतेहपुर, धारी विकास खंड के मटियाली, कोटाबाग के सौड़ एवं रामनगर के सांवलदेव पश्चिमी को गोद ले लिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को विवि के समन्वयक प्रो. भगवान सिंह बिष्ट, प्रो. ललित तिवारी व डा. विजय कुमार ने विजयपुर व बसानी गांवों जाकर यहां अखरोट, पद्म तथा जामुन के पौधे रोपे और ग्रामीणों को अभियान के तहत राजमा उत्पादन की जानकारी दी, साथ ही वहां की समस्याओं की जानकारी ली। विजयपुर में हल्द्वानी से मात्र आठ किमी दूर होने के बावजूद सड़क न होने व बसानी में मोबाइल टावर न होने की समस्या प्रकाश में आईं। इस मौके पर ग्राम विकास अधिकारी गोपाल दत्त जोशी, डा. नंदन सिंह, डा. कविता बिष्ट, दीवान, तड़ागी व अमित कुमार आदि भी अभियान में शामिल रहे।

नौलों के पास रोपे बांज, क्वैराल व उतीस के पौधे
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जुलाई 2020। आरोही संस्था के तत्वावधान में आजीविका संवर्धन, शिक्षा व स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक जल स्रोत-नौलों के संरक्षण के लिए ग्राम सभा दियारी में पांच नौलों के पास बांज, क्वैराल व उतीस के पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान गांव में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल एवं स्वच्छता समित का गठन भी किया गया। अभियान मंे ग्राम प्रधान लीला देवी, सरपंच इंद्रलाल, वन विभाग के प्रमोद कुमार, संजय आर्या, पुष्पलता, उमेद राम, कुंदन सिंह, किशन, हरीश कपिल, मोहन राम, डिकर राम, चंद्रशेखर, पूरन चंद्र, रेनू आर्या, पुष्पा आर्या, रूपा, बिंदिया, अंजलि, बबली, डौली, भाष्कर, सागर व चंदू आदि के साथ ही हिमोत्थान व जल निगम के प्रतिनिधि एवं अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

पालिका द्वारा बांज के वृक्ष को चिनने पर एनजीटी से की गई शिकायत
नैनीताल। पर्यावरण प्रेमी गणेश गयाल ने भवाली में हर्षोली रोड स्थित पालिका द्वारा निर्मित दुकान में बाँज प्रजाति के वृक्ष को दुकान की चहारदीवारी व छत में कैद करने पर वन विभाग के उच्चाधिकारियों समेत एनजीटी यानी हरित विकास अधिकरण व जिला विकास प्राधिकरण को पत्र भेज कर वृक्ष को अतिक्रमित करने वाले लोगों व विभागीय लापरवाही पर कार्यवाही करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यहां कत्यूरी वंश की जियारानी के मंदिर के समीप स्थित समर हाउस को तोड़कर पालिका द्वारा नवनिर्मित दुकान का निर्माण किया गया और पालिका द्वारा उसमें बाँज के वृक्ष की बलि चढ़ा दी गई है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरेला: सिर में रखे ‘तिनके’, धरा में रोपे पौधे

-हर्षोल्लास से मनाया गया हरेला, जगह-जगह हुआ पौध रोपण
नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जुलाई 2020। उत्तराखंड के सबसे बड़े प्रकृति से जुड़े लोक पर्व हरेला को मुख्यालय एवं आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक हर्षोल्लास के साथ ही पौधरोपण पर्व के रूप में भी मनाया गया। इस दौरान घरों में बड़ी-बुजुर्ग माताओं ने सभी पारिवारिक सदस्यों को घरों के भीतर उगाये गये सात अनाजों के खास तरह से उगाये गये पौधों के तिनके चढ़ाकर ‘आकाश की तरह ऊंचे व धरती की तरह चौड़े होने’ के साथ स्वस्थ व दीर्घजीवी होने के आशीर्वाद दिये।
Harelaवहीं इस मौके पर मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने निकटवर्ती भवाली में शिप्रा नदी के जलागम क्षेत्र में स्थित सेनिटोरियम के पास आयोजित वृहध पौधारोपण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया। उन्होंने सभी नगारिकों को हरेला पर्व की शुभकामनाऐं दी। श्री ह्यांकी के सेनिटोरियम पहुॅचने पर नगर पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा तथा सभासद ममता बिष्ट द्वारा परम्परागत तरीके से आयुक्त का स्वागत किया। इस मौके पर सीडीओ विनीत कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष मानसून सत्र के दौरान विभिन्न प्रजाति के 15 लाख पौधे लगाये गये थे। इस वर्ष भी 15 लाख से ज्यादा पौधों का रोपण किया जायेगा। 1 जुलाई से 27 हजार पौधों का रोपण कराया जा रहा है। बताया कि शिप्रा नदी क्षेत्र में 844 लाख लीटर जल संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर बांज, बमोर, उदीस आदि के दो हजार पौधों का रोपण किया गया तथा नेपियर, ओंस, मौस, तुषार के घास प्रजाति के बीस हजार पौधों का भी रोपण किया गया। कार्यक्रम में सीएफओ कुबेर बिष्ट, डीएफओ टीआर बीजूलाल, डीडीओ रमा गोस्वामी, संगीता आर्या, अमन अनिरूद्ध व भावना जोशी आदि अधिकारी भी मौजूद रहे।

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वहीं मुख्यालय स्थित डॉ.आरएस टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी के परिसर में निदेशक राजीव रौतेला के नेतृत्व में अकादमी के नवनीत पांडे, वीके सिंह, डॉ. दीपक पालीवाल, पूनम पाठक, दिनेश राणा, मनोज पाण्डे, डॉ. ओम प्रकाश, गीता कांडपाल, मंजू पांडे, मीनू पाठक आदि ने देवदार, बॉंज, चिनार, पांगर, तिमूर, पदम, गुलबहार, अजेलिया, मैग्नोलिया, कमेलिया आदि प्रजाति के कुल 55 पौधों का रोपण किया। जबकि आज आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने जिला प्रवक्ता प्रदीप दुम्का, आईटी सेल के प्रवेश राजपूत आदि की मौजूदगी में अपने आवास पर पौधे रोपे। इधर भैरव सेना के प्रदेश प्रवक्ता व भाजपा नेता पंकज राठौर ने अल्पसंख्यक मौर्चे के अध्यक्ष फैसल कुरैशी व आंनद सिह कनवाल आदि के साथ नैनीताल नगर के हनुमानगढ़ क्षेत्र में आर्युर्वेद के औषधीय गुणों युक्त, जनोपयोगी व पर्यावरण को संरक्षित करने वाले आंवला, पद्म, दाड़िम, तेजपत्ता व बांज आदि प्रजातियों के पौधे लगाए। वहीं कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन परिसर में कुलपति प्रो. एनके जोशी ने अखरोट, पद्म, जामुन, अश्वगंधा तथा सिल्वर ओक के पौधे रोपे। इस मौके पर एनएसएस के समन्वयक डा. विजय कुमार, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. हरीश बिष्ट, डा. सुचेतन साह, डा. रीतेश साह, डा. मनोज आर्य, डा. सोहेल जावेद, प्रो. पद्म सिंह बिष्ट, प्रो. संजय पंत, एई भाकुनी व ललित आदि ने भी पौधरोपण किया। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव केआर भट्ट ने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से आदर्श कॉलोनी भगवानपुर तल्ला में बीएस कोरंगा, आरसी भट्ट, पीतांबर दुर्गापाल, विमला, तनुष, मनीषा, अमित भट्ट, केसी भट्ट आदि के साथ करीब 100 पौधों का रोपण किया।
वहीं उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से नगर के मंगावली-स्नोव्यू क्षेत्र में आयोजित वृहद पौधरोपण कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष राजीव भई भी मौजूद रहे। इस दौरान जिला महामंत्री जोगेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह, मंत्री प्रदीप कुमार जेइी, नगर उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा, विक्रम सयाल, कोषाध्यक्ष प्रीतपाल आहूजा, उपसचिव सुमित खन्ना, हर्ष छावड़ा, संगठन मंत्री प्रेम शर्मा, सुखदीप सिंह आनंद आदि ने एसडीएम विनोद कुमार की मौजूदगी में करीब 70 पौधे लगाए। आयोजन में गुरविंदर सिंह पिंकी, हरीश छावड़ा, जगजीत सिंह आनंद, धर्मेद्र शर्मा, जतिन अरोड़ा, अमन चड्ढा, राजीव कपूर, राहुल आहूला, राजीव गुप्ता, वन विभाग के रेंजर संतोष जोशी आदि ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जुलाई 2019। वन महोत्सव के उपलक्ष्य पर पर्यावरण प्रेमी चंदन सिंह नयाल और उनकी टीम के द्वारा जनपद के धारी ब्लाक के परबडा वन पंचायत में पौधा रोपड किया जा रहा। उल्लेखनीय है कि चंदन शिक्षक की नौकरी छोड़ कर पिछले पांच वर्षों से पौधे रोपित कर रहे हैं। इधर उन्होंने ‘बांज लगाओ-बांज बचाओ का नारा दिया था। उनका कहना है कि जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए चौड़ी पत्ती के बांज के पौधे अत्यधिक उपयोगी हैं। इस अभियान के तहत वे बांज के कई पौधे रोपित कर चुके है, तथा जंगलों में बर्षा जल के जल संरक्षण के लिए चाल-खाल का निरीक्षण भी किया है। इस अभियान में थान सिंह बिष्ट, महेन्द्र सिंह बिष्ट, बचे सिंह, हरेन्द्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, गंगा सिंह बिष्ट आदि भी उनका सहयोग कर रहे हैं।

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dr ashutosh pant
डा.आशुतोष पन्त

-पेड़ लगाने के जुनूनी हैं डा. पंत
-अपने पिता की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लाखों औषधीय एवं फलदार पौधे लगा चुके हैं पेशे से चिकित्सक पर्यावरण प्रेमी
-प्रतिवर्ष न्यूनतम 10 हजार पौधे लगाने का है लक्ष्य
नवीन जोशी, नैनीताल। बीते कुछ वर्षों से शीतकाल में अपेक्षित बर्फ नहीं गिरने से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के साथ आसमान में ओजोन परत के छिद्र में लगातार वृद्धि होने, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन आदि पर चिंता तो सभी करते हैं, लेकिन विरले लोग ही हैं जो इन स्थितियों से स्वयं की चिंता किये बिना पूरी धरती को बचाने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। पेशे से हल्द्वानी में चिकित्सक डा. आशुतोष पंत जैसा कार्य राज्यों की पूरी सरकारें भी कर लें तो कम है। डा. पंत अपने पिता स्वर्गीय सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लगातार अपने स्वयं के संसाधनों से यथासंभव अधिक से अधिक संख्या में औषधीय और फलदार पेड़ लगाते आ रहे हैं, और अब तक लाखों पौधे लगा चुके हैं। उनका लक्ष्य प्रतिवर्ष कम से कम दस हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह भी है कि इसके लिये अब तक उन्होंने किसी भी संस्था या व्यक्ति से किसी प्रकार का कोई आर्थिक सहयोग नहीं लिया है, तथा आगे भी ऐसी कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं। इधर उन्होंने प्रदेश के नैनीताल, चम्पावत और टिहरी जिलों के पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट की अच्छी प्रजातियों के तीन हजार पौधे लगाए हैं। बताया कि अखरोट के पेड़ों की आयु बहुत लंबी होती है, तथा इनके रोपण से पर्यावरण को लाभ के साथा ही ग्रामीणों की अच्छी आय भी होगी। कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपनी भूमि पर लगाने के लिए उनसे नि: शुल्क पौधे प्राप्त कर सकता है।

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Haldwani animal misbehavior

Haldwani animal misbehavior, In Haldwani, a young man of a particular community was caught misbehaving with an animal tied to a peg by becoming an animal, causing a commotion. The incident took place in Bachchi Nagar village of Kamaluaganja area, and it led to protests by Hindu organizations demanding the arrest of the accused. The police took swift action and apprehended the youth, calming the situation and ensuring justice prevailed.

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जुलाई 2023। (Shok Samachar) मंगलवार सुबह नगर की मॉल रोड किनारे चर्च के सामने एक बैंच पर एक युवक का शव पड़ा मिला। पहले सुबह देर तक कोहरा घिरा होने की वजह से इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। बाद में ध्यान जाने पर स्थानीय लोगों ने शव बेंच पर … Read more

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Electric Vehicle : Japanese-origin Indian two-wheeler e-scooter maker Okinawa Autotech has launched the new 2023 model of the Okhi-90 electric scooter. The upgraded scooter offers a range of 160 kilometers on a single charge and a maximum speed of 80 to 90 kilometers per hour. It comes with advanced features like antitheft alarm, GPS navigation, Bluetooth connectivity, and remote access through the Okinawa Connect smartphone application. The scooter also has intelligent safety features that help in tight parking spaces and trigger an antitheft alarm if tampered with.

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Lok Parv:🌱🌾लाग हरिया्व, लाग दसैं, लाग बग्वाल, जी रया, जागि रया….🌱🌾

Lok Parv
  • इस लोक पर्व की ठेठ कुमाउनी आशीषों में त्रेता युग में देवर्षि विश्वामित्र द्वारा भगवान श्रीराम को दी गईं ‘आकाश की तरह ऊँचे होने और धरती की तरह चौड़े होने’ की आशीषों का भाव भी होता है 

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जुलाई 2022। (Lok Parv) `लाग हरिया्व, लाग दसैं, लाग बग्वाल, जी रये, जागि रये, यो दिन यो मास भेटनैं रये, तिष्टिये, पनपिये, हिमाल में ह्यूं छन तक, गंग ज्यू में पांणि छन तक, अगासाक चार उकाव, धरती चार चकाव है जये, स्याव कस बुद्धि हो, स्यों जस तराण हो, दुब जस पंगुरिये, सिल पिसी भात खाये, जाँठ टेकी झाड़ जाए…´ यानी 10वें दिन कटने वाला हरेला तुम्हारे लिए शुभ होवे, बग्वाल तुम्हारे लिए शुभ होवे, तुम जीते रहो, जाग्रत रहो, यह शुभ दिन, माह तुम्हारी जिन्दगी में आते रहें, समृद्ध बनो, विकसित होवो, हिमालय में जब तक बर्फ है, गंगा में जब तक पानी है, आकाश की तरह ऊँचे हो जाओ, धरती की तरह चौड़े हो जाओ, सियार की सी तुम्हारी बुद्धि होवे, दूब घास की तरह फैलो, (इतनी अधिक उम्र जियो कि) भात भी पीस कर खाओ….. 

Lok Parvयह वह आशीषें  हैं जो कुमाऊं अंचल में एक ऋतु व प्रकृति पर्व हरेला के अवसर पर घर के बड़े सदस्य सात अनाजों की पीली पत्तियों (हरेले के तिनड़ों) को बच्चों, युवाओं के सिर में रखते हुऐ देते हैं। इन ठेठ कुमाउनी आशीषों में त्रेता युग में देवर्षि विश्वामित्र द्वारा भगवान श्रीराम को दी गईं ‘आकाश की तरह ऊँचे होने और धरती की तरह चौड़े होने’ की आशीषों का भाव भी हैप्रियजन घर की बजाय दूर प्रवास पर सात समुद्र पार भी हों तो उन्हें हरेले के पीले तिनके चिटि्ठयों के जरिऐ भेजे जाते हैं, जिनका उन्हें भी वर्ष भर इन्तजार रहता है।

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एक अनूठी लोक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन धरती और आसमान का विवाह हुआ था। यह लोक मान्यता यह भी बताती है कि कैसे धरती हो या आसमान, या प्रकृति की कोई भी वस्तु, सभी को हमारी मान्यताओं में देवी-देवता के रूप में माना गया है, या मानवीकृत किया गया है।

हरेला कुमाऊं में वर्ष में तीन बार, चैत्र माह के प्रथम दिन, श्रावण माह लगने से नौ दिन पूर्व आषाड़ माह में और आश्विन नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है, और इसी प्रकार नौ दिन बाद चैत्र माह की नवमी, श्रावण माह के प्रथम दिन और दशहरे के दिन काटा जाता है। श्रावण मॉस में मनाया जाने वाला हरेला बरसात के दिनों में पवित्र व शिव के माने जाने वाले श्रावण मास की संक्रांति को मनाया जाता है, इसी दिन सूर्यदेव दक्षिणायन तथा कर्क से मकर रेखा में प्रवेश करते हैं

हरेले के लिए पांच अथवा सात अनाज गेहूं, जौं, मक्का, उड़द, सरसों, गहत, कौंड़ी, मादिरा, धान और भट्ट आदि के बीज घर के भीतर रिंगाल की टोकरियों अथवा लकड़ी के बक्सों में एक विशिष्ट पद्धति से पांच अथवा सात परतों में मिट्टी के साथ बोये जाते हैं, और प्रतिदिन नियमानुसार सुबह-शाम पूजा के बाद पानी दिया जाता है। धूप की रोशनी न मिलने के कारण यह पौधे पीले तिनकों के रूप में दिखते हैं। 10वें दिन यानी संक्रान्ति को इन्हें घर के बुजुर्ग अथवा महिलाऐं काटकर आशीषों के साथ पहले घर के मन्दिरों, फिर गांव के मन्दिरों, घर के द्वारों तथा बाद में बच्चों, युवाओं व बड़ों को एक विशेष पद्धति से पांवों से शुरू करते हुऐ शिर में आशीषों  के साथ चढ़ाते हैं।

माना जाता है कि जिस घर में हरेले के पौधे जितने बड़े होते हैं, उसके खेतों में उस वर्ष उतनी ही अच्छी फसल होती है। इस प्रकार इस पर्व से बिना सूर्य की रोशनी के दुरूह परिस्थितियों में पौधों को अधिक तेजी से उगाने की प्रेरणा भी मिलती है। इस त्योहार को उत्तम कृषि उपज, हरियाली, धनधान्य, सुख संपन्नता आदि से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिव पत्नी सती को अपना कृष्ण वर्ण नहीं भाता था, इसलिऐ वह अनाज के पौधों, हरेले के रूप में गौरा रूप में अवतरित हुईं। इस पर्व को शिव विवाह से भी जोड़ा जाता है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा का प्राविधान है।

डिकारों का भी है प्राविधान

हरेले की पूर्व संध्या को डिकारे बनाने का प्राविधान है। सामान्यतया लाल चिकनी मिट्टी से बिना किसी सांचे के शिव, गौरा एवं गणेश जी की मूर्तियां बनाई जाती हैं, जिन्हें डिकारे कहा जाता है। कई बार डिकारे केले के तने, भृंगराज आदि से भी बनाऐ जाते हैं। इनमें पहले चावल के आटे से श्वेत तथा फिर किलमोड़े, अखरोट, पांगर के छिलकों, कोयले तथा विभिन्न वनस्पतियों के प्राकृतिक रंगों से रंग कर चेहरे की आकृतियां बनाई जाती हैं। शिव सामान्यता नीले तथा गौरा सफेद बनाई जाती हैं।

हरेला से पहले ‘हर काली’ पर्व

नैनीताल। कुमाऊं मंडल में हरेला पर्व से एक दिन पहले ‘हर काली’ पर्व मनाया जाता है। परंपराओं के विशेषज्ञ परंपरा संस्था के प्रमुख बृजमोहन जोशी के अनुसार ‘हर काली’ में ‘हर’ शब्द भगवान शिव और ‘काली’ शब्द माता पार्वती के लिए प्रयुक्त होता है। 9 से 11 दिन पूर्व बोया जाने वाला हरेला पर्व के एक दिन पूर्व हर काली के दिन हरेला बोने के लिए ही प्रयुक्त मिट्टी से देवताओं के डिगारे यानी प्रतिमाएं बनाई जाती हैं, और एक दिन पूर्व इन्हें रंगा जाता है। हर काली के दिन पंडित इन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा करते हैं और इन्हें हरेला चढ़ाया जाता है, जबकि घर के सदस्यों को हरेला एक दिन बाद हरेला के दिन चढ़ाया जाता है।

देश में अन्य जगह भी मनाऐ जाते हैं ऐसे ही ऋतु पर्व

हरेला जैसे ही ऋतु पर्व देश के अन्य हिस्सों में कमोबेश समान एवं अलग तरीकों से मनाऐ जाते हैं। यहाँ उत्तराखंड के के गढ़वाल अंचल में हरियाला पर्व मनाया जाता है। इसके साथ ही झारखण्ड में बालिकाओं द्वारा अंकुरित बीजों के चारों ओर सामूहिक गायन के साथ इसी तरह का त्यौहार मनाया जाता है, राजस्थान में जौ के बीजों के साथ गणगौर पर्व, हिमाचल प्रदेश के लाहुल में शीत ऋतु में अंधेरे में जौं के पीले अंकुरों (यौरा) उगाने के रूप में, हरियाणा और पशिम बंगाल में दशहरे के दौरान तथा अरुणांचल  प्रदेश में भी ऐसे ही त्यौहार मनाऐ जाते हैं।

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मार्च 2023। हिन्दू नव वर्ष यानी चैत्र महीने की 01 पैट (गते) को उत्तराखंड के कुमाऊं में मेष संक्रांति, फूल संक्रांति और फूल देई के नाम से मनाया जाता है। इस वर्ष  बसन्त ऋतु के स्वागत का यह त्यौहार 15 मार्च 2023 को समूचे उत्तराखंड में बड़ी धूम-धाम से फूल देई मनाया जा रहा है। उत्तराखंड की धरती पर अलग-अलग ऋतुओं के अनुसार पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं।

ये पर्व एक ओर हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं, तो दूसरी ओर प्रकृति के प्रति पहाड़ के लोगों के सम्मान और प्यार को भी दर्शाते हैं। इसके अलावा पहाड़ की परंपराओं को कायम रखने के लिए भी ये पर्व-त्योहार खास हैं। फूल संक्रांति यानी फूल देई का सीधा संबंध भी प्रकृति से है I इस समय चारों ओर छाई हरियाली और नाना प्रकार के खिले फूल प्रकृति के यौवन में चार चांद लगाते हैं।

पहाड़ों के साथ प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल में ऋतुराज बसंत का आगमन हो गया है। प्रकृति जैसे स्वयं आज फूलदेई मना रही है। फूल तो फूल कलियां भी जैसे घूंघट खोल मुस्कुराती, तितलियों-भंवरों को रिझाती नजर आ रही हैं। पतझड़ में रीते हुए चिनार-पॉपुलर के पेड़ों पर जैसे मंद-मंद मुस्कान लिये हर ओर हरियाली छा गयी है। कफुवा यानी बुरांश के साथ प्योंली ओर पयां यानी पद्म प्रजाति के पेड़ों के साथ आड़ू, पुलम, खुबानी व आलूबुखारा पर भी गुलाबी वासंती बयार छायी हुई है। इन फूलों की खुशबू से सारा चमन महका हुआ है। और यह सब जल्द शुरू होने जा रहे भारतीय नव वर्ष के स्वागत को जैसे तत्पर हैं। ऐसे मौसम-प्राकृतिक संुदरता को अपनी आंखों से निहारना चाहते हैं तो पहाड़ पर आइए, नैनीताल आइये।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने से ही नव वर्ष शुरू होता है। इस नव वर्ष के स्वागत के लिए बसन्त के आगमन से ही पूरा पहाड़ बुरांस की लालिमा और गांव आडू, खुबानी के गुलाबी-सफेद रंगो से भर जाता है। खेतों में सरसों खिल जाती है तो पेड़ों में फूल भी आने लगते हैं। इस दिन छोटे बच्चे सुबह ही उठकर जंगलों की ओर चले जाते हैं और वहां से प्योली, फ्यूंली, बुरांस, बासिंग आदि जंगली फूलो के अलावा आडू, खुबानी, पुलम के फूलों को चुनकर लाते हैं और एक थाली या रिंगाल की टोकरी में चावल, हरे पत्ते, नारियल और इन फूलों को सजाकर हर घर की देहरी पर लोकगीतों को गाते हुये जाते हैं और देहरी का पूजन करते हुये पास-पड़ोस के घरों में जाकर उनकी दहलीज पर फूल चढ़ाते हैं और सुख-शांति की कामना करते हुए गाते हैं, और प्रकृति को इस अप्रतिम उपहार सौंपने के लिये धन्यवाद भी अदा करते हैं।

” फूलदेई, छम्मा देई.…
जतुकै देला, उतुकै सही ।
देंणी द्वार, भर भकार,
सास ब्वारी, एक लकार,
यो देलि सौ नमस्कार ।
फूलदेई, छम्मा देई.…
जतुकै देला, उतुकै सही । “

इसके बदले में उन्हें परिवार के लोग गुड़, चावल व रुपये देते हैं। इस चावल व गुड़ आदि से शाम को चावल पीसकर इसके आटे का हलवा-‘सई भी बनाया जाता है, और विशेष रुप से प्रसाद स्वरुप ग्रहण किया जाता है। इस दिन से लोकगीतों के गायन का अंदाज भी बदल जाता है, होली के फाग की खुमारी में डूबे लोग इस दिन से ऋतुरैंण और चैती गायन में डूबने लगते हैं। ढोल-दमाऊ बजाने वाले लोग जिन्हें बाजगी, औली या ढोली कहा जाता है। वे भी इस दिन गांव के हर घर के आंगन में आकर इन गीतों को गाते हैं। जिसके फलस्वरुप घर के मुखिया द्वारा उनको चावल, आटा या अन्य कोई अनाज और दक्षिणा देकर विदा किया जाता है। 

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कुमाऊं में ‘श्री पंचमी’, ‘सिर पंचमी’ व ‘जौं पंचमी’ के रूप में मनायी जाती है बसंत पंचमी

सभी मित्रों को फूलों के इस त्योहार की बधाइयाँ। आपके जीवन में भी इसी तरह फूलों के रंग-बिरंगे रंग खिलें।

-कुमाऊं में अलग उत्साह से मनाया जाता है ऋतुराज बसंत के आगमन का त्योहार
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं मंडल के पर्वतीय अंचलों में ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व ‘बसंत पंचमी” माघ माह के शुक्ल कक्ष की पंचमी की तिथि को परंपरागत तौर पर ‘श्री पंचमी’ के रूप में मनाया जाता है। इसे यहां सिर पंचमी या जौं पंचमी कहने की भी परंपरा है। इस अवसर पर ऋतुराज बसंत में खिलने वाले पीले ‘प्योंली’ के फूलों की तरह नये पीले रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा है। कोई पीला वस्त्र न हो तो पीले रंग के रुमाल जरूर रखे जाते हैं। साथ ही घरों व मंदिरों में खास तौर पर विद्या की देवी माता सरस्वती की विशेष पूजन-अर्चना की जाती है।

इस दिन लोग सुबह स्नान कर अपने देवी-देवताओं के थान यानी मंदिरों को और घर को गाय के गोबर से लीपते हैं। उसके बाद अक्षत-पिठ्याँ और धूप-दीप जलाकर जौं के खेतों में जाकर वहां जौं के पौधों की पूजा कर उन्हें उखाड़कर घर में लाते हैं। इन पौधों पर सरसों का तेल लगाया जाता है। परिवार के सभी लोगों को स्नान व पूजा के उपरांत अक्षत-पिठ्याँ लगाते हैं। खेतों से विधि-विधान के साथ जाैं के पौधों को उखाड़कर घर में लाते हैं, और मिट्टी एवं गाय के गोबर का गारा बनाकर इससे जौं के तिनकों को अपने घरों की चौखटों पर चिपकाते हैं, साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर जौं के तिनकों को हरेले की तरह चढ़ाते हुये आशीष दी जाती हैं। ‘लाग हरियाल, लाग बग्वाल, लाग सिर पंचमी, जी रये, जागि रये, यो दिन मास भेटनै रये’ यानी हरेला, बग्वाल एवं श्री पंचमी के त्योहार तुम्हारे लिये शुभ होवें, तुम हर वर्ष इन शुभ दिवसों को देखते जाओ।

इस अवसर पर घरों में अनेक तरह के परंपरागत पकवान भी बनते हैं। साथ ही इस दिन छोटे बच्चों को विद्यारंभ एवं बड़े बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया जाता है, तथा उनके कान एवं नाक भी छिंदवाए जाते हैं। बसंत पंचमी के इस पर्व को गांवों में बहन-बेटी के पावन रिश्ते के पर्व के रूप में मनाने की भी परंपरा है। इस पर्व को मनाने के लिए बेटियां ससुराल से अपने मायके आती हैं, अथवा मायके से पिता अथवा भाई उन्हें स्वयं पकवान व आशीष देने बेटी के घर जाकर उसकी दीर्घायु की कामना करते हैं। उल्लेखनीय है पहाड़ों पर छह मौसमों में ऋतुराज बसंत का मौसम सबसे सुखद माना जाता है। इस दौरान से कड़ाके की सर्दी से निजात मिलती है, इसलिए इस त्योहार पर आम जन में खासा उत्साह नजर आता है।

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-विज्ञान व आधुनिक बौद्धिकता की कसौटी पर भी खरा उतरता है यह लोक पर्व, साफ-सफाई, पशुओं व परिवेश को बरसात के जल जनित रोगों के संक्रमण से मुक्त करने का भी देता है संदेश

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 17 सितंबर 2021। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों, खासकर कुमाऊं अंचल में चौमांस-चार्तुमास यानी बरसात के बाद सर्दियों की शुरुआत एवं पशुओं की स्वच्छता व स्वस्थता के प्रतीक के लिए हर वर्ष आश्विन माह की पहली तिथि यानी संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला लोक पर्व ‘खतडु़वा’ ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत तरीके से एवं शहरी क्षेत्रों में औपचारिकता की तरह से मनाया जाता है। अन्य परंपरागत लोक पर्वों की तरह इस त्योहार पर भी जो कुछ किया जाता है, वह भी विज्ञान व आधुनिक बौद्धिकता की कसौटी पर खरा उतरता है, और घरेलू पशुओं व परिवेश की साफ-सफाई तथा उन्हें बरसात के जल जनित रोगों के संक्रमण से मुक्त करने का संदेश भी देता है।

दो वर्ष के अंतराल यानी वर्ष 2019 के बाद खतड़ुवा व विश्वकर्मा पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन 17 सितंबर को पड़े हैं, और तीनों ही अवसर साफ-सफाई के प्रतीक हैं। मोदी जहां ‘स्वच्छ भारत अभियान’ छेड़े हुए हैं, वहीं हर वर्ष आश्विन (असौज) माह की संक्रांति यानी प्रथम गते मनाये जाने वाले खतड़ुवा के दिन से चातुर्मास के बाद साफ-सफाई शुरू की जाती है। जबकि आश्विन (असौज) माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी की तिथि को मनायी जाने वाली विश्वकर्मा पूजा या विश्वकर्मा जयंती के दिन मशीनों-उपकरणों की सफाई की जाती है। उल्लेखनीय है कि खतड़ुवा व विश्वकर्मा पूजा सामान्यता हिंदी महीनों के हिसाब से कभी 16 तो कभी 17 सितंबर को पड़ते हैं। वर्ष 2017, 18 व 19 में लगातार तीन वर्ष यह तीनों एक दिन पड़े थे।
आइये इस वर्षों पुरानी लोक परंपरा-लोक पर्व के आज से साफ-सफाई शुरू करने के संकल्प को आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर उनके साफ-सफाई के संदेश से जोड़ते हुए अपने घरों-परिवेश की सफाई के लिये निकलें, और देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी का भी स्मरण करें।

खतडु़वा लोक पर्व के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने पालतू दुधारू गौवंशीय पशुओं तथा उनके स्थानों की साफ-सफाई करते हैं, तथा झाड़-झंखाड़ आदि को खतडु़वा के रूप में जलाकर पशुओं की रक्षा व स्वस्थ रहने की प्रार्थना करते हैं। उन्हें भरपूर मात्रा में हरी घास खिलाने के साथ ही उनके रास्ते में भी हरी घास की कालीन सी बिछाने की भी परंपरा है। उनके शरीर पर तेल भी चुपड़ा जाता है। जबकि शहरों में झाड़ियों अथवा कागज से खतडु़वे का पुतला बनाकर उसे आग के हवाले किया जाता है, एवं ककड़ियों (पहाड़ी खीरा) को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

ककड़ियों का प्रसाद शायद इसलिए लिया जाता है, क्योंकि इस मौसम में पहाड़ों पर यही फल के रूप में सर्व सुलभ होता है। परंपरागत तौर पर माना जाता है कि इस दिन से पहाड़ों पर एक खतड़ा यानी लिहाफ ओढ़ने लायक ठंड हो जाती है। साथ ही बरसात के मौसम में प्रकृति में एवं खासकर घरेलू पशुओं के स्थान में बढ़ जाने वाले विषाणुओं को भगाने के लिए उनके स्थान (गोठ) तथा बाहर झाड़ियों को जलाकर भी साफ-सफाई की जाती है ताकि इससे उठने वाले धुंवे से नुकसानदेह कीट-पतंगे, विषाणुओं को मारने का प्रबंध स्वतः हो जाए।

इस दौरान गांवों में बच्चे ‘गाय की जीत-खतड़ुवे की हार’ के नारे लगाते हैं। लाल रंग के चुवे अथवा भांग के एक डंडे के शिरे पर बिच्छू घास बांध कर उसे मशाल का स्वरूप दिया जाता है। उसे गोठ में बंधे पशुओं के ऊपर से घुमाकर उनकी नजर, बलाएं (आधुनिक अर्थों में उन पर हुआ किसी भी तरह का संक्रमण) उतारी जाती हैं। और इस तरह इस लोक पर्व में भी मौसम बदलाव के दौरान मनाए जाने वाले होली, दीपावली तथा बैशाखी जैसे भारतीय त्योहारों की तरह आग जलाकर मौसमी बदलावों का संक्रमण दूर करने की समानता भी छुपी हुई है।

ख़तडुवे के बारे में ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए धन्यवाद. अगली बार कृपया खतडूवे से सम्बंधित कुमाऊं गढवाल की भ्रांति का भी सत्योत्घाटन कीजिएगा. सभी को जानने की आवश्यकता है कि यह केवल मौसम के बदलने का त्यौहार है ना कि आपसी जय-पराजय का. 🙂

Sushil Kumar Joshi :

भैल्लो खतडु‌वा भैल्लो और सजाई हुई लकड़ियाँ फूलों से फिर पीटना जली हुई आग को बचपन याद आ गया अब तो बस तस्वीरें नजर आती हैं वो चौराहे ना जाने कहाँ खो गये। याद दिलाने के लिये आभार ।

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  • 1921 में इसी त्योहार के दौरान बागेश्वर में हुई प्रदेश की अनूठी रक्तहीन क्रांति, कुली बेगार प्रथा से मिली थी निजात
  • घुघुतिया के नाम से है पहचान, काले कौआ कह कर न्यौते जाते हैं कौए और परोसे जाते हैं पकवान

Ghughute1नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया को रोशनी के साथ ऊष्मा और ऊर्जा के रूप में जीवन देने के कारण साक्षात देवता कहे जाने वाले सूर्यदेव के धनु से मकर राशि में यानी दक्षिणी से उत्तरी गोलार्ध में आने का उत्तर भारत में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाने वाला पर्व पूरे देश में अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। पूर्वी भारत में यह बीहू, पश्चिमी भारत (पंजाब) में लोहणी और दक्षिणी भारत (कर्नाटक, तमिलनाडु आदि) में पोंगल तथा देवभूमि उत्तराखंड में यह उत्तरायणी के रूप में मनाया जाता है। उत्तराखंड के लिए यह पर्व न केवल मौसम परिवर्तन के लिहाज से एक ऋतु पर्व वरन बड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लोक पर्व भी है।

उल्लेखनीय है कि उत्तरायणी के दिन ही 13 जनवरी 1921 को कुली बेगार आंदोलन की परिणति उत्तराखंड की ऐतिहासिक रक्तहीन क्रांति के रूप में हुई थी। कत्यूरी शासनकाल से शुरू, चंद शासन काल में जारी रहे एवं गोरखा एवं अंग्रेजी शासनकाल में अपने सर्वाधिक बुरे-अत्याचारी रूप में रहीं कुली बेगार, कुली उतार व कुली बरदाइश की कुप्रथाओं का इस दिन अंत हुआ था।

1916 से 1921 के बीच चले कुली बेगार की आंदोलन की पृष्ठभूमि पर अनामिका फिल्म्स डेवलपमेंट सोसाइटी नैनीताल के तत्वाधान में स्वर्गीय बॉलीवुड कलाकार टॉम ऑल्टर व नगर के स्वर्गीय रंगकर्मी पंकज चौधरी, स्वर्गीय गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ व स्वर्गीय प्रेम मटियानी जैसी कलाकारों को लेकर प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय प्रेम सिंह नेगी के उपन्यास “संकल्प की ओर” पर अंग्रेजी साम्राज्य के उत्पीड़न व अंधे कानून की मार्मिक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर कुमाउनी, हिंदी व अंग्रेजी संवादों युक्त फिल्म ‘मधुलि’ बनाई गई थी। अनामिका फिल्म्स डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष, निर्माता व निर्देशक सुहृद सुदर्शन शाह ने बताया कि कुली बेगार आंदोलन की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस ऐतिहासिक महत्वपूर्ण फिल्म को आम दर्शकों तक पहुचाने के लिए यूट्यूब पर उपलब्ध करा दिया है। इस फिल्म को यहां भी देखा जा सकता है।

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