बड़ा समाचार: कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड के राष्ट्रीय स्मारक आम लोगों के लिये बंद

रवींद्र देवलियाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अप्रैल 2021। केन्द्र सरकार की ओर से कोरोना महामारी के प्रभावी रोकथाम के दृष्टिगत उत्तराखंड के समस्त राष्ट्रीय स्मारकों व पुरास्थलों को पर्यटकों व आम लोगों के लिये बंद कर दिया गया है। फिलहाल 15 मई तक इन पर रोक रहेगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से … Read more

नैनीताल विंटर कार्निवाल पर बड़ा समाचार

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 दिसम्बर 2020। जनपद नैनीताल में आगामी 26 दिसम्बर से 30 दिसम्बर तक आयोजित होने वाला विंटर कार्निवाल स्थगित कर दिया गया है। जानकारी देते हुये नैनीताल महोत्सव समिति के सचिव जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद कुमार गौड़ ने बताया है कि विंटर कार्निवाल 2020 के आयोजन हेतु आयोजन समिति के तकनीकी … Read more

कोरोना पर सबसे बड़ी खबर: नैनीताल के सबसे बड़े मनुमहारानी होटल में ‘ले ऑफ’, 80 कर्मचारियों को मिलेगा सिर्फ आधा वेतन

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2020। कोराना की महामारी का कानूनी तौर पर सबसे पहला शिकार पर्यटननगरी सरोवरनगरी का सबसे बड़ा होटल मनुमहारानी हुआ है। पिछले तीन माह से भी अधिक समय से बंद होने के बावजूद अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहे होटल प्रबंधन ने होटल में कानूनी तौर पर ‘ले-ऑफ’ (छंटनी) घोषित … Read more

कब्बै देख नि हुनल ब्याक यस ‘अनमोल’ कार्ड, एक बारि देखिया जरूर

आपंण ऑनलाइन समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ में हम ‘गर्वैल कओ-हम कुमाउनी छां’ नामक एक नई स्तंभ और फेसबुक-ह्वाट्सएप में यै है जुड़ी एक-एक ग्रुप लै शुरू करणयां। यो स्तंभ में हम केवल चंद शासनकाल में राज भाषा रई कुमाउनी में कविता, लेख, व्यंग्य आदि जि लै आपूं लोग लेखि सकला, छापुंल। हमैरि कोशिश छू कि … Read more

हर्षोल्लास से मनाया गया क्रिसमस, कहा गया मौज-मस्ती नहीं प्रेम व शांति का संदेश देने का है यह पर्व

-सरोवरनगरी में इसाई समुदाय द्वारा हर्षोल्लास से मनाया गया क्रिसमस का पर्व, अन्य धर्मों के लोगों ने भी दी बधाइयां नवीन समाचार, नैनीताल, 25 दिसंबर 2018। क्रिसमस के अवसर पर सरोवरनगरी में मल्लीताल स्थित अमेरिकी मिशनरियों द्वारा निर्मित एशिया के सबसे पुराने ऐतिहासिक मैथोडिस्ट चर्च में पादरी फादर रेवरन आशुतोष दानी ने विशेष प्रार्थना कराई … Read more

🙏🕉️🌸जानें, क्या है सोलह श्राद्धों का महत्व

Shraddh

दामोदर जोशी ‘देवांशु’, हल्द्वानी, 29 सितम्बर 2018। श्राद्ध (Shraddh), श्रद्धा का वार्षिक अनुष्ठान है। अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक पर्व है। वैसे तो प्रतिमाह पड़ने वाला कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के बाद की प्रथमा से लेकर अमावास्या तक) श्राद्ध पक्ष माना जाता है। वहीं कर्मकांडी और भीरु जन नित्य ही ब्रहम् मुहूर्त … Read more

177 साल के नैनीताल में कुमाउनी रेस्टोरेंट की कमी हुई पूरी

-पूरी तरह कुमाउनी थीम पर स्थापित किया गया है 1938 में स्थापित अनुपम रेस्टोरेंट

-अब यहां लीजिये कुमाउनी थाली के साथ ही पहाड़ी शिकार सहित अनेक पहाड़ी जड़ी-बूटी युक्त व्यंजनों का भी स्वाद

नवीन जोशी, नैनीताल। 1841 में अपनी बसासत से ही अंग्रेजी रंग में रंगी ‘छोटी बिलायत’ भी कहलाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल में अंग्रेजी व्यंजनों के साथ ही चायनीज, तिब्बती, स्पेनिश, इलैलियन सहित अनेक विदेशी व्यंजनों के रेस्टारेंट मौजूद हैं और कई रेस्टारेंट दक्षिण भारतीय, बंगाली तथा गुजराती थालियां भी परोसते हैं, किंतु यदि सैलानी कुमाऊं मंडल के इस मुख्यालय में कुमाउनी व्यंजन खाना चाहें तो उन्हें कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड के पर्यटक आवास गृह में रहना व वहां के रेस्टारेंट में खाना होता है, अथवा टी-स्टॉल तरह के छोटे रेस्टोरेंटों में आलू के गुटके, छोले व रायते जैसे कुछ कुमाउनी व्यंजनों से ही गुजारा करना पड़ता है। लेकिन अब सही मायनों में 177 साल की सरोवरनगरी को एक पूरी तरह कुमाउनी रंग में रंगा व कुमाउनी लजीज व्यंजन परोसने वाला रेस्टोरेंट मिल गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन से जुड़े नगर के युवा सामाजिक कार्यकर्ता व व्यवसायी रुचिर साह ने 1938 में अपने दादा द्वारा स्थापित अनुपम रेस्टोरेंट को कुमाउनी रंग में रंग डाला है। 

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प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2021। हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। आइए आज हम आपको इस शक्तिपीठ के दर्शनों को लिए चलते हैं। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी … Read more

सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी : जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान

kotgadi mandir

Kotgadi

कुमाऊं में 16वीं शताब्दी से लिखे व मंचित किये जा रहे हैं नाटक

-बताया-चंदवंश के राजा रूद्रचंद देव द्वारा संस्कृत के दो नाटकों की रचना व मंचन -नैनीताल के रंगमंच पर वृहद शोध की जरूरत उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल एवं मंडल मुख्यालय नैनीताल में रंगमंच की गौरवशाली परंपरा रही है। सोलहवीं शताब्दी में कुमाऊं में चंदवंश के राज्य में राजा रूद्रचंद देव द्वारा संस्कृत के दो नाटकों की … Read more

कुमाउनी समग्र

पढ़ें कुमाऊनी कवितायेँ, हिंदी भावानुवाद के साथ : दशहराक दिनाक तें खास कविता: भैम पनर अगस्ता्क दिन गाड़ ऐ रै… नईं जमा्न में… चुनावों पारि कुमाउनी कविता: फरक पडूं कां है रै दौड़ आम आदिम होलि पारि रंङोंकि कविता: पर्या रंङ खबरदार ! उमींद उदंकार लड़ैं चिनांड़ पछ्यांण ‘लौ’ कि ल्येखूं सिणुंक ढुड. राजक च्यल … Read more

भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।

माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।

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पर्यटन, हर्बल के बाद अब जैविक प्रदेश बनेगा उत्तराखंड

विभिन्न प्रकार के बीज
विभिन्न प्रकार के बीज

-प्रदेश के जैविक उत्पादों का बनेगा अपना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ब्रांड
-उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के प्रस्ताव को मुख्य मंत्री ने दी हरी झंडी
-राज्य में ही पहली बार लगने जा रही कलर सॉर्टिंग मशीनों से स्थानीय ख्याति प्राप्त उत्पाद राजमा, चौलाई, गहत, भट्ट आदि के जियोग्रेफिकल इंडेक्स बनेंगे
-इस हेतु रुद्रपुर में मंडी परिषद के द्वारा एक वर्ष के भीतर बनाया जाएगा 1500 टन क्षमता का कोल्ड स्टोर और तीन हजार टन क्षमता का गोदाम

नवीन जोशी, नैनीताल। देश में दालों की बढ़ती कीमतों के बीच यह खबर काफी सुकून देने वाली हो सकती है। अभी भी अपेक्षाकृत सस्ती मिल रहीं उत्तराखण्ड की जैविक दालें (मौंठ 50, भट्ट 70 तथा गहत और राजमा 120 रुपये प्रति किग्रा.) देश की महँगी दालों का विकल्प हो सकती हैं। पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित उत्तराखंड एक नए स्वरूप में स्वयं को ढालने की राह पर चलने जा रहा है। यह राह है हर्बल प्रदेश बनने की, जिस पर अब तक पर्यटन और जड़ी-बूटी प्रदेश के रूप में प्रचारित किये जा रहे उत्तराखण्ड ने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड, मंडी परिषद, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद एवं कृषि एवं उद्यान आदि विभागों के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश को जैविक प्रदेश यानी जैविक उत्पादों का प्रदेश बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में राज्य के सभी पर्वतीय जिलों के 10 ब्लॉकों को जैविक ब्लॉक घोषित कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग जिला जैविक जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है, और आगे चमोली व पिथौरागढ़ को भी जैविक जनपद बनाने की तथा अगले चरण में सभी पर्वतीय जिलों को जैविक जिलों के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। साथ ही प्रदेश के जैविक उत्पादों के लिए प्रदेश में ही बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने को मुख्यमंत्री के स्तर से हरी झंडी मिल गई है। प्रस्तावित जैविक प्रदेश में जैविक खाद्यान्नों के साथ जैविक दालों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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नेपाली, तिब्बती, पैगोडा, गौथिक व ग्वालियर शैली में बना है नयना देवी मंदिर

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

“सरोवरनगरी की पहचान से जुड़ा नगर का प्राचीन नयना देवी मंदिर नेपाली, तिब्बती, पैगोडा व कुछ हद तक अंग्रेजी गौथिक व ग्वालियर शैली में भी बना हुआ है। इसकी स्थापना नगर के संस्थापकों में शामिल मूलतः नेपाल के निवासी मोती राम शाह के पुत्र अमर नाथ शाह ने अंग्रेजों से एक समझौते के तहत यहां लगभग सवा एकड़ भूमि पर 1883 में माता के जन्म दिन माने जाने वाली ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी की तिथि को की थी।

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