नवीन समाचार, चमोली, 27 मई 2026 (1 Lakh Reward for Prevent Wildfires)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जनपद के अंतर्गत गैरसैंण (Gairsain) विकासखंड की आदिबदरी (Adibadri) तहसील के बूंगा गांव (Boonga Village) में जंगल की आग ने एक और परिवार को गहरे दु:ख में डुबो दिया। मंगलवार देर शाम जंगल में लगी भीषण आग की चपेट में आने से 51 वर्षीय सुरेशी देवी (Sureshi Devi) की दर्दनाक मौत हो गई। तेज आंधी और तेजी से फैलती आग के बीच वह अपनी गौशाला की ओर जा रही थीं, तभी आग की लपटों में घिर गईं।
घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती वनाग्नि की गंभीरता और ग्रामीणों की असुरक्षा को सामने ला दिया है। हाल के दिनों में चमोली जिले में जंगल की आग से यह दूसरी बड़ी जनहानि मानी जा रही है। आप यह संबंधित वीडिओ भी जरूर देखना चाहेंगे : उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग, क्या हैं कारण ? कौन है जिम्मेदार ?
गौशाला जाते समय आग की चपेट में आईं महिला
प्राप्त जानकारी के अनुसार बूंगा गांव निवासी सुरेशी देवी मंगलवार शाम लगभग सात बजे गांव से करीब 200 मीटर दूर स्थित अपनी गौशाला की ओर जा रही थीं। उसी दौरान बदाढ़गाड जंगल (Badadhgad Forest) में लगी आग तेज हवा के कारण तेजी से फैलते हुए गौशाला क्षेत्र तक पहुंच गई।
ग्रामीणों के अनुसार उस समय क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान चल रहा था, जिससे आग अचानक भड़क उठी और महिला उसके बीच फंस गईं। आग से बुरी तरह झुलसने के बाद उन्होंने मदद के लिए आवाज लगाई, जिस पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह उन्हें बाहर निकाला। आप यह संबंधित वीडिओ भी जरूर देखना चाहेंगे : जंगल ये सारे किसने जलाए ?
अस्पताल ले जाने से पहले ही तोड़ा दम
ग्रामीणों ने महिला को घर पहुंचाया और अस्पताल ले जाने की तैयारी की, लेकिन गंभीर रूप से झुलस चुकी सुरेशी देवी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
चौकी प्रभारी आदिबदरी अनिल आगरी (Anil Agari) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जानकारी जुटाई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।
वन विभाग के धनपुर रेंज (Dhanpur Range) के रेंजर नवल किशोर नेगी (Naval Kishore Negi) ने बताया कि देर रात ग्रामीणों से घटना की सूचना मिलने पर वनकर्मियों को तत्काल मौके पर भेजा गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा वन पंचायत क्षेत्र में आग लगाई गई थी, जो तेज हवा के कारण आबादी और गौशाला क्षेत्र तक फैल गई।
चमोली में पहले भी जा चुकी है जान
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व चमोली जिले के बिरही (Birahi) क्षेत्र में भी जंगल की आग बुझाने के दौरान एक फायर वॉचर (Fire Watcher) की चट्टान से गिरकर मौत हो गई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने वन विभाग की चुनौतियों और पर्वतीय क्षेत्रों में वनाग्नि प्रबंधन की सीमाओं को उजागर किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में आग लगने की घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं, लेकिन समय रहते प्रभावी नियंत्रण और स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण जान-माल का खतरा बढ़ता जा रहा है।
वनाग्नि रोकने वालों को मिलेगा एक लाख रुपये तक पुरस्कार
नवीन समाचार, देहरादून, 27 मई 2026। उत्तराखंड सरकार ने जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं के बीच वनाग्नि नियंत्रण में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए नई पुरस्कार योजना की घोषणा की है।
वन मंत्री सुबोध उनियाल (Subodh Uniyal) ने मंगलवार को वन मुख्यालय में बताया कि वनाग्नि रोकने और बुझाने में बेहतर कार्य करने वाले वनकर्मियों, समूहों और व्यक्तियों को एक लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपये तक के पुरस्कार दिए जाएंगे।
पेयजल लाइनों पर लगाए जाएंगे हाइड्रेंट
वन मंत्री ने कहा कि जंगलों से गुजरने वाली पेयजल की पाइप लाइनों पर हाइड्रेंट लगाए जाएंगे, ताकि आग लगने की स्थिति में तत्काल पानी उपलब्ध कराया जा सके।
इसके साथ ही चीड़ पिरूल (Pine Needle) संग्रह अभियान के तहत इस वर्ष 8555 टन पिरूल एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे जंगलों में ज्वलनशील सामग्री कम हो और आग फैलने की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सके।
केवल 14 प्रतिशत फायर अलर्ट ही निकलते हैं वास्तविक
वन मंत्री ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) से प्राप्त फायर अलर्ट में कई बार खेतों, कूड़े अथवा अन्य स्थानों की आग भी शामिल हो जाती है। विभागीय जांच में केवल लगभग 14 प्रतिशत मामलों को वास्तविक वनाग्नि पाया गया।
सीसीएफ वनाग्नि सुशांत पटनायक (Sushant Patnaik) ने बताया कि इस वर्ष 5,625 फायर वॉचर और लगभग छह हजार वनकर्मी वनाग्नि नियंत्रण में तैनात हैं। सभी का 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कराया गया है तथा उन्हें अग्निरोधी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
वन विभाग के अनुसार अल्मोड़ा (Almora), चमोली, रुद्रप्रयाग (Rudraprayag), पौड़ी (Pauri), टिहरी (Tehri), उत्तरकाशी (Uttarkashi), नैनीताल और पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले इस समय वनाग्नि की दृष्टि से सबसे संवेदनशील बने हुए हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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