नवीन समाचार, टिहरी गढ़वाल, 14 जुलाई 2026 (Ketan Murder Case-Minor Pregnant-POSCO)। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल (Tehri Garhwal) जनपद के प्रतापनगर (Pratapnagar) क्षेत्र के बहुचर्चित केतन लाल (Ketan Lal) हत्याकांड में जांच ने महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। जिस मामले में दलित युवक केतन लाल की कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या के आरोप में चार लोग पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं, उसी प्रकरण में अब मृतक केतन लाल और उसके मित्र दिवाकर डिमरी (Diwakar Dimri) के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) तथा दुष्कर्म की धाराओं में नया अभियोग पंजीकृत किया गया है।
यह कार्रवाई नाबालिग किशोरी की मां की शिकायत, उच्च न्यायालय (High Court) के निर्देश पर कराए गए चिकित्सीय परीक्षण में किशोरी के गर्भवती होने की पुष्टि होने तथा पुलिस विवेचना के आधार पर की गई है।
संबंधित पुलिस अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतापनगर विकासखंड (Pratapnagar Block) की निवासी नाबालिग किशोरी की मां ने लंबगांव थाना (Lambgaon Police Station) में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि 7 जून की रात केतन लाल और उसके मित्र दिवाकर डिमरी उनके घर में घुस आये तथा उनकी नाबालिग पुत्री के साथ जबरदस्ती की। उनका आरोप था कि शिकायत देने के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के निर्देश पर किशोरी का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।
चिकित्सीय परीक्षण के बाद बदली जांच की दिशा
लंबगांव के थानाध्यक्ष डीपी काला (DP Kala) के अनुसार न्यायालय के निर्देश पर कराए गए चिकित्सीय परीक्षण में नाबालिग के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है तथा वह गर्भवती भी पाई गई है। इसी आधार पर पुलिस ने मृतक केतन लाल और दिवाकर डिमरी के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita-BNS) की दुष्कर्म संबंधी धाराओं में नया अभियोग पंजीकृत किया है। पुलिस ने मामले की विवेचना महिला उप निरीक्षक हेमलता (Hemlata) को सौंपी है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों तथा वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रेम-प्रसंग से हत्या तक, कैसे बढ़ा विवाद
उल्लेखनीय है कि 18 वर्षीय केतन लाल प्रतापनगर क्षेत्र के देवल गांव (Deval Village) का निवासी तथा कक्षा 12 का विद्यार्थी था। आरोप है कि उसका गांव की एक नाबालिग किशोरी से प्रेम-प्रसंग था। 7 जून की रात वह अपने मित्र दिवाकर डिमरी के साथ किशोरी के बुलावे पर उसके गांव पहुंचा था। इसके बाद दोनों को कथित रूप से किशोरी के परिजनों ने पकड़ लिया और रातभर कमरे में बंद कर पीटा।
अगली सुबह दोनों गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले। केतन लाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre-CHC) लंबगांव ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई, जबकि दिवाकर डिमरी को गंभीर अवस्था में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश (AIIMS Rishikesh) संदर्भित किया गया।
केतन लाल की मृत्यु के बाद उसके परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। मृतक के अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) समुदाय से होने के कारण मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। विभिन्न दलित संगठनों ने प्रदर्शन किए और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ (Chandrashekhar Azad ‘Ravan’) भी इस प्रकरण को लेकर उत्तराखंड पहुंचे थे। पुलिस ने किशोरी के पिता, दादा सहित चार आरोपितों को भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था।
अब दो समानांतर विवेचनाओं पर टिकी नजर
मामले में अब दो अलग-अलग अभियोग समानांतर रूप से विवेचना के अधीन हैं। एक ओर केतन लाल की मृत्यु के मामले में हत्या तथा एससी-एसटी अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर नाबालिग किशोरी की शिकायत और चिकित्सीय परीक्षण के आधार पर केतन लाल तथा दिवाकर डिमरी के विरुद्ध पॉक्सो और दुष्कर्म के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। ऐसे में इस बहुचर्चित प्रकरण का अंतिम निष्कर्ष पुलिस विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले प्रमाणों पर निर्भर करेगा।
इस प्रकरण ने एक बार फिर यह प्रश्न भी खड़ा किया है कि संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों की शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कितनी महत्वपूर्ण है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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