आंकड़ों में पर्यटन
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नैनीताल नगर में वर्ष 2001 के लगभग 3.6 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि वर्ष 2011 में 8.42 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर लगभग 9.34 लाख हो गई। कोविड काल में वर्ष 2020 में पर्यटकों की संख्या घटकर करीब 2.15 लाख रह गई, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार सुधार हुआ। वर्ष 2023 में नैनीताल नगर में लगभग 7.84 लाख पर्यटक पहुंचे।
दूसरी ओर, जनपद स्तर के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 10.24 लाख और वर्ष 2025 में 13.11 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। जबकि इस वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक ही जनपद में 12.12 लाख से अधिक पर्यटकों के पहुंचने की सूचना है। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि वर्ष 2001 के लगभग 3.6 लाख पर्यटकों के आंकड़े की तुलना वर्ष 2025 के जनपद स्तरीय आंकड़े से सीधे नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों के भौगोलिक दायरे अलग हैं। 2001 के आँकड़े केवल नैनीताल मुख्यालय के हैं, जबकि 2025 के आंकड़े पूरे जनपद के हैं।
पर्यटन के विस्तार का एक महत्वपूर्ण पक्ष ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे (Homestay) का बढ़ना है। पहले जहां पर्यटक मुख्य रूप से नैनीताल नगर के आसपास होटलों में ठहरते थे, वहीं अब गांवों में प्राकृतिक वातावरण, स्थानीय भोजन और पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव लेने के लिए भी पहुंच रहे हैं। प्यूड़ा (Pyura), पंगोट, रामगढ़ और भीमताल क्षेत्र में इस तरह के पर्यटन से स्थानीय लोगों को आय के अवसर मिले हैं।
‘विरासत परियोजना’ के तहत स्थापित हो रहा ‘बाखली’ ब्रांड
इस दिशा में ‘विरासत परियोजना’ (Virasat Project) भी उल्लेखनीय है। इसके अंतर्गत जनपद के 60 पारंपरिक घरों को महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से होमस्टे के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन्हें ‘बाखली’ (Baakhli) ब्रांड के तहत पहचान देने और पर्यटन विभाग के सहयोग से संचालित करने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य पुराने पारंपरिक भवनों को उपयोग में लाने के साथ ग्रामीण महिलाओं को पर्यटन कारोबार से जोड़ना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका बढ़ी
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका भी बढ़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नैनीताल जनपद में 5,305 स्वयं सहायता समूहों से 39 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जिनमें 22 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी (Lakhpati Didi) बन चुकी हैं।
भीमताल बेकरी ग्रोथ सेंटर (Bhimtal Bakery Growth Centre), कोटाबाग एलईडी ग्रोथ सेंटर (Kotabagh LED Growth Centre), रामगढ़ फूड प्रोसेसिंग सेंटर (Ramgarh Food Processing Centre), रामनगर ऑर्गेनिक एवं स्मृति चिह्न केंद्र (Ramnagar Organic and Souvenir Centre) तथा बेतालघाट स्पाइस ग्रोथ सेंटर (Betalghat Spice Growth Centre) जैसे प्रयास स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
कैंची धाम से साहसिक पर्यटन तक बढ़े नए आकर्षण
नैनीताल जनपद में पर्यटन के विस्तार का एक बड़ा कारण कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या भी है। बाबा नीब करौरी (Baba Neem Karoli) के आश्रम में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने से भवाली और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही भीमताल और नौकुचियाताल में नौकायन तथा पैराग्लाइडिंग (Paragliding), पंगोट में पक्षी अवलोकन (Bird Watching), जबकि मुक्तेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में प्रकृति पर्यटन, पैदल भ्रमण और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
जनपद में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (Corbett Tiger Reserve) और रामनगर क्षेत्र का पर्यटन भी रोजगार तथा स्थानीय कारोबार का महत्वपूर्ण आधार है। इस प्रकार नैनीताल का पर्यटन अब केवल झील और मॉल रोड देखने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक, ग्रामीण, साहसिक, वन्यजीव और प्रकृति आधारित पर्यटन के रूप में विकसित हुआ है।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ बुनियादी सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ा
लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ बुनियादी सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ा है। नैनीताल नगर में पार्किंग की सीमित व्यवस्था, मॉल रोड और प्रवेश मार्गों पर जाम, झील में प्रदूषण तथा कूड़े के निस्तारण की समस्या गंभीर होती जा रही है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने भी मार्च 2024 में नैनीताल में वाहनों की बढ़ती संख्या, पार्किंग की कमी और यातायात बाधित होने से आपातकालीन सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता जताई थी। पर्यटन सीजन में नगर में वाहनों की संख्या उपलब्ध पार्किंग क्षमता से कहीं अधिक हो जाती है।
इसी चुनौती को देखते हुए नैनीताल, कैंची धाम और भवाली सहित प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों की वहन क्षमता (Carrying Capacity) का आकलन करने की पहल भी हुई है। इसके साथ बहुस्तरीय पार्किंग, यातायात प्रबंधन और अन्य सुविधाओं पर विचार किया जा रहा है। हालांकि केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ना पर्यटन विकास का पूरा पैमाना नहीं हो सकता। यह भी जरूरी है कि पर्यटकों से होने वाली आय का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे, महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिले तथा झीलों, जंगलों और पहाड़ी पर्यावरण पर अनियंत्रित दबाव न पड़े।
इस तरह नैनीताल जनपद में पिछले 26 वर्षों का पर्यटन विकास एक ओर नए रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अवसरों की कहानी है, तो दूसरी ओर यह चेतावनी भी देता है कि पर्यटन का विस्तार स्थानीय संसाधनों और पर्यावरण की क्षमता के अनुरूप ही होना चाहिए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
