नवीन समाचार, नैनीताल, 4 नवंबर 2026 (Congress-BJP Clash over Govt Land)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी निवेश के लिए 60 से 90 वर्ष तक लीज पर देने के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्तियां निजी निवेशकों को सौंपने की तैयारी करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने इसके विरोध में बुधवार को प्रदेशभर में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान शुरू किया। दूसरी ओर भाजपा ने ज्योलीकोट में विकास समर्थन सभा आयोजित कर सरकार के फैसले का बचाव किया और स्पष्ट किया कि जमीन का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा, केवल निर्धारित शर्तों पर उसके उपयोग का अधिकार लीज पर दिया जा रहा है।
कांग्रेस के अनुसार, यह मामला केवल सरकारी जमीनों को पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनों के वास्तविक स्वामित्व, रकबे, पैमाइश, मूल्यांकन और विभागीय सहमति से भी जुड़ा है। भाजपा का तर्क है कि वर्षों से अनुपयोगी पड़ी संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल होने से निवेश, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इस तरह बहस का केंद्र सरकारी संपत्तियों के उपयोग का तरीका और उससे होने वाला सार्वजनिक लाभ बन गया है।
यशपाल आर्य ने उठाए जमीन के स्वामित्व और पैमाइश पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Yashpal Arya) ने बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य गुरदीप सप्पल (Gurdeep Sappal), जिला कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ पटवाडांगर की 13.64 एकड़ जमीन तथा लोक निर्माण विभाग के ज्योलीकोट स्थित निरीक्षण भवन को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया का विरोध किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के 11 स्थानों पर संबंधित सरकारी संपत्तियों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया।
आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार प्रचलित बाजार दरों के अनुसार लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक संपत्तियों को 60 से 90 वर्ष के लिए निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीनों को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) और सिडकुल (SIDCUL) को देने के निर्णय मुख्यमंत्री ने अकेले लिए हैं, जबकि उनके अनुसार ऐसे निर्णय मंत्रिमंडल की सामूहिक शक्तियों के दायरे में आने चाहिए।
आर्य ने दावा किया कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार लगभग 1,232 एकड़ भूमि यूआईआईडीबी और सिडकुल को देने के प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 560 एकड़ भूमि देने की कार्यवाही जारी है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवनों को भी निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चलने का आरोप लगाया।
पटवाडांगर की जमीन के संबंध में उन्होंने सरकारी अभिलेखों में अलग-अलग विवरण होने का मुद्दा उठाया। आर्य के अनुसार, अक्टूबर 2023 की बैठक में इस जमीन को जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से संबंधित बताते हुए लगभग 60 एकड़ बताया गया। जून 2024 में इसे कृषि एवं उद्यान विभाग की 80 एकड़ भूमि, जनवरी 2025 के शासनादेश में कृषि विभाग की 103 एकड़ भूमि और अगस्त 2025 की बैठक में जैव प्रौद्योगिकी परिषद स्थित भूमि बताया गया। सितंबर 2025 की अधिसूचना में इसका रकबा 108 एकड़ दर्ज किया गया।
उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय के लिए भी अलग-अलग दस्तावेजों में कभी 30, कभी 15 और कभी 26.4 एकड़ भूमि का उल्लेख होने की बात कही। आर्य ने सवाल उठाया कि जब एक ही जमीन के रकबे और स्वामित्व के संबंध में सरकारी अभिलेखों में अलग-अलग विवरण हैं तो उसे निजी निवेश के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
उनका आरोप है कि 15 जनवरी 2025 के शासनादेश में पटवाडांगर की 103 एकड़ भूमि को कृषि विभाग के स्वामित्व वाली बताकर उसमें से 23 एकड़ भूमि प्रीमियम रिसॉर्ट के लिए यूआईआईडीबी को दे दी गई, जबकि उस समय जमीन की पैमाइश और अभिलेख उपलब्ध नहीं थे। उनके अनुसार, सितंबर 2025 में राजस्व विभाग ने गांव का सर्वेक्षण और अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की।
राजस्व परिषद ने 9 सितंबर 2025 को नैनीताल के जिलाधिकारी को लिखे पत्र में 108 एकड़ भूमि वन एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं होने की बात कही थी। आर्य ने पूछा कि जब जमीन का स्वामित्व ही स्पष्ट नहीं था तो उसे कृषि विभाग की भूमि बताकर दूसरी संस्था को कैसे सौंप दिया गया।
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और ऐतिहासिक भवनों की लीज का मामला भी उठाया
यशपाल आर्य ने नैनीताल शहर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नैनीताल के जिलाधिकारी ने पटवाडांगर के अतिरिक्त अन्यत्र जमीन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी थी और यह परियोजना एशियाई विकास बैंक की योजना में भी चयनित थी। इसके बावजूद अगस्त 2025 में होटल परियोजना पर विपरीत प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए सीवर प्लांट को वन भूमि पर ले जाने के निर्देश दिए गए।
आर्य के अनुसार पटवाडांगर की 13.64 एकड़ जमीन 90 वर्ष के लिए 37.80 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य और पांच रुपये प्रति वर्गमीटर सालाना किराये पर दी जा रही है, जबकि इसका बाजार मूल्य लगभग 82 करोड़ रुपये है। उन्होंने पटवाडांगर में अंग्रेजों के समय से देश के प्रमुख वैक्सीन संस्थान के संचालित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और संस्थागत महत्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने वर्ष 1871 में बने ज्योलीकोट निरीक्षण भवन, वर्ष 1899 में बने रामगढ़ निरीक्षण भवन, कैंचीधाम मार्ग पर वर्ष 1878 के रातीघाट निरीक्षण भवन और वर्ष 1866 के रानीबाग निरीक्षण भवन सहित कई ऐतिहासिक संपत्तियों को भी निजी हाथों में देने की सूची में शामिल बताया। इसके अतिरिक्त रामगढ़ की 15 एकड़ भूमि, एचएमटी रानीबाग की 53 एकड़ भूमि और कॉर्बेट की सीमा से लगे पाटकोट की 37 एकड़ भूमि का भी उल्लेख किया।
डाकपत्थर, पाटकोट और धनौल्टी-मगरा की जमीनों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बंदोबस्त, खसरा संख्या, पैमाइश और भूमि मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जमीन देने के निर्णय लिए जा रहे हैं। आर्य ने कहा कि सरकार एक ओर क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रही है और भूमिहीन गरीब परिवारों को आवास देने के लिए भी भूमि की कमी बताती है, वहीं दूसरी ओर बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन निजी निवेश के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इसे गरीबों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों के हितों के विपरीत बताया।
कांग्रेस नेता ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ जमीन लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को देने का मामला भी उठाया। उन्होंने सरकार से सभी निविदाएं निरस्त करने, यूआईआईडीबी को दी गई जमीनें संबंधित विभागों को लौटाने, 22 दिसंबर 2022 के मंत्रिमंडल निर्णय को वापस लेने और जॉर्ज एवरेस्ट की लीज निरस्त करने की मांग की। साथ ही पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग भी की।
भाजपा ने कहा, संपत्तियां बेची नहीं जा रहीं, उपयोग का अधिकार दिया जा रहा है
कांग्रेस के आरोपों के जवाब में भाजपा ने बुधवार को ज्योलीकोट में विकास समर्थन सभा और सांकेतिक प्रदर्शन आयोजित किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सरकारी जमीनों और भवनों को बेचना या उनका निजीकरण करना नहीं है। वर्षों से अनुपयोगी पड़ी सरकारी संपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लीज पर देकर उनका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की योजना है।
भाजपा नेताओं के अनुसार, लीज पर दिए जाने के बाद भी जमीन का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा। निजी निवेशक केवल निर्धारित शर्तों के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और सरकारी संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कर होटल, पर्यटन तथा व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे प्रदेश में निवेश आने के साथ स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि वर्षों से बंद पड़े भवनों और अनुपयोगी जमीनों का उपयोग स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है तो कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है। उन्होंने तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस सरकारों की निवेश एवं औद्योगिक भूमि संबंधी नीतियों का हवाला देते हुए कांग्रेस से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा।
भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस जेन-जी युवाओं की भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है, जबकि सरकार युवाओं को विकास, पर्यटन, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना चाहती है। उनका कहना था कि प्रदेश से पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
सरिता आर्य ने विकास और रोजगार के प्रयासों का किया समर्थन
नैनीताल की विधायक सरिता आर्य (Sarita Arya) ने कहा कि कांग्रेस सत्ता और वोट बैंक की राजनीति करती रही है। विकास और रोजगार से जुड़े प्रयासों का विरोध उसकी राजनीतिक सोच को दर्शाता है। भाजपा मंडल अध्यक्ष नितिन कार्की ने कहा कि सरकारी संपत्तियों को लीज पर देकर पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। सरकार की मंशा संपत्तियों को बेचने की नहीं, बल्कि उनका उपयोग सुनिश्चित कर स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की है।
दर्जा राज्य मंत्री शांति मेहरा ने कहा कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होने से स्थानीय परिवारों, व्यापारियों और युवाओं को लाभ मिल सकता है। सभा में दयाकिशन पोखरिया और अरविंद पड़ियार सहित अन्य लोगों ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री पुष्कर जोशी ने किया।
सभा के अंत में भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस का सांकेतिक पुतला दहन किया। इस अवसर पर महिला आयोग सदस्य विमला अधिकारी, हेम आर्य, प्रगति जैन, सुरेश उप्रेती, हरगोविंद रावत, कविता गंगोला, अंबा दत्त आर्य, मोहन पाल और भुवन आर्य सहित अनेक भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जमीनों के अभिलेख, मूल्यांकन और लीज की शर्तें होंगी बहस का आधार
सरकारी जमीनों के उपयोग को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच छिड़ी यह बहस अब प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बनती दिख रही है। कांग्रेस का मुख्य सवाल जमीनों के स्वामित्व, वास्तविक रकबे, बाजार मूल्य, विभागीय सहमति और लीज की लंबी अवधि को लेकर है। वहीं भाजपा का तर्क है कि जमीनों का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा और लीज के माध्यम से निवेश तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका संबंधित जमीनों के राजस्व अभिलेखों, वास्तविक पैमाइश, भूमि मूल्यांकन, निविदा की शर्तों, लीज की अवधि और सरकार द्वारा निर्धारित उपयोग की शर्तों की होगी। इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित संपत्तियों को किस आधार पर लीज पर देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है और उससे प्रदेश तथा स्थानीय लोगों को क्या लाभ मिलने की संभावना है। फिलहाल कांग्रेस ने अपने विरोध अभियान को प्रदेशव्यापी बनाने का संकेत दिया है, जबकि भाजपा सरकार के फैसले को विकास और रोजगार से जोड़कर उसका बचाव कर रही है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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