इस बाबा ने उत्तराखंड के एक सेब को चख कर बना दिया था ‘APPLE’, आप भी 15 को ले सकते हैं ऐसा ही आशीर्वाद

क्या आप जानते हैं दुनिया की मशहूर APPLE कंपनी का लोगो आधे खाए सेब का क्यों है ? सच्चाई यह है कि यह सेब वास्तव में उत्तराखंड की सेब, आड़ू, खुबानी व पुलम आदि फलों के लिए विख्यात नैनीताल जिले की रामगढ-भवाली फल पट्टी का है, जिसे यहाँ भवाली के पास कैंची धाम के बाबा नीब करौरी ने आधा खाया हुआ है। उन्होंने यह सेब आधा खाकर तब भारी घाटे में चल रही APPLE कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स को दिया था, जिन्होंने इसे प्रसाद स्वरुप अपनी कंपनी का लोगो और नाम बना दिया, और कंपनी चल निकली, और आज जैसे मुकाम पर है। आप भी चाहें तो ऐसे बाबा नीब करौरी का आशीर्वाद ले सकते हैं। ऐसा मौक़ा अब आगामी 15 जून को बाबा के धाम कैंची में लगने वाले मेले में मिल सकता है।
हुआ यह कि 1 अप्रैल 1979 को कम्प्यूटर किट बनाने के लिए स्टीब वेजनियर, स्टीब जॉब्स व रोनाल्ड वेन ने एक कम्पनी की कैलिफोर्निया अमेरिका में  स्थापना की। शुरुआती दौर में कम्पनी को घाटा उठाना पड़ा और स्टीब जॉब्स शांति की तलाश में  भटकते हुए भारत के उत्तराखण्ड आ गए जहां  वे नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम के नीब करौरी बाबा की शरण में शरणागत हो गए। एक दिन नीब करौरी बाबा ने प्रसाद के रूप में उन्हें अपना एक निवाला बनाया सेब दिया। स्टीब जॉब्स ने उसे ही अपनी सफलता का सूत्र माना और कैलिफोर्निया जाकर एप्पल कम्पनी का वही सेब लोगो बना डाला। इसीलिए एप्पल का यह सब एक ओर से कटा हुआ नजर आता  है।
नीम करौली बाबा की स्टीब जॉब्स पर ऐसी कृपा बरसी की एप्पल इलेक्ट्रॉनिक की दुनिया का बादशाह बन गया और वर्तमान में उसकी 500 से ज्यादा शाखाएं पूरी दुनिया में हैं। लगभग एक लाख से ज्यादा कर्मचारी व कई मिलियन डॉलर का व्यवसाय कर रही एप्पल कम्पनी के स्टीब जॉब्स दूसरे ऐसे शख्स हैं जिन्हें मार्क जुकरबर्ग की तरह कैंची धाम में बाबा का आशीर्वाद मिला। देश दुनिया के जाने ऐसे कितने अरब खरबपतियों का जमावड़ा हर साल लगा रहता है। हर साल 15 जून को यहां स्थापना दिवस पर मेला लगता है।
 स्टैंडर्ड स्वीट हल्द्वानी केे स्वामी लाला रामकिशन :
” मेरी माली हालत बहुत खराब थी। काम धन्धा कुछ नही था। बडे भाई की दुकान पर मैं उनके कर्मचारी की हैसियत से काम करता था। बडे भाई के साथ ही एक बार मैं कैंची धाम गया। बाबा ने मुझसे कहा, “मैंं तुझसे जो मागूंगा, लायेगा ?” “मैने कहा “अगर हिम्मत हुई तो जरूर लाऊँगा।” तब बाबा ने कहा, “देख सवा मन देसी घी के लड्डू अपने हाथ से बनाकर लाना हनुमान जी के लिये। बोल लायेगा ?” मैं मन ही मन बोल उठा, “अरे ये क्या कह दिया आपने , मेरे पास तो सवा किलो आटा भी अपना नही।” फिर भी मेरे मुह से निकल गया, “अच्छा महाराजजी।”और वापस हल्द्वानी आ गया।
कराया तो सब कुछ बाबा ने ही, दो ती  हफ़्तों मेंं सवा मन लड्डू तैयार कर लिये। उन्हे लेकर बाबा जी के पास हाजिर हुआ। बाबा ने लड्डुओ का भोग लगवाकर मेरे हाथ से ही सबको प्रसाद पवाया। इसके बाद एक बार फिर कैंची गया ! वहाँ भण्डारा चल रहा था ! मैने भी सेवा की इच्छा की तो बाबा जी बोले , “” यहाँ नही तु अपनी दुकान खोल !”” मैने कहा ,”” बाबा मै तो पागल हूँ ! दुकान कैसे करूँगा ! तब बाबा बोले , “” देख, एक तु पागल और एक मै पागल हूँ ! जा अपना काम शुरू कर !”” और मुझे गीता की एक पुस्तक देते हूये कहा , “अपनी घरवाली को दे देना ! कहना, पढा करे !”” न मालुम क्या अर्थ था इसका !
बाबा जी ही जाने कि कैसे कैसे , क्या क्या , कहाँ कहाँ से हो गया , पर उनके चमत्कार स्वरूप आज मेरे पास एक बडी दुकान ( स्टैण्डर्ड स्वीट हाउस ) है ! और जिस हैसियत से मै ( कर्मचारी ) से मै स्वंय काम करता था , उस हैसियत के दस कर्मचारी आज मेरी दुकान पर काम करते है ! बाबा जी की दया ही दया है ! सब बदल गया उनकी कृपा से !”

राम जी सबका भला करें।
*जय जननी जय भारत*

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-सिलिकॉन वैली में जुकरबर्ग ने मोदी से किया था इस मंदिर का जिक्र, कहा था-फेसबुक को खरीदने के लिए फोन आने के दौर में इस मंदिर ने दिया था परेशानियों से निकलने का रास्ता
नवीन जोशी, नैनीताल। गत दिवस फेसबुक के संस्थापक व प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक मुख्यालय में मोदी से सवाल पूछने के दौरान अपने बुरे दिन याद करते हुए मोदी को बताया था, ‘जब 2011 के दौर में फेसबुक को खरीदने के लिए अनेक लोगों के फोन आ रहे थे, और वह परेशानी में थे । तब वे अपने गुरु एप्पल (दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी) के संस्थापक स्टीव जॉब्स से मिले। जॉब्स ने उन्हें कहा कि भारत जाओ तो उत्तराखंड स्थित बाबा नीब करौरी (अपभ्रंश नीम करोली) के कैंची धाम जरूर जाना। इस पर उन्होंने 2013 में एप्पल कंपनी के तत्कालीन प्रमुख टिम कुक के साथ कैंची धाम के दर्शन किए थे। इसी दौरान करीब एक वर्ष भारत में रहकर उन्होंने यहां लोगों के आपस में जुड़े होने को नजदीकी से देखा, और इससे उनका फेसबुक को एक-दूसरे को जोड़ने के उपकरण के रूप में और मजबूत करने का संकल्प और इरादा और अधिक मजबूत हुआ और उन्होंने फेसबुक को किसी को न बेचकर खुद ही आगे बढ़ाया।
वहीं एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की बात करें तो स्टीव स्वयं अवसाद के दौर से गुजरने के दौर में 1973 में एक बेरोजगार युवा-हिप्पी के रूप में अपने मित्र डैन कोटके के साथ बाबा नीब करोलीके दर्शन करने आये थे, किंतु इसी बीच 11 सितम्बर 1973 को बाबा के शरीर त्यागने के कारण वह दर्शन नहीं कर पाए, लेकिन यहां से मिली प्रेरणा से उन्होंने अपने एप्पल फोन से 1980 के बाद दुनिया में मोबाइल क्रांति का डंका बजा दिया। यहां तक ​​कहा जाता है की स्टीव ने अपने मशहूर मोनोग्राम (एक बाइट खाये सेब) को कैंची धाम से ही प्रेरित होकर ही बनाया है।

उल्लेखनीय है कि कैंची धाम वर्ष 2013 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दिनों में बराक ओबामा द्वारा अपनी जेब में हमेशा हनुमान जी की मूर्ति रखे जाने की स्वीकारोक्ति के दौर में उनके अमेरिकी समर्थकों द्वारा में उनकी जीत के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किए जाने के कारण भी खासा चर्चा में रहा था। कहते हैं कि यह यज्ञ उनकी पत्नी मिशेल ओबामा द्वारा कराया गया था।
इससे पूर्व मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री व फैशन मॉडल जूलिया रॉबर्ट्स का भी बाबा से अद्भुत प्रसंग जुड़ा। हालीवुड की हॉट अभिनेत्री, सुपर स्टार, प्रोड्यूसर और फैशन मॉडल जूलिया राबर्ट्स ने खुद एक पत्रिका को दिए दिए इंटरव्घ्यू में बताया है कि वह आजकल हिंदू धर्म का पालन कर रही हैं। जूलिया ने इस इंटरव्यू में कहा, ‘नीब करोरी बाबा की एक तस्वीर देख कर मैं उस शख्स के प्रति एकदम मोहित हो गई। मैं कह नहीं सकती कि उनकी कौन सी बात मुझे इतनी अच्छी लगी कि मैं उनके सम्मोहन में फंस गई है।’ 42 साल की जूलिया ने कहा कि हिंदू धर्म में कुछ ऐसा तो है जो मैं इसकी मुरीद हो गई और आजकल इसका पालन भी कर रही हूं । कैथलिक मां और बैप्टिस्ट पिता की संतान जूलिया ने दोहराया कि वह पूरे परिवार के साथ मंदिर जाती हैं, मंत्र पढ़ती हैं और प्रार्थना करती हैं।
वहीं मार्क्सवादी विचारधारा से प्रेरित और नास्तिक रहे डा. लैरी ब्रिलिएंट का बाबा से जुड़ा किस्सा भी बेहद रोचक है। कहा जाता है कि लैरी अपने दोस्तों के साथ बाबा नीब करौरी से मिले थे। इस दौरान उनके दोस्तों ने बाबा को प्रणाम किया था, लेकिन लैरी ने बाबा को प्रणाम नहीं किया। इसी दौरान बाबा ने उन्हें ‘यूएनओ डॉक्टर “कह कर संबोधित किया। इससे लैरी और अधिक चिढ़ गए कि बाबा उन्हें कह रहे हैं-‘तुम डॉक्टर नहीं हो।” लेकिन बताया जाता है कि इस घटना के कुछ ही समय के बाद लैरी को ‘यूएनओ’ यानी ‘यूनाइटेड नेशंश ऑर्गनाइजेशन’ में डॉक्टर पद के लिए ऑफर मिल गया। इसके बाद लैरी भी बाबा के अनन्य भक्त हो गए, और अक्सर कैंची धाम आते रहते हैं।

नेहरू, ओबामा, स्टीव, मार्क, लैरी व जूलिया राबर्टस जैसे भक्तों के राज खोलेगी पुस्तक-लव एवरीवन

Raghvendra das-Ram Das

बाबा राघवेन्द्र दास व गुरु रामदास

Love Everyoneबाबा नीब करौरी के भारत ही नहीं दुनिया भर में लाखों की संख्या में भक्त हैं। हालांकि उनके भक्त उन्हें अनेक चमत्कारों के लिए याद करते हैं। मसलन उनके कैंची धाम में आज भी मौजूद एक उत्तीस के हरे-भरे पेड़ के लिए कहा जाता है कि वह बाबा के जीवन काल में ही सूख गया था, और बाबा के भक्त उस सूखे ठूँठ को काटना चाहते थे, बाबा ने कहा ‘इस पर जल चढ़ाव, आरती करा, यह हरा-भरा हो जाएगा’, सचमुच ऐसा ही हुआ। किंतु एक ऐसा वृत्तांत भी मिलता है जब बाबा ने एक मृत बालक को बहुत प्रार्थना के बाद भी जिलाने से इनकार कर दिया था। बाबा का तर्क था कि ब्रह्मा की बनाई सृष्टि के बनाए नियमों में बदलाव का हक किसी को नहीं है।

वहीँ, मार्क जुकरबर्ग का खुलासा तो अब हुआ है, जबकि बाबा के भक्तों में देश के बड़े राजनयिकों, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, हिमांचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल स्व. राजा भद्री, केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उत्तराखंड सरकार में सचिव मंजुल कुमार जोशी से लेकर गुरु रामदास के नाम से प्रसिद्ध हुए हारवर्ड विश्व विद्यालय बोस्टन के डा. रिचर्ड एलपर्ट सहित योगी भगवान दास, संगीतकार जय उत्पल, कृष्णा दास, लामा सूर्य दास, मानवाधिकारवादी डा. लैरी ब्रिलिएंट, स्टीव जॉब्स तथा इन सब बाबा के भक्तों और उनके बाबा नीब करोली के साथ हुए दिव्य अनुभवों एवं उनके द्वारा बाबा के लिए प्रयोग किए गए शब्दों को उनके भक्त गुरु रामदास के नाम से प्रसिद्ध हुए ‘बि हियर नाउ’ के लेखक डा. रिचर्ड एलपर्ट ‘लव एवरीवन’ के नाम से संग्रहीत कर रहे हैं।

बाबा नीब करोरी का कैंची धाम: जहाँ बाबा करते हैं भक्तों से बातें

देवभूमि के ऐसे ही रमणीय स्थानों में 20वीं सदी के महानतम संतों व दिव्य पुरुषों में शुमार बाबा नीब करौरी महाराज का कैंची धाम है, जहां अकेले हर वर्ष इसके स्थापना दिवस 15 जून को ही लाखों सैलानी जुटते हैं। बाबा की हनुमान जी के प्रति अगाध आस्था थी, और उनके भक्त उनमें भी हनुमान जी की ही छवि देखते हैं, और उन्हें हनुमान का अवतार मानते हैं। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा उनकी रक्षा करते हैं, और साक्षात दर्शन देकर मनोकामनाऐं पूरी करते हैं । यहां सच्चे दिल से आने वाला भक्त कभी खाली नहीं लौटता। यहां बाबा की मूर्ति देखकर ऐसे लगता है जैसे वह भक्तों से साक्षात बातें कर रहे हों।
कैंची धाम उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटक स्थल नैनीताल से मात्र 18 किमी की दूरी पर अल्मोड़ा-रानीखेत मार्ग पर देश-दुनिया में विरले ही मिलने वाली उत्तरवाहिनी क्षिप्रा नदी के तट पर तकरीबन कैंची के आकार के दोहरे ‘हेयर पिन बैण्ड’ पर स्थित है। बाबा के कैंची आने की कथा भी बड़ी रोचक है । मंदिर के करीब रहने वाले पूर्णानंद तिवाड़ी के अनुसार 1942 में एक रात्रि खुफिया डांठ नाम के निर्जन स्थान पर एक कंबल ओढ़े व्यक्ति ने कथित भूत के डर से भय मुक्त कराया, और 20 वर्ष बाद लौटने की बात कही। वादे के अनुसार 1962 में वह रानीखेत से नैनीताल लौटते समय कैंची में रुके और सड़क किनारे के पैराफिट पर बैठ गए और पूर्णानंद को बुलाया।

Kainchi Temple (1)Baba Neeb Karori Temple, Kainchi (Nainital)कहा जाता है कि इससे पूर्व सोमवारी बाबा इस स्थान पर भी धूनी रमाते थे, जबकि उनका मूल स्थान पास ही स्थित काकड़ीघाट में कोसी नदी किनारे था। सोमवारी बाबा के बारे में प्रसिद्ध था कि एक बार भण्डारे में प्रसाद बनाने के लिए घी खत्म हो गया। इस पर बाबा ने भक्तों से निकटवर्ती नदी से एक कनस्तर जल मंगवा लिया, जो कढ़ाई में डालते ही घी हो गया। तब तक निकटवर्ती भवाले से घी का कनस्तर आ गया। बाबा ने उसे वापस नदी में उड़ेल दिया। लेकिन यह क्या, वह घी पानी बन नदी में समाहित हो गया।

इधर जब नीब करौरी बाबा कैंची से गुजरे तो उन्हें कुछ देवी सिंहरन सी हुई, इस पर उन्होंने 1962 में यहाँ आश्रम की स्थापना की। बाद में 15 जून 1973 को यहां विंध्यवासिनी और ठीक एक साल बाद मां वैष्णों देवी की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। 1964 से मन्दिर का स्थापना दिवस समारोह अनवरत 15 जून को मनाया जा रहा है।
बाबा का जन्म आगरा के निकट फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में जमींदार घराने में मार्गशीर्ष माह की अष्टमी तिथि को हुआ था। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मणदास शर्मा था। इस नाम से उत्तर प्रदेश के जिला फर्रुखाबाद में एक रेलवे स्टेशन है। कहते हैं कि एक बार छापामार दस्ते ने बाबा को टिकट न होने के कारण इस स्थान पर ट्रेन से उतार दिया। लेकिन यह क्या, बाबा के उतरने के बाद ट्रेन लाख प्रयत्नों के बावजूद यहां से चल नहीं सकी। बाद में रेलकर्मियों ने बाबा की महिमा जान उन्हें आदर सहित वापस ट्रेन में बैठाया, जिसके बाद बाबा के ‘चल’ कहने पर ही ट्रेन चल पड़ी। तभी से इस स्थान पर रेलवे का छोटा स्टेशन बना और इस स्टेशन का नाम लक्ष्मणदास पुरी पड़ा। कहते हैं कि फर्रुखाबाद जिले के नीब करौरी गाँव में ही वह सर्वप्रथम साधू के रूप में दिखाई दिए थे, इसलिए उन्हें नीब करौरी बाबा कहा गया, हालांकि उनके नाम का अपभ्रंश ‘नीम करोली’ नाम भी प्रसिद्ध हुआ। एक अन्य किंवदंती के अनुसार नैनीताल के निकट अंजनी मंदिर में बहुत पहले कोई सिद्ध पुरुष आये थे, और उन्होंने कहा था कि एक दिन यहाँ अंजनी का पुत्र आएगा, 1944-45 में बाबा के चरण-पद यहाँ पड़े तो लागों ने सिद्ध पुरुष के बचनों को सत्य माना। इस स्थान को तभी से हनुमानगढ़ी कहा गया, बाद में बाबा ने ही यहाँ अपना पहला आश्रम बनाया, इसके बाद निकटवर्ती भूमियाधार सहित वृन्दावन, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, बद्रीनाथ, हनुमानचट्टी आदि स्थानों में कुल 22 आश्रम स्थापित किये। कहते हैं कि बाबा जी 9 सितम्बर 1973 को कैंची से आगरा के लिए लौटे थे, जिसके दो दिन बाद ही समय बाद इसी वर्ष अनन्त चतुर्दशी के दिन 11 सितम्बर को वृन्दावन में उन्होंने महाप्रयाण किया ।

सन्त परंपरा की अनूठी मिसाल है कैंची धाम

यूं कैंची के निकटवर्ती मुक्तेश्वर क्षेत्र का पाण्डवकालीन इतिहास रहा है, बाद के दौर में यह स्थान सप्त ऋषियों तिगड़ी बाबा, नान्तिन बाबा, लाहिड़ी बाबा, पायलट बाबा, हैड़ाखान बाबा, सोमवारी गिरि बाबा व नीब करौरी बाबा आदि की तपस्थली रहा। कहते हैं कि कैंचीधाम में पहले सोमवारी बाबा साधना में लीन रहे। कहते हैं कि सोमबारी बाबा के भक्त नींब करौरी बाबा रानीखेत जाते समय यहां ठहरे थी, इसी दौरान प्रेरणा होने पर उन्होंने यहां रात्रि विश्राम की इच्छा जताई, और 1962 में यहां आश्रम की स्थापना की गई। गत दिनों यह मन्दिर अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दिनों में बराक ओबामा का हनुमान प्रेम उजागर होने के बाद बाबा के भक्तों द्वारा ओबामा की विजय के लिए यहाँ किऐ गऐ अनुष्ठान के कारण भी चर्चा में आया था। 

बाबा ने फिर किया चमत्कार: जूलिया रॉबर्ट्स को हिंदू बना दिया 

Julia Roberts, with Swami Dharmdev at Hari Mandir Ashram in Pataudi on the outskirts of New Delhi, India,where she is shooting her upcoming film "Eat, Pray, Love"जी हाँ, बाबा नीब करौरी महाराज ने फिर कमोबेश एक चमत्कार कर डाला है । गत दिवस हिन्दू धर्म अपनाने के लिए चर्चा में आयी हालीवुड की हॉट अभिनेत्री, हॉलीवुड की सुपर स्‍टार, प्रोड्यूसर और फैशन मॉडल  जूलिया राबर्ट्स ने खुद एक पत्रिका को दिए दिए ताजा इंटरव्‍यू में बताया है कि वह आजकल हिंदू धर्म का पालन कर रही हैं। जूलिया ने इस इंटरव्यू में कहा, ‘नीम करोली बाबा की एक तस्‍वीर देख कर मैं उस शख्‍स के प्रति एकदम मोहित हो गई। मैं कह नहीं सकती कि उनकी कौन सी बात मुझे इतनी अच्‍छी लगी कि मैं उनके सम्‍मोहन में फंस गई।’ 42 साल की जूलिया ने कहा कि हिंदू धर्म में कुछ ऐसा तो है जो मैं इसकी मुरीद हो गई और आजकल इसका पालन भी कर रही हूं। कैथलिक मां और बैप्टिस्‍ट पिता की संतान जूलिया ने दोहराया कि वह पूरे परिवार के साथ मंदिर जाती हैं, मंत्र पढ़ती हैं और प्रार्थना करती हैं। मालूम हो कि बाबा के भक्तो में देश के बड़े राजनयिकों प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, हिमांचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल स्व. राजा भद्री, केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उत्तराखंड सरकार में सचिव मंजुल कुमार जोशी  से लेकर गुरु रामदास के नाम से प्रसिद्ध हुए हारवर्ड विश्व विद्यालय बोस्टन के डा. रिचार्ड एलपर्ट  (‘बी हियर नाउ’ के लेखक) सहित योगी भगवान दास, संगीतकार जय उत्‍तल, कृष्‍णा दास, लामा सूर्य दास, मानवाधिकारवादी डॉ. लैरी ब्रिलिएंट आदि भी नीब करोली बाबा के परम भक्‍तों में शुमार हैं। एप्‍पल कंपनी के सीईओ स्‍टीव जॉब्‍स भी उनके मुरीद हैं। हालांकि एक ऐसा वृत्तांत भी मिलता है जब बाबा ने एक मृत बालक को बहुत प्रार्थना के बाद भी जिलाने से इनकार कर दिया था। बाबा का तर्क था कि ब्रह्मा की बनाई सृष्टि के बनाए नियमों में बदलाव का हक़ किसी को नहीं है।
पढ़िए स्टीव जोब्स की आत्मकथा के ansh: http://www.jankipul.com/2011/11/blog-post_14.html

(रविवार 22 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय सहारा के “सन्डे उमंग” परिशिष्ट में देश के सभी संस्करणों में प्रकाशित आलेख: )

 

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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