न्यू मीडिया (इंटरनेट, सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग आदि) : इतिहास और वर्तमान

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

न्यू मीडिया-New Media डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल। आज का दौर ‘न्यू मीडिया’ का है। वह दौर गया जब समाचारों को जल्दी में लिखा गया इतिहास कहने के साथ ही ‘News Today-History Tomorrow’ कहा जाता था, अब तो ‘News This Moment-History Next Moment’ का दौर है। बिलों को जमा करने, नौकरी-परीक्षा के फॉर्म … Read more

नैनीताल समाचार : नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद मृत्यु

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अक्तूबर 2019। बुधवार रात्रि नगर में नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद तरीके से मृत्यु हो गई। मल्लीताल कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 40 वर्षीय बिजेंद्र पुत्र स्वर्गीय सुंदर लाल अपने घर में सोया था। सोते हुए ही वह अचेत हो गया। इस पर परिजन उसे … Read more

उत्तराखंड की पहाड़ियों में 3 अक्तूबर से होगा भारत-कजाकिस्तान की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास

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American armyनवीन समाचार, नैनीताल, 27 सितंबर 2019। भारत तथा कज़ाकिस्तान की सेनाओं के संयुक्त सेैन्य अभ्यास ‘काज़िंद-2019’ का आयोजन 3 अक्टूबर 2019 से 15 अक्टूबर 2019 के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया जायेगा। दोनों देषों के 100 सैनिकों की टुकड़ी इस संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगी। इस दौरान वे विभिन्न सैन्य ऑपरेशनों एवं आतंकवाद विरोधी जवाबी कार्रवाई के अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेगें। शुक्रवार को प्रेस को जारी विज्ञप्ति के जरिये सेना की प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास काज़िंद-2019 एक वार्षिक कार्यक्रम है जो दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। कज़ाकिस्तान के साथ आयोजित होने वाले इस सैन्य अभ्यास को वैश्विक आतंकवाद के बदलते परिदृष्य में एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास बताया गया है। कंपनी स्तर पर आयोजित होनेवाले इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रांे में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों को अंजाम देना है। सैन्य अभ्यास के दौरान वैश्विक आतंकवाद और हाइब्रिड युद्ध के उभरते रूझानों के विभिन्न पहलुओं को वर्तमान समय के साथ-साथ वैश्विक परिदृष्यों में समकालीन प्रभावों के कारण भी शामिल किया गया है। साथ ही उम्मीद जताई गई है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ाने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ बनाने में मददगार सिद्ध होगा।

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-अमेरिकी जनरल ने जताई भारतीय सेना के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करने की चाह

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, रानीखेत, 29 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास-2018 का शनिवार को एक भव्य समारोह के साथ चौबटिया (उत्तराखंड) में समापन हो गया। इस मौके पर अमेरिकी जनरल ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से चल रहे प्रक्षिक्षण से काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं। यकीनन भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और युद्ध अभ्यास 2018 पूरी तरह से सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिकी सेना भारतीय सेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करना चाहेगी। वहीं सैन्य अभ्यास में शामिल गरुड़ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में एक साथ काम करने की काबिलियत में सक्षमता हासिल की है।
समापन अवसर पर दोनों देशों की सैन्य दलों ने शानदार परेड की, जिसकी सलामी अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलियम ग्राहम, डिप्टी कमांडिंग जनरल 1 कोर तथा भारतीय सेना से गरुड़ डिवीजन कमांडर मेजर जनरल कविन्द्र सिंह ने संयुक रुप से ली। समुद्र तल से तकरीबन सात हजार फीट की ऊँचाई पर घने जंगलों में पिछले दो सप्ताह से दोनों पक्षों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे कि रेड, कॉर्डन और खोज-बचाव आदि के लिए अभ्यास किया गया। आतंकवादियों की निगरानी, ट्रैकिंग और पहचान, लड़ाई के लिए विशेषज्ञ हथियार का उपयोग, आईईडी तटस्थ करने और प्रभावी संचार स्थापित करने के लिए कला उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारतीय व अमेरिकी सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परेड को देखा।
गौरतलब है कि भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स व अमेरिका से 1-23 इन्फैंट्री रेजीमेंट ने फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास तथा कमांड पोस्ट अभ्यास में भारतीय सेना की गरूड डिवीजन तथा अमेरिकी सेना की सातवीं इन्फैंट्री डिवीजन ने भाग लिया, तथा 14 डोगरा व 13 सिख ने भी दिया।

नैनीताल की खूबसूरती देख लड़ना भूल बैठी अमेरिकी सेना !

नैनीताल, 23 सितंबर 2018। चौबटिया-रानीखेत में भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभयास-2008 के लिए आई अमेरिकी सेना प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती के आकर्षण में ऐसी खोई कि युद्ध और युद्धाभ्यास भूल बैठी। दो वर्ष पूर्व भी नैनीताल आये अमेरिकी सेना के कुछ सैनिकों के दिलो-दिमाग पर शायद नैनीताल की खूबसूरती का ऐसा असर था कि वे पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले रानीखेत और डिलीसियस सेब की नगरी चौबटिया छोड़ रविवार का समय निकालकर नैनीता आ गये और यहां इस दौरान हो रही भारी बारिश के बावजूद अमेरिकी सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी जनरल विलियम ग्राहम की अगुवाई में नगर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नगर की शान माल रोड के साथ ही नैनी झील, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर और मल्लीताल स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा सहित अनेक अन्य स्थानों पर यहां की खूबसूरत वादियों का लुप्त उठाया और यहां की संस्कृति की झलक भी देखी, तथा इसकी काफी प्रशंसा की। भ्रमण के दौरान भारतीय सेना की ओर से चौबटिया 99 ब्रिगेड के कर्नल हर्ष मिश्रा व अन्य लोग भी उनके साथ रहे। विदित हो रानीखेत चौबटिया में भारत-अमेरिका का 14वां संयुक्त युद्धाभ्यास पिछली 16 सितंबर से चल रहा है जो 29 सितंबर तक चलेगा। संयुक्त युद्धाभ्यास कार्यक्रम में अमेरिकी सेना के 350 सैनिक व सैन्य अधिकारीयो का दल प्रतिभाग कर रहा है। रविवार को वे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने के लिए नैनीताल पहुंचे थे।

यह भी पढ़ें : मोदी की कूटनीति का असर: भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास इस तरह हुआ शुरू

नवीन समाचार, चौबटिया, रानीखेत 16 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 का शुरूआती समारोह आज उत्तराखंड के चौबटिया में आयोजित किया गया । इस समारोह की शुरूआत राष्ट्रगान – ‘जन गण मन ….’ एवं ‘द स्टार स्पैन्गल्ड बैनर’ के साथ हुई। इस अवसर पर दोनों देशों के झंडे फहराये गये। भारतीय एवं अमेरिकी सैनिक एक दूसरे के साथ खड़े रहे तथा समारोह के दौरान दोनों देशों के दो वरिष्ठ सैन्यधिकारियों को रस्मी सैल्यूट दिये

Indo American Yuddhabhyas1इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की ओर से प्रथम इंफैन्ट्री बटालियन, 23 इंफैन्ट्री रेजिमेन्ट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 7 इंफैन्ट्री डिविजन ने प्रतिनिधित्व किया जबकि भारतीय सेना की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरूड़ डिविजन, सूर्या कमान ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर गरूड़ डिविजन के जनरल ऑफीसर कमांडिंग ने अमेरिकी सैनिकों का स्वागत किया तथा उन्होंने अपने उद्घाटन भाशण में भारत और अमेरिका की इस प्रकार की साझेदारी को प्रजातंत्र, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय को दोनों देशों के लिए मूल्यवान बताया।

इस दो सप्ताह तक चलनेवाले सैन्य युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना तथा भारतीय सेना के सूर्या कमान की ओर से बराबर संख्या में सैन्य टुकड़ियॉं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास के दौरान जवाबी एवं आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों से निपटने की उनकी कार्यकुशलता तथा तकनीकी कौशल देखने को मिलेगा। इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से निगरानी तथा ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक और आईईडी डिटेक्टर्स अथवा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा। दोनों देश संयुक्त रूप से किसी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए एक सुविकसित कुशल ड्लि को अमल में लाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेगें जिसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए आयोजित ऑपरेशनों में प्रयोग किया जा सके। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ पारस्परिक लाभ हेतु विविध विषयों पर एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने के लिए विचार-विमर्श भी करेगें।

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उत्तराखंड में एक वरिष्ठ अधिकारी को जबरन किया सेवानिवृत्त, अपनी तरह का पहला मामला

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 सितंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पहली बार कार्य में लेटलतीफी सहित अन्य कारणों से एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को 50 वर्ष की आयु में जबरन सेवानिवृत्ति दे दी है। हाई कोर्ट की स्थापना के बाद किसी वरिष्ठ न्यायिक अफसर को जबरन रिटायर करने का यह पहला मामला है। हाई कोर्ट … Read more

कमाल: सात दिन में 4400 किमी का सफर तय कर सुदूर रामेश्वरम पहुंचे हल्द्वानी के दो यार…

Bikingनवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 सितंबर 2019। बाइकिंग के शौकीन शहर के दो युवा बाइकर अवनीश राजपाल व योगेश जोशी विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान जागरूकता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कई संदेश लेकर 4400 किमी सड़क नापकर बाइक से रामेश्वरम (तमिलनाडु) पहुंच गए हैं। दोनों इसी माह सात सितंबर को ‘एक भारत, मेरा भारत’ का संकल्प लेकर हल्द्वानी से निकले थे, और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्टड्ढ्र, कर्नाटक, केरल होते हुए तमिलनाडु पहुंच गए हैं। आगे उनका इसी सप्ताह वापस हल्द्वानी लौटने का भी कार्यक्रम है। बताया गया है कि वे पूर्व में हल्द्वानी से कन्याकुमारी की यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा में उन्होंने भारत के छह ज्योतिर्लिंगों-महाकाल उज्जैन व ओमकारेश्वर (मध्य प्रदेश), घृष्णेश्वर, त्रयंबकेश्वर, भीमाशंकर (महाराष्ट्र) एवं रामेश्वरम (तमिलनाडु) के अलावा र्साइं समाधि स्थल शिरडी, शनि शिंगणापुर आदि के भी दर्शन लाभ प्राप्त किये हैं।

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दुनियां में (एक देश में) सर्वाधिक बाइकिंग के लिये गिनीज बुक में दर्ज हुआ नैनीताल के गौरव का नाम

  • दुनिया में किसी एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटर साइकिल चलाने का बनाया विश्व रिकार्ड
  • अमेरिकी रिकार्ड को डेढ़ गुने के अंतर से तोड़ा
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राष्ट्रीय सहारा, 1 मार्च 2018

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, दुनियां में (एक देश में) एक साथ सर्वाधिक दूरी तक मोटर साइकिल चलाने के लिये नैनीताल के ‘बावरे-घुमक्कड़’ गौरव सिद्धार्थ बिष्ट का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कर लिया गया है। गौरव ने 17 सितंबर 2015 से 23 अप्रैल 2017 के भारत में अपनी नारंगी रंग की ‘बावरी’ नाम की हीरो इम्पल्स मोटरसाइकिल 115,093.941 किमी (71,708 मील) चलाकर यह सफलता अर्जित की है। इसके बाद कड़ी जांच के उपरांत उन्हें ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।

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उल्लेखनीय है कि एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज बुक में दर्ज यह रिकार्ड अब तक अमेरिकी महिला बाइकर डेनेल लिन के नाम पर अमेरिका में 48,600 मील यानी 78,214.118 किमी चलने का था, जो उन्होंने 19 सितंबर 2014 से 29 अगस्त 2015 के बीच अमेरिका के सभी 48 राज्यों से गुजरकर बनाया था। इस तरह गौरव ने करीब डेढ़ गुने के अंतर से यह रिकॉर्ड तोड़ा है। गौरव ने इस रिकॉर्ड को भारत के 70वें स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त 2017 के दिन तोड़ा था। इसका प्रमाण पत्र उन्हें अब प्राप्त हो गया है।

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किसानों के मुद्दे पर प्रदेश के मुख्य सचिव को हाईकोर्ट की फटकार..

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के किसानों की आत्महत्या व बदहाली के मामले की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव फटकार लगाते हुए 4 सप्ताह के भीतर कारण बताने संबंधी शपथ पत्र पेश करने के आदेश दिये हैं। शुक्रवार को शांतिपुरी ऊधमसिंह नगर निवासी किसान … Read more

देश के इस वरिष्ठ नेता ने कहीं मोदी, महागठबंधन, कांग्रेस, जीएसटी, सवर्ण आरक्षण, सपा-बसपा, मुलायम, उनकी बहुओं, अखिलेश, शिवपाल व मायावती आदि के बारे में कई बड़ी और चुभने वाली बातें

images 1नवीन समाचार, हरिद्वार, 15 जनवरी 2019। कभी सपा के वरिष्ठ नेता रहे एवं देश की राजनीति को कई बार समय की जरूरत के अनुसार अपनी तरह से मोड़ देने वाले अमर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महागठबंधन, कांग्रेस, जीएसटी, सवर्ण आरक्षण, सपा-बसपा, मुलायम सिंह, उनकी बहुओं, अखिलेश यादव, शिवपाल यादव व मायावती आदि के बारे में कई बड़ी और चुभने वाली बातें कही हैं। अमर सिंह मकर संक्रांति के अवसर पर नरेंद्र मोदी की 2019 में जीत के लिए दुआएं मांगने हरिद्वार आए थे। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने देश की राजनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियों कीं।

मोदी सरकार की ओर से सवर्णों को आरक्षण दिए जाने को लेकर राज्यसभा सदस्य अमर सिंह ने उठ रहे सवालों को लेकर व खासकर संसद में सपा सांसद रामगोपाल यादव की टिप्पणी पर कहा कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में तीन बहुएं सवर्ण परिवारों की हैं। जब उन्हें सवर्णों की बेटियों को अपनी बहू बनाने में परेशानी नहीं है तो फिर सवर्णों को आरक्षण देने पर इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा का गठबंधन मौकापरस्त राजनीति का बड़ा उदाहरण है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने पिता की कुर्बानियों और संघर्ष को तिलांजलि देकर गठबंधन किया है। उन्होंने दावा किया कि इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियां जीतेंगी और बाकी दल हारेंगे।

मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने आए सांसद अमर सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कई मुद्दों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जनता के प्रति पूरी जवाबदेही दिखाते हुए काम किया है। उन्होंने कहा कि यूपी में बसपा और सपा के बीच हुआ गठबंधन दोनों दलों के लिए मजबूरी में लिया गया निर्णय है। उन्होंने अखिलेश यादव को मायावती का नया प्रवक्ता बताते हुए चुटकी ली कि इस गठबंधन के बाद क्या बसपा सुप्रीमो मायावती यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ लखनऊ के गेस्ट हाउस कांड मामले में दर्ज कराए गए मुकदमे को वापस लेंगी। या फिर अखिलेश यादव यह स्वीकार करेंगे कि बसपा की ओर से उनके पिता के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज कराया गया था वह सही था और उन्हें उस मुकदमे में सजा मिलनी चाहिए। अमर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव अपनी सरकार के दौरान ही अपने पिता के खिलाफ चले आ रहे इस मुकदमे का निस्तारण करा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इससे साफ लगता है कि अखिलेश और माया के बीच सत्ता के लिए यह खिचड़ी काफी समय से पक रही थी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन सबको पता है कि जीएसटी भाजपा की नहीं कांग्रेस की देन है। उन्होंने विपक्षी दलों पर भ्रामक प्रचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में मोदी की जीत की कामना के लिए वे हरिद्वार गंगा स्नान और पूजन करने आए हैं। चुनावों के दौरान अपनी भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि मेरी प्रतिबद्धता मोदी के साथ है। राजनीति बहुत कर ली अब राष्ट्रनीति करूंगा।

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p style=”text-align: justify;”>-कांग्रेस पार्टी के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुस्मिता देव ने पत्रकार वार्ता में बेबाकी से रखी राय, कहा – अभी देश में ‘मोदी वर्सेज मोदी’ ही है माहौल, माना हिमांचल में कांग्रेस के विरुद्ध है एंटी इंकमबेंसी का माहौल
-साथ ही कहा गुजरात व हिमांचल के चुनाव परिणाम चाहे जो हों, 2019 के परिणाम इससे अलग होंगे, 2019 में मोदी के वादों पर जवाब देगी जनता
नैनीताल। कांग्रेस पार्टी के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुस्मिता देव ने शुक्रवार 10 नवम्बर 2017 को नैनीताल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बेहद बेबाकी से अपनी राय रखी। कहा कि अभी भी देश में ‘मोदी वर्सेज मोदी’ का माहौल है, यानी एक तरीके से कांग्रेस अभी मुकाबले में नहीं है, और मोदी के वादों-घोषणाओं पर ही चुनाव लड़ा जा रहा है। साथ ही माना कि हिमांचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ‘एंटी इंकमबेंसी’ यानी सत्ता विरोधी माहौल है। अलबत्ता कहा कि हिमांचल में सीएम बीरभद्र सिंह सबसे बड़े नेता हैं, और जनता को उन पर विश्वास है। साथ ही कहा कि गुजरात व हिमांचल प्रदेश के विस चुनाव के परिणाम चाहे कांग्रेस या भाजपा जिसके पक्ष में भी आएं, 2019 के आगामी लोस चुनावों के परिणाम इससे अलग होंगे। 2019 में मोदी के वादों पर जनता जवाब देगी।

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आठ वर्षों में सर्वोच्च स्तर पर पहुंची नैनी झील !

नैनीताल, 23 सितंबर 2018। मानसूनी वर्षा का दौर एक बार रुकने के बाद फिर से शुरू चक्रवात के कारण हुई बारिश से एक बार फिर नैनी झील का जल स्तर गिरने के बाद चढ़ गया है और पिछले आठ वर्षों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। रविवार सुबह तक झील का जल स्तर 11 … Read more

नैनीताल के ‘इनसाइक्लोपीडिया’ गंगा प्रसाद साह पंचतत्व में विलीन

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-85 वर्ष की उम्र में शनिवार सुबह तड़के ली थी आखिरी सांस
-नगर पालिका, डीएसए, श्रीराम सेवक सभा, हिल साइड सेफ्टी कमेटी, जिला महिला हॉकी संघ सहित अनेक संस्थाओं-संगठनों से रहा जुड़ाव
नैनीताल। सरोवरनगरी के कला, संस्कृति, खेल प्रेमी एवं जीवंत ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहे जाने वाले रंगकर्मी एवं राज्य आंदोलनकारी गंगा प्रसाद साह रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। रविवार सुबह पाइंस स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया। उनके एकमात्र पुत्र अतुल साह व पौत्र शिवम साह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर एसडीएम अभिषेक रुहेला, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष संजय कुमार संजू व मुकेश जोशी, इतिहासकार डा. शेखर पाठक, भूगोलविद् डा. जीएल साह, कुमाऊं विवि के उपकुलसचिव बहादुर सिंह बिष्ट, पूर्व सभासद जगदीश बवाड़ी, आनंद बिष्ट व मनोज अधिकारी तथा तिब्बती शरणार्थी फाउंडेशन के अध्यक्ष पेमा गेकिल शिथर सहित तहसीलदार एवं नगर के विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं व विभागों से जुड़े लोग मौजूद रहे। इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बीके बिष्ट भी उनके घर पर अंतिम दर्शनों को पहुंचे।

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गूगल ने चिपको आन्दोलन पर डूडल बनाकर बढाया उत्तराखंड का मान

चिपको से रहा है उत्तराखण्ड की महिलाओं के आन्दोलन का इतिहास

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गौरा देवी

महिलाएं उत्तराखंड की दैनिक काम-काज से लेकर हर क्षेत्र में धूरी हैं। कदाचित वह पुरुषों के नौकरी हेतु पलायन के बाद पूरे पहाड़ का बोझ अपने ऊपर ढोती हैं। विश्व विख्यात चि‍पको आंदोलन और शराब विरोधी आंदोलनों से उनका आन्दोलनों का इतिहास रहा है। वनों को बचाने हेतु रैणी गांव की एक साधारण परंतु असाधारण साहस वाली महिला ‘गौरा देवी ने 21 मार्च 1974 को अपने गांव के पुरुषों की अनपुस्थिति में जिस सूझबूझ व साहस का परि‍चय दिया, वह चिपको आंदोलन के रूप में इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने के साथ ही अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। जब उन्होंने व विभाग के कर्मचारि‍यों ने पेड़ों को काटने का वि‍रोध किया और न मानने पर वो तकरीबन 30 अन्य महिलाओं के साथ पेड़ों पर चि‍पक गई जिससे पेड़ काटने वालों को उल्टे पैर वापस जाना पड़ा। इस घटना के बाद 1975 में गोपेश्‍वर व 1978 में बद्रीनाथ समेत अनेक क्षेत्रों में महिलाओं ने वि‍रोध कर जंगलों को काटने से बचाया।

बकौल गिर्दा, यह रहा चिपको-वनान्दोलन का प्रभाव

‘हम भोले-भाले पहाड़ियों को हमेशा ही सबने छला है। पहले दूसरे छलते थे, और अब अपने छल रहे हैं। हमने देश-दुनिया के अनूठे ‘चिपको आन्दोलन’ वाला वनान्दोलन लड़ा, इसमें हमें कहने को जीत मिली, लेकिन सच्चाई कुछ और थी।’ गिर्दा को वनान्दोलन के परिणामस्वरूप पूरे देश के लिए बने वन अधिनियम से जनता के हक-हकूकों पर और अधिक पाबंदियां आयद कर दिए जाने की गहरी टीस थी। 1972 से शुरू हुऐ पहाड़ के एक छोटे से भूभाग का वन आंदोलन, चिपको जैसे विश्व प्रसिद्ध आंदोलन के साथ ही पूरे देश के लिए वन अधिनियम 1980 का प्रणेता भी रहा। लेकिन यह सफलता भी आंदोलनकारियों की विफलता बन गई। दरअसल शासन सत्ता ने आंदोलनकारियों के कंधे का इस्तेमाल कर अपने हक-हुकूक के लिए आंदोलन में साथ दे रहे पहाड़वासियों से उल्टे उनके हक-हुकूक और बुरी तरह छीन लिऐ थे, और आंदोलनकारियों को अपने ही लोगों के बीच गुनाहगार की तरह खड़ा कर दिया था। आंदोलन में अगली पंक्ति में रहे गिर्दा को आखिरी दिनों में यह टीस बहुत कष्ट पहुंचाती थी। उनके अनुसार ‘1972 में वनांदोलन शुरू होने के पीछे लोगों की मंशा अपने हक-हुकूकों को बेहतरी से प्राप्त करने की थी। यह वनों से जीवन-यापन के लिए अधिकार लेने की लड़ाई थी। सरकार स्टार पेपर मिल सहारनपुर को कौड़ियों के भाव यहां की वन संपदा लुटा रही थी। इसके खिलाफ आंदोलन हुआ, लेकिन जो वन अधिनियम मिला, उसने स्थितियों को और अधिक बदतर कर दिया। इससे जनभावनाऐं साकार नहीं हुईं। वरन, जनता की स्थिति बद से बदतर हो गई। तत्कालीन पतरौलशाही के खिलाफ जो आक्रोष था, वह आज भी है। औपनिवेषिक व्यवस्था ने ‘जन’ के जंगल के साथ ‘जल’ भी हड़प लिया। वन अधिनियम से वनों का कटना नहीं रुका, उल्टे वन विभाग का उपक्रम-वन निगम और बिल्डर वनों को वेदर्दी से काटने लगे। साथ ही ग्रामीण भी परिस्थितियों के वशीभूत ऐसा करने को मजबूर हो गऐ। अधिनियम का पालन करते हुए वह अपनी भूमि के निजी पेड़ों तक को नहीं काट सकते है। उन्हें हक-हुकूक के नाम पर गिनी चुनी लकड़ी लेने के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ता है। इससे उनका अपने वनों से आत्मीयता का रिस्ता खत्म हो गया है। वन जैसे उनके दुश्मन हो गऐ, जिनसे उन्हें पूर्व की तरह अपनी व्यक्तिगत जरूरतों की चीजें तो मिलती नहीं, उल्टे वन्यजीव उनकी फसलों और उन्हें नुकसान पहुंचा जाते हैं। इसलिऐ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रामीण महिलाऐं वनाधिकारियों की नजरों से बचने के फेर में बड़े पेड़ों की टहनियों को काटने की बजाय छोटे पेड़ों को जल्द काट गट्ठर बना उनके निसान तक छुपा देती हैं। इससे वनों की नई पौध पैदा ही नहीं हो रही। पेड़-पौधों का चक्र समाप्त हो गया है। अब लोग गांव में अपना नया घर बनाना तो दूर उनकी मरम्मत तक नहीं कर सकते। लोगों का न अपने निकट के पत्थरों, न लकड़ी की ‘दुंदार’, न ‘बांस’ और न छत के लिऐ चौड़े ‘पाथरों’ पर ही हक रह गया है। पास के श्रोत का पानी भी ग्रामीण गांव में अपनी मर्जी से नहीं ला सकते। अधिनियम ने गांवों के सामूहिक गौचरों, पनघटों आदि से भी ग्रामीणों का हक समाप्त करने का शडयंत्र कर दिया। उनके चीड़ के बगेटों से जलने वाले आफर, हल, जुऐ, नहड़, दनेले बनाने की ग्रामीण काष्ठशालायें, पहाड़ के तांबे के जैसे परंपरागत कारोबार बंद हो गऐ। लोग वनों से झाड़ू, रस्सी को ‘बाबीला’ घास तक अनुमति बिना नहीं ला सकते। यहां तक कि पहाड़ की चिकित्सा व्यवस्था का मजबूत आधार रहे वैद्यों के औषधालय भी जड़ी बूटियों के दोहन पर लगी रोक के कारण बंद हो गऐ। दूसरी ओर वन, पानी, खनिज के रूप में धरती का सोना बाहर के लोग ले जा रहे हैं, और गांव के असली मालिक देखते ही रह जा रहे हैं। गिर्दा वन अधिनियम के नाम पर पहाड़ के विकास को बाधित करने से भी अत्यधिक चिंतित थे। उनका मानना था कि विकास की राह में अधिनियम के नाम पर जो अवरोध खड़े किऐ जाते हैं उनमें वास्तविक अड़चन की बजाय छल व प्रपंच अधिक होता है। जिस सड़क के निर्माण से राजनीतिक हित न सध रहे हों, वहां अधिनियम का अड़ंगा लगा दिया जाता है।

पर्यावरण-रक्षा के लिए “चिपको आंदोलन”

(26 मार्च 2018) 45 वर्ष पूर्व 1973 में (तत्‍कालीन उत्‍तर प्रदेश) वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय अंचल के गढ़वाल मंडल में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी.चिपको आन्दोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन रहा..दरअसल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जंगल की जमीन को खेल का सामान बनाने वाली एक कंपनी को देने का फैसला कर लिया था.. ग्रामीणों ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए इस आंदोलन की रूपरेखा तय की..वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार भी जता रहे थे..पेड़ों के कटान के इस फैसले का विरोध करने के लिए ग्रामीण विशेष रूप से महिलाएं पेड़ों के चारों तरफ घेरा बनाकर उससे चिपक जाती थीं.. इससे पेड़ों को काटना मुश्किल हो गया..
स्‍थानीय महिलाओं की अगुआई में शुरू हुए इस आंदोलन का प्रसार चंडी प्रसाद भट्ट और उनके एनजीओ “दशौली ग्राम स्वराज्य संघ” ने भी किया..व इस महान कार्य में विद्वान गांधीवादी विचारक सुंदरलाल बहुगुणा ने इस आंदोलन को दिशा दी और उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश देने की अपील की.. उसका नतीजा यह हुआ कि केंद्र की कांग्रेसनीत इंदिरा गांधी सरकार ने 15 वर्षों के लिए पेड़ों की कटाई को बैन कर दिया.. धूम सिंह नेगी, बचनी देवी, गौरा देवी और सुदेशा देवी इस आंदोलन से जुड़ी प्रमुख हस्तियां थीं..केवल उपरोक्त वर्णित नाम ही नही वरन गाँव के गाँव इस आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने लगे..इस शांत विरोध आंदोलन की सफलता के बाद यह आंदोलन देश के अन्‍य हिस्‍सों में भी फैलने लगा..
‘चिपको आन्दोलन’ का उदघोष रहा…
“क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।”
 सन १९८७ में इस आन्दोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार (Right Livelihood Award) से भी सम्मानित किया गया..
कुलमिलाकर पर्यावरण की रक्षा के लिए जब रैणि गाँव उत्तराखंड की पाँचवी कक्षा तक पढ़ी गौरा देवी की भूमिका इतिहास में दर्ज हो सकती है तो पढ़ा लिखा समाज कब जागेगा..क्योंकि आज की स्थितियाँ 1973 में शुरू हुए चिपको आंदोलन से भी कठिन हो गई हैं..लोग जननायक तो चाहते हैं पर करना कुछ नही चाहते..इसलिए वनों के विलुप्त होने में पढ़े-लिखे समाज को ही ज्यादा जिम्मेदार कहा जायेगा..पेड़ों की उपलब्धता में विश्व में 180 देशों में हुए सर्वे में भारत 177 वें स्थान पर आसीन है..सरकारों को भी वनों ,वनाश्रितों के हितों को सुरक्षित करने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए..अन्यथा महंगाई,भ्रष्टाचार के मुद्दे भी गौण हो जाएंगे क्योंकि जनजीवन के लिए अतिआवश्यक तत्व ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाएगी…
-संजय नागपाल नैनीताल

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  • ‘विक्टोरिया पदक’ व ‘कम्पेनियन इंडियन एम्पायर अवार्ड-सीआईएम’ जैसे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित प्रथम भारतीय थे नैन सिंह 
  • गूगल ने उन्हें बताया है, ‘उनके द्वारा नापे गए पर्वतों (हिमालय) की तरह अडिग विश्वास वाला व्यक्ति’
  • अनपढ़ होते हुए भी स्कूल खोलने व शिक्षक के रूप में कार्य करने पर मिली थी ‘पंडित’ की पदवी
  • अपने बराबर कदमों से चलकर और कंठी माला पर कदमों को गिनकर नापे थे हिमालय पर स्थित ‘एशिया की पीठ’ और बनाए थे मानचित्र

नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया का सबसे बड़ा खोज इंजन यूं हर खास मौके पर एक नया डूडल बनाने के लिए भी विख्यात है। किंतु आज 21 अक्टूबर को उसने जो डूडल बनाया है उसे देश के साथ खासकर उत्तराखंड वासियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है, और वे दीपावली-भैया दूज पपर गूगल से मिले इस खास तोहफे को शायद कभी न भुला पाएं। यह तोहफा है गूगल द्वारा आज के दिन के लिये बनाया गया डूडल, जिसमें हाथ में कंठी माला पकड़े एक व्यक्ति को हिमालय के खूबसूरत पहाड़ों व नदी को सलाम करते हुए दिखाया गया है। गूगल पर अपना मनपसंद विषय खोजने वाली पूरी दुनिया आज इस शख्श के बारे में जानने को उत्सुक है। गूगल ने उन्हें ‘उनके द्वारा नापे गए पर्वतों (हिमालय) की तरह अडिग विश्वास वाला व्यक्ति’ बताया है। उत्तराखंड के लिये गर्व करने वाली बात यह है कि यह शख्श महान अन्वेषक, सर्वेक्षक और मानचित्रकार, हिमालय पुत्र पंडित नैन सिंह रावत हैं, और देश के गिने-चुने व्यक्तियों में शुमार और उत्तराखंड के ऐसे पहले व्यक्ति हो गए हैं, जिनके 187वें जन्मदिन पर गूगल ने आज उन पर खास डूडल बनाया है।

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