नवीन समाचार, हरिद्वार, 1 जून 2026 (12000 Children Vanished from Madrasas)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार (Haridwar) जनपद में मदरसों की जांच के दौरान छात्र संख्या में आई भारी गिरावट ने प्रशासन और शिक्षा विभाग को सतर्क कर दिया है। हालात यह हैं कि कुछ ही समय में मदरसों में पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब 12 हजार कम हो गई है। मार्च माह तक जहां जिले के मदरसों में लगभग 31 हजार छात्र दर्ज थे, वहीं अप्रैल में यह संख्या घटकर करीब 19 हजार रह गई। इस अप्रत्याशित कमी के बाद प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर गठित टीमों द्वारा जिले में संचालित मदरसों की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि छात्र संख्या में आई कमी के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए प्रत्येक स्तर पर जांच की जाएगी।
अवैध और अनियमित मदरसों की जांच के बाद सामने आया मामला
हाल ही में जिला प्रशासन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने जिले में संचालित मदरसों का सत्यापन अभियान चलाया था। जांच के दौरान 131 मदरसों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 23 मदरसों में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं पाए जाने पर उनके मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) और अन्य सरकारी मदों से मिलने वाले वित्तीय लाभों पर रोक लगा दी गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 10 मदरसा संचालकों ने स्वयं अपने संस्थान बंद करने के लिए आवेदन दे दिया। बताया गया कि इन मदरसों में छात्र संख्या बेहद कम थी, जबकि विभिन्न योजनाओं का लाभ अपेक्षाकृत अधिक लिया जा रहा था।
मिड-डे मील की निगरानी के बाद बढ़ा संदेह
सूत्रों के अनुसार अप्रैल माह में जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) अमित कुमार चंद ने मदरसों की निगरानी के लिए एक डिजिटल व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत संबंधित मदरसों को प्रतिदिन मिड-डे मील तैयार होने और बच्चों के भोजन करने के फोटो एवं वीडियो साझा करने के निर्देश दिए गए थे।
बताया गया कि 11 मदरसों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बाद में उन्होंने स्वयं मिड-डे मील योजना से बाहर होने का आवेदन दे दिया। इन मदरसों में पूर्व में लगभग चार हजार छात्रों के अध्ययनरत होने का दावा किया गया था।
जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही कुल छात्र संख्या में करीब 12 हजार की कमी दर्ज की गई, जिससे फर्जी पंजीकरण की आशंकाओं को बल मिला है।
क्या फर्जी छात्र संख्या दिखाकर लिया जा रहा था लाभ?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि कहीं सरकारी योजनाओं, विशेषकर मिड-डे मील और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए छात्र संख्या वास्तविक से अधिक तो नहीं दर्शाई गई थी।
हालांकि अभी तक किसी स्तर पर अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से कहा जा सकेगा कि छात्र संख्या में कमी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
डीएम ने गठित की चार सदस्यीय जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने एसडीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भी शामिल किया गया है।
समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह छात्र संख्या, संस्थानों की वास्तविक स्थिति, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और वित्तीय अभिलेखों का विस्तृत सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
प्रशासन ने नियमित निगरानी के दिए निर्देश
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मदरसों की स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जाए और प्रत्येक दिन की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच शिक्षा विभाग भी यह पता लगाने में जुटा है कि छात्र संख्या में दर्ज 12 हजार की कमी वास्तविक है या पूर्व में दर्ज आंकड़ों में कोई त्रुटि अथवा गड़बड़ी थी।
शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल
यह मामला केवल मदरसों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि शिक्षा संस्थानों में नामांकन, उपस्थिति और सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच से जो भी तथ्य सामने आएंगे, वे भविष्य में शिक्षा संस्थानों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।























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