नवीन समाचार, देहरादून, 7 नवंबर 2026 (Minister Rekha Arya Husband Arrested)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या (Rekha Arya) के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी (Girdhari Lal Sahu alias Pappu Girdhari) को पुलिस ने लगभग 25 दिनों की तलाश के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झांसी (Jhansi) से गिरफ्तार कर लिया है। इसी मामले में उनके भतीजे सतेंद्र राठौर (Satendra Rathore) को भी बरेली (Bareilly) से गिरफ्तार किया गया है। देखें संबंधित वीडियो :
पुलिस के अनुसार, दोनों पर मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर चार कंपनियों के निदेशक पद से उन्हें हटाने और उनकी जगह सतेंद्र राठौर को निदेशक बनाने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। दोनों को देहरादून लाकर विशेष जांच दल (SIT) पूछताछ कर रहा है।
गिरफ्तारी के बाद गिरधारी लाल साहू ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा, “अगर मेरे जेल जाने से मेरी बीवी को खुशी मिलती है तो मुझे कोई शिकायत नहीं, मैं तैयार हूं।” देहरादून लाए जाने के दौरान वह लंगड़ाते हुए दिखाई दिए। बताया गया है कि पुलिस ने दोनों को 6 नवंबर को गिरफ्तार किया था और शनिवार को देहरादून में उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक की।
चार कंपनियों में फर्जी दस्तावेजों से निदेशक बदलने का आरोप
पुलिस के अनुसार, विशेष जांच दल (Special Investigation Team-SIT) की जांच में सामने आया कि गिरधारी लाल साहू ने अपने भतीजे सतेंद्र राठौर के साथ मिलकर रेखा आर्या के कथित फर्जी हस्ताक्षर किए और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर चार कंपनियों में रेखा आर्या को निदेशक पद से हटाकर सतेंद्र राठौर को निदेशक बनाया गया। पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया अनुचित लाभ लेने की मंशा से की गई थी। जांच में सतेंद्र की भूमिका सामने आने के बाद उसका नाम भी मुकदमे में शामिल किया गया।
ये चार कंपनियां हैं:
- देवों के देव महादेव (Devo Ke Dev Mahadev)
- बनखंडो रुद्राक्ष धाम (Bankhandi Rudraksh Dham)
- श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड (Shree Ambe Auto Dealers Private Limited)
- श्री बनखंडो धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (Shree Bankhandi Dham Developers Private Limited)
इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से मिली आरोपितों की लोकेशन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल (Pramendra Singh Dobhal) के निर्देश पर दोनों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग पुलिस टीमें बनाई गई थीं। ये टीमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और अन्य माध्यमों से उनकी लोकेशन तथा गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
पुलिस के अनुसार, 6 नवंबर को मुखबिर की सूचना पर गिरधारी लाल साहू को झांसी से गिरफ्तार किया गया, जबकि सतेंद्र राठौर को बरेली के जोगी नवादा (Jogi Nawada) से पकड़ा गया। गिरधारी लाल साहू की उम्र 61 वर्ष और सतेंद्र राठौर की उम्र 40 वर्ष बताई गई है। गिरधारी लाल साहू रामस्वरूप के पुत्र और बरेली में बनखंडीनाथ मंदिर (Bankhandinath Temple) के निवासी हैं, जबकि सतेंद्र राठौर हरिप्रसाद के पुत्र और बरेली के है।
एसआईटी ने जांच के दौरान मामले से संबंधित ऑडियो क्लिप भी अपने कब्जे में ली हैं और विभिन्न गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस का कहना है कि गवाहों के बयानों और प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर गिरधारी लाल की भूमिका सामने आई। जांच में रेखा आर्या के साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इसी आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Prevention of Atrocities Act) की धाराएं भी मुकदमे में शामिल की गई हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरधारी लाल साहू के विरुद्ध उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अलग-अलग थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर अधिनियम सहित अन्य मामलों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी भी मिली है।
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15 अक्टूबर को कैंट कोतवाली में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून की कैंट कोतवाली (Cantonment Police Station) में अपने पति गिरधारी लाल साहू के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल, धमकी देने तथा जान से मारने की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए थे। शिकायत में एक कथित घटना का समय वर्ष 2004 बताया गया था।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि उनके पति ने पहली शादी की जानकारी छिपाकर उनसे विवाह किया था। बाद में उन्हें इस बारे में पता चला। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके हस्ताक्षर और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाने की कोशिश की गई।
शिकायत के बाद रेखा आर्या ने सोशल मीडिया (Social Media) पर दो कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा की थीं। इनमें गिरधारी लाल साहू और कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी (Kalpana Mishra alias Kalpana Chaturvedi) के बीच बातचीत होने का दावा किया गया था। कथित बातचीत में मंत्री को गोली मारने, पैसे लगाने, कानूनी मदद, जेल और जमानत, 25 लाख रुपये, आगरा में फ्लैट खरीदने और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों का उल्लेख सामने आया था। एक कथित बातचीत में रेखा आर्या के हमेशा मंत्री न रहने और कुछ महीनों की बात होने का भी जिक्र था। इन ऑडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
गिरधारी लाल साहू ने इन ऑडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) से तैयार किया गया फर्जी ऑडियो बताते हुए आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने रेखा आर्या पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाकर जांच की मांग भी की थी। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद जारी हुआ था गैर-जमानती वारंट
गिरधारी लाल साहू ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत के लिए अदालत में याचिका दाखिल की थी। देहरादून की पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम की विशेष न्यायाधीश अंजलि बेंजवाल (Anjali Benjwal) की अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने माना था कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध बनाते दिखाई देते हैं। ऐसे में अधिनियम की धाराओं 18 और 18ए के तहत अग्रिम जमानत पर प्रतिबंध लागू होता है। गिरधारी लाल स्वयं अदालत में पेश नहीं हुए थे और उनके पैरोकार के माध्यम से याचिका दाखिल की गई थी। याचिका खारिज होने के बाद उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
इससे पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने भी प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी से संरक्षण देने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। न्यायालय ने प्रथमदृष्टया गंभीर संज्ञेय अपराधों के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा था कि मामले को केवल वैवाहिक विवाद मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। कथित फर्जी दस्तावेजों और ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की जांच आवश्यक बताई गई थी।
कल्पना मिश्रा से जुड़ा पुराना विवाद भी जांच के दायरे में
इस पूरे विवाद में कल्पना मिश्रा का नाम भी सामने आया था। रेखा आर्या ने सितंबर 2024 में बरेली में कल्पना मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत दी थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कल्पना ने उनके दस्तावेजों और घर के पते का दुरुपयोग किया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के चिह्नों वाली गाड़ी के इस्तेमाल तथा घर से सात लाख रुपये और सोने की रुद्राक्ष माला चोरी होने के आरोप भी लगाए थे।
इस मामले में पहले अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने और बाद में दोबारा जांच की प्रक्रिया चलने की जानकारी सामने आई थी। कल्पना को गिरफ्तार किए जाने और बाद में जमानत मिलने का भी उल्लेख किया गया था।
रेखा आर्या ने घरेलू हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने की कही थी बात
विवाद के बीच रेखा आर्या की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के कृष्णा मेडिकल सेंटर, डालनवाला (Krishna Medical Centre, Dalanwala) में भर्ती कराया गया था। चिकित्सक डॉ. सिद्धांत खन्ना (Dr. Siddhant Khanna) के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने के समय उनका रक्तचाप बढ़ा हुआ था। बाद में रक्तचाप सामान्य होने पर उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी।
अस्पताल में रहते हुए रेखा आर्या ने पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि वह तीन बार विधायक और दो बार मंत्री रह चुकी हैं और निजी मामले को सार्वजनिक करने का निर्णय इसलिए लिया, ताकि दूसरी महिलाएं भी घरेलू हिंसा के विरुद्ध आवाज उठा सकें। उन्होंने कहा था कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप में भी हो सकती है।
पति की पहली शादी की जानकारी के संबंध में उन्होंने कहा था कि विवाह से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी और शादी तथा बच्चे होने के बाद इसका पता चला। उनके अनुसार, परिवार टूटने से बचाने के लिए उन्होंने कई बार बातचीत और समझौते की कोशिश की, लेकिन हालात नहीं सुधरे।
गिरधारी लाल साहू की ओर से लगाए गए 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति के आरोप पर रेखा आर्या ने कहा था कि उनकी राजनीतिक यात्रा वर्ष 2003 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में शुरू हुई थी और उन्होंने 2003, 2012, 2014 तथा 2022 के चुनावी हलफनामों में अपनी संपत्ति का विवरण दिया है। उन्होंने कहा था कि यदि 2027 में चुनाव लड़ने का अवसर मिला तो फिर संपत्ति का विवरण देंगी और वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।
इस विवाद के बीच बरेली के बड़े बाईपास स्थित लालपुर (Lalpur) में करीब पांच एकड़ में फैली एक आलीशान कोठी भी चर्चा में आई थी। इसमें ऊंचे गुंबद, भव्य बालकनी, सफेद खंभे, लाल पत्थरों और संगमरमर से बना मंदिर परिसर तथा बड़ा स्विमिंग पूल है। हालांकि, पिछले करीब छह महीने से इसका निर्माण कार्य बंद बताया गया था। कोठी के स्वामित्व, निर्माण पर हुए खर्च और कथित अवैध संपत्ति के आरोपों के बीच संबंध को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अब गिरधारी लाल साहू और सतेंद्र राठौर की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की पूछताछ और जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस का कहना है कि गवाहों के बयान, ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की पड़ताल के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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