प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, 9 अक्टूबर 2021। हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि (Dunagiri) शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। आइए आज हम आपको इस शक्तिपीठ के दर्शनों को लिए चलते हैं। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी और द्वाराहाट से 14 किमी की दूरी पर मंगलीखान नाम के स्थान पहुंचा जाता है। यहां एक शिवालय और हनुमान मंदिर है। यहां से आगे करीब 400 पैदल सीढ़ियां मंदिर तक पहुंचाती हैं। पास ही दुधौली में कुमाऊं मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह भी है। दूनागिरि मंदिर का प्राचीन प्रवेश द्वार भी बेहद सुंदर है। देखें वीडियो :

दूनागिरि शक्तिपीठ में जम्मू के प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ की तरह ही वैष्णवी माता के दो स्वयंभू सिद्ध पिंडि विग्रह मौजूद हैं। इन्हें माता शैलपुत्री एवं ब्रह्मचारिणी का स्वरूप माना जाता है। कहते हैं कि वैष्णो देवी और दूनागिरि में अन्य शक्तिपीठों की तरह माता के कोई अंग नहीं गिरे थे, वरन माता यहां स्वयं उत्पन्न हुई थीं। इसलिए दूनागिरि को माता वैष्णवी का गोपनीय शक्तिपीठ भी माना जाता है, और इसी कारण 51 शक्तिपीठों में इसकी गणना नहीं की जाती है, वरन इस शक्तिपीठ की गणना शक्ति के प्रधान उग्र पीठों में भी होती है।

कहते हैं कि पद्म नाम के कल्प में असुरों से पराजित इंद्र आदि देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु के शरीर से दिव्य तेजपुंज के रूप में ‘वैष्णवी शक्ति’ का जन्म हुआ था। यह भी कहा जाता है कि दूनागिरि शक्तिपीठ में वैष्णो देवी की तरह ही देवी ने उमा हैमवती का रूप धारण कर इंद्र आदि देवताओं को ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया था। विराट हिमालय की गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाओं के दृश्यों के साथ इस स्थान पर प्रकृति की छटा मन को मोहित कर आत्मविभोर करने के साथ ही भक्ति भाव व आध्यात्मिकता की अलौकिक अनुभूति जगाती है।

आप यह भी पढ़ना चाहेंगे :  पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती पर नैनीताल में भव्य कार्यक्रम, एक तस्वीर चर्चा में, पंत पार्क नवनिर्माण के बाद भव्य स्वरूप में आया, हिमालय संग्रहालय में दुर्लभ पत्रों और छायाचित्रों की प्रदर्शनी और तदर्थ शिक्षकों का ज्ञापन

Dunagiri, Dronagiri Temple। माता का वैष्णवी शक्तिपीठ। द्रोणागिरी धाम। Almora।  Uttarakhand। Dev Darshanदूसरी कथा के अनुसार कहा जाता है कि त्रेता युग में राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण को शक्ति लगने पर जब हनुमान जी आकाश मार्ग से संजीवनी बूटी लेकर लंका के लिए जा रहे थे, तब यहीं पास में स्थित भरतकोट के अपभ्रंश भटकोट में तपस्या कर रहे भरत ने उन्हें अपना घुटना जमीन पर टेक कर तीर मारा था, जिस कारण उनके हाथ से संजीवनी बूटी युक्त पर्वत का एक हिस्सा यहां गिर गया था। इसलिए जैव विविधता से परिपूर्ण इस बेहद पवित्र स्थान पर मृत व्यक्तियों को जीवित करने की क्षमता युक्त संजीवनी जैसी दिव्य जड़ी-बूटियों की उपस्थिति भी बताई जाती है। भरत का घुटना टेकने का स्थान भी निकट के पहाड़ पर स्पष्ट दिखाई देता है।

इसके अलावा द्वापर युग में पांडव इसी क्षेत्र में स्थित पांडुखोली नामक स्थान पर अज्ञातवास के दौरान रहे थे। कहते हैं कि उनके गुरु द्रोणाचार्य के तपस्या करने की वजह से ही यहां का नाम मूलतः द्रोणगिरि और अपभ्रंश दूनागिरि पड़ा था। इसी क्षेत्र में गर्ग मुनि का आश्रम भी था, जिनकी तपस्या के प्रभाव से गगास नदी का उद्गम हुआ। यह स्थान शुकदेव एवं जमदग्नि जैसी ऋषियों की तपोभूमि भी रही।

वहीं स्कंद पुराण के ‘मानस खंड’ के द्रोणाद्रिमाहात्म्य के अनुसार यह देवी शिव की शक्ति है जिसे ‘महामाया हरिप्रिया’ और सिंह वाहिनी दुर्गा और ‘वह्निमती’ के रूप में भी जाना जाता है। कत्यूरी राजाओं ने दूनागिरि देवी के अव्यक्त विग्रहों को रूपाकृति प्रदान की, तथा मंदिर में गणेश, शिव एवं पार्वती के कलात्मक भित्ति चित्रों को स्थापित किया।

वैष्णवी शक्तिपीठ होने के कारण ही यहां किसी प्रकार की पशु बलि नहीं चढ़ाई जाती, यहां तक कि नारियल भी मंदिर परिसर में नहीं तोड़ा जाता है। मंदिर में अखंड ज्योति लगातार जलती रहती है।

आप यह भी पढ़ना चाहेंगे :  उच्च न्यायालय परिसर में कल राष्ट्रीय लोक अदालत, हाई कोर्ट में 230 से अधिक गुड़ और कोल्हू इकाइयों के मामले, प्रधानाचार्य के निलंबन, सहायक अध्यापक का रिक्त पद पुनर्जीवित करने व शिक्षकों के स्थानांतरण में दिव्यांगता और पहाड़-मैदान के आधार मामलों में सुनवाई-निर्देश

यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। आश्विन मास के नवरात्रों में दुर्गाष्टमी को यहां श्रद्धालुओं का बहुत बड़ा मेला लगता है। क्षेत्र के सभी नवविवाहित युगल यहां नियमपूर्वक आकर अपने सुखी दांपत्य जीवन के लिए तथा अन्य लोग माता की कृपा-आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं। निःसंतान दंपति पूरी रात्रि हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर खड़े होकर तपस्या कर संतान प्राप्त करते हैं, और मनौती पूरी होने पर अपने नवजात शिशु को लेकर माता के दर्शन को आते हैं।

सड़क, हैलीपैड व बस सेवा की मांग

इधर क्षेत्रवासी दूनागिरी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग हेतु मंगलीखान में द्वाराहाट-कुकुछीना मोटर मार्ग से लगी हुई वन विभाग की खाली पडी पर लगभग 100 गाडियों की पार्किंग व एक हैलीपैड बनवाने की मांग कर रहे हैं। इस बारे में उन्होंने केंद्रीय रक्षा व पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट को अपने गृह क्षेत्र आने पर ज्ञापन देकर मांग की है। इसके अलावा हल्द्वानी से पूर्व में दूनागिरि तक चलने वाली रोडवेज की बस सेवा को भी फिर से शुरू करने की मांग भी क्षेत्रवासियों द्वारा की जा रही है।

पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

नैनीताल में क्लिक करके नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य सभी महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ी जा सकती हैं। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचार, अल्मोड़ा के समाचार, बागेश्वर के समाचार, चंपावत के समाचार, ऊधमसिंह नगर  के समाचार, देहरादून के समाचार, उत्तरकाशी के समाचार, पौड़ी के समाचार, टिहरी जनपद के समाचार, चमोली के समाचार, रुद्रप्रयाग के समाचार, हरिद्वार के समाचार और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार भी पढ़ सकते हैं। 

आप यह भी पढ़ना चाहेंगे :  कैंची धाम पर केंद्रित ‘हनुमान अंश 2’ में नजर आएंगे विराट कोहली-अनुष्का शर्मा? कैंची धाम की कहानी पर होगा फोकस, अंतरराष्ट्रीय प्रभाव तक जाएगी कहानी

आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ें। हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..

Tags (Dunagiri) :

Dunagiri, Uttarakhand News, Almora News, Ranikhet News, Dwarahat News, Dunagiri News, Dunagiri Shaktipeeth, Dunagiri Temple, Vaishnavi Shaktipeeth Uttarakhand, Dunagiri Mata Temple, Religious Tourism Uttarakhand, Spiritual Places Uttarakhand, Himalayan Temples, Dunagiri Temple History, Dunagiri Religious Significance, Dunagiri Tourism, #Dunagiri #DunagiriTemple #DunagiriShaktipeeth #VaishnaviShaktipeeth #AlmoraNews #RanikhetNews #Dwarahat #UttarakhandTourism #ReligiousTourism #UttarakhandNews,

Leave a Reply