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150 वर्ष के शेरवुड कॉलेज ने थामा आर्थिक संसाधनों से जूझ रहे डीएसए का हाथ, कर दी यह बड़ी पहल….

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– दो ऐतिहासिक संस्थाओं का हुआ मिलन
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मई 2019। नगर के डीएसए मैदान में बृहस्पतिवार से नैनीताल जिमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ के तत्वावधान में अंतरविद्यालयी क्रिकेट प्रतियोगिता शुरू हो गयी है। इस दौरान भारी बारिश व ओलावृष्टि के बावजूद प्रतियोगिता का भव्य तरीके से शुभारंभ हुआ। डीएसए की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद पहली बार इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही सर्वाधिक 22 स्कूलों की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं, यही नहीं पहली बार टीमों को प्रतियोगिता के लिए प्रवेश शुल्क भी नहीं देना पड़ रहा है। बल्कि पहली बार ही उन्हें सुंदर टी-शर्ट भी उपहार में मिली हैं।
यह सब संभव हुआ है अपनी स्थापना के 150 गौरवमयी वर्ष पूरे कर रहे शेरवुड कॉलेज की उप पहल से, जिसके तहत नगर के इस प्रतिष्ठित कॉलेज ने शहर ही नहीं प्रदेश और देश की इस प्राचीनतम, 1880 में स्थापित खेल संस्था नैनीताल जिमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ का इस कठिन घड़ी में हाथ थामा है। यह मौका इसलिये भी खास हो गया है कि इस तरह 150 और वर्ष पुरानी दो ऐतिहासिक संस्थाओं का महामिलन भी हुआ है।
इस मौके पर 22 विद्यालयों की टीमों ने मार्च पास्ट कर कुमाऊं परिक्षेत्र के डीआईजी अजय जोशी एवं शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को सलामी दी। श्री संधू व श्री जोशी ने रंगबिरंगे गुब्बारे उड़ाकर प्रतियोगिता का औपचारिक शुभारंभ किया। आगे बारिश की वजह से मैच नहीं खेले जा सके। डीएसए के महासचिव सोनू बिष्ट ने बताया कि नगर पालिका से करोड़ों की लंबित धनराशि न मिलने के कारण डीएसए अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में शेरवुड कॉलेज ने उन्हें बड़ा सहारा दिया है। उन्होंने बताया कि आज के लीग मुकाबले आगे समायोजित किये जाएंगे एवं शुक्रवार से पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार ही मैच खेले जाएंगे। बताया कि पहली बार टीमों से कोई शुल्क भी नहीं लिया जा रहा है। इस मौके पर शेरवुड के उप प्रधानाचार्य हेम चंद्र पांडे तथा एपी सिंह, सुबेदार मेजर रमेश चंद्रा, आशीष पांडे व रंजीत सिंह आदि शिक्षक तथा डीएसए के क्रिकेट सचिव रविप्रकाश जोशी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

वार्षिकोत्सव में परिवार सहित आएंगे अमिताभ बच्चन

नैनीताल। इस अवसर पर शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने बताया कि आगामी 3 से 6 जून के बीच मनाये जा रहे विद्यालय के 150वें वार्षिकोत्सव में विद्यालय के पूर्व छात्र अमिताभ बच्चन ने पत्नी जया बच्चन सहित पूरे परिवार के साथ आने की इच्छा जताई है। साथ ही विद्यालय के पूर्व छात्रों में शामिल अनेकानेक हस्तियां भी इस मौके पर पहुंचकर गौरवान्वित होने जा रही हैं।

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छठें राष्ट्रीय फ्लोरबॉल फेडरेशन कप में उत्तराखंड ने पाया देश में तीसरा स्थान

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2019। पणजी (गोवा) में आयोजित छठें राष्ट्रीय फ्लोरबॉल फेडरेशन कप में देेेश की टॉप 8 टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रथम स्थान पर दिल्ली, द्वितीय मध्यप्रदेश और तृतीय स्थान पर उत्तराखंड का कब्जा रहा।
उत्तराखंड की महिला टीम ने उल्लेखनीय और बेहतर प्रदर्शन किया। कोच सरस्वती भण्डारी की सिखायी खेल रणनीति और तकनीकी मानकों पर सभी खिलाड़ी, खरे उतरे। सरस्वती भण्डारी को बेस्ट कीपर के सम्मान से नवाजा गया। वहीं कप्तान आरती कैड़ा के प्रदर्शन को भी खूब सराहा गया। टीम मैनेजर पूजा नेगी संग सरस्वती भण्डारी, आरती कैड़ा, ममता, सीमा, हिमानी, रिंकी, शीतल, पूनम, कुसुम, शिवानी, नेहा, प्रियंका और सीमा उत्तराखंड टीम में शामिल रही। टीम का मनोबल बढ़ाने के लिये, उत्तराखंड फ्लोर बॉल एसोशिएशन के महासचिव वीरेंद्र मिश्रा साथियों संग मौजूद रहे। इस दौरान दूसरे एशियाना ओशियाना कप के लिये भी खिलाड़ियों का चयन किया गया। कोच सरस्वती भण्डारी सहित पूरी टीम ने विजय एकेडमी देहरादून द्वारा किये गयेे सहयोग पर आभार जताया। भविष्य में भी यथासम्भव सहयोग को विजय एकेडमी द्वारा उन्हें आश्वासन दिया गया।

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राष्टीय ताईक्वांडो कैडेट प्रतियोगिता में में देश में पहला स्थान करने वाले उत्तराखंड के ताइक्वांडो खिलाड़ी पदक प्राप्त करते हुए।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2019। उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने 13 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों की राष्ट्रीय ताईक्वांडो कैडेट प्रतियोगिता में 4 स्वर्ण, 2 रजत एवं 3 काँस्य पदकों के साथ राष्टीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। उल्लेखनीय है कि बीते 4 वर्षों से कैडेट वर्ग में हो रही इस प्रतियोगिता में गत वर्ष उत्तराखंड ने दूसरा स्थान प्राप्त किया था, और इस बार अपने प्रदर्शन को और भी बेहतर किया है।
चेन्नई में 5-8 फरवरी तक आयोजित इस राष्टीय प्रतियोगिता में उतराखंड के खिलाडियो ने शानदार प्रदशर्न करते हुये महाराष्ट को दुसरे तथा यूपी को तीसरे स्थान पर रहने को मजबूर कर दिया। उत्तराखंड के लिए विशाखा साह, अंकित मेर, धीरज यादव व धीरज लाल साह ने स्वर्ण पदक, कनिष्का मठपाल व त्रिभुवन ने रजत पदक तथा कल्पना गडिया, पूर्णिमा बोरा व शुभांशी ने कांस्य पदक प्राप्त किये। टीम के कोच कमलेश तिवारी, ललित आर्या, किरन नेगी, अनीता पांडे, मनोज रावत, अभिषेक, विवेक जोशी, मैनेजर अनिल कार्की रहे। उत्तराखंड के खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन पर उत्तराखंड प्रदेश ताईक्वांडो संघ के महासचिव श्री चन्द्र विजय सिंह बिष्ट, भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव राजीव मेहता, प्रदेश ओलंपिक के महासचिव डा. डीके सिह आदि ने उत्तराखंड की टीम को इस उपलब्धि पर बधाइयां दी हैं।

यह भी पढ़ें : एशियाई खेलों में दिखेगा नैनीताल की लतिका के पंचों का दम

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 18 अगस्त 2018। शीघ्र आयोजित होने जा रहे एशियाई खेलों में नैनीताल की ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी भी भारतीय टीम का हिस्सा होंगी। उनके चयन से नगर के खेल प्रेमियों के साथ ही लतिका के साथी खिलाड़ियों में हर्ष का माहौल है। लतिका को नगर में 3 वर्ष की उम्र से ताइक्वांडो सिखाने वाले कोच सुनील थापा ने बताया कि लतिका 53 किग्रा भार वर्ग में खेलेंगी। कहा कि उनसे स्वर्ण पदक लाने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व पूर्व 2016 में हुए ने 12वें दक्षिण एशियाई खेलों में लतिका ने 53 किग्रा भार वर्ग में अपने पंचों का दम दिखाते हुये स्वर्ण पदक को अपने नाम किया था। वहीं मई 2014 में उज्बेकिस्तान में आयोजित हुई 21वीं एशियन ताइक्वांडो चौंपियनशिप में भी वह 53 किग्रा से अधिक के भार वर्ग में कांश्य पदक जीत चुकी हैं। वह मध्य प्रदेश ताइक्वांडो अकादमी में भी ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेती रही हैं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके कोच सुनील थापा, उत्तराखंड राज्य ताइक्वांडो संघ के सचिव सीवीएस बिष्ट, नैनीताल जिला ताइक्वांडो संघ के संरक्षक दिग्विजय बिष्ट आदि ने हर्ष जताते हुये उन्हें बधाइयां दी हैं।
उल्लेखनीय है की लतिका नैनीताल के राजमहल कंपाउंड निवासी असम रायफल्स में जेसीओ के रूप में कार्यरत महेंद्र अधिकारी और नीमा भंडारी की पुत्री हैं। यहाँ मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर से पढ़ी हैं। चार वर्ष की आयु से सुनील थापा से ताइक्वांडो सीखती रही हैं। वर्तमान में मध्य प्रदेश के बरकतुल्ला विश्व विद्यालय भोपाल के चाणक्य कॉलेज से पढ़ एवं मध्य प्रदेश ताइक्वांडो अकादमी से ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके भाई पीयूष भी ताइक्वांडो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत चुके हैं।

लतिका की पूरी ताइक्वांडो प्रोफाइल व उपलब्धियों के लिए यहाँ क्लिक करें।

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नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल की ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी ने 12वें दक्षिण एशियाई खेल 2016 में खेलते हुये देश 53 किग्रा भार वर्ग में पदक जीतकर शहर तथा देश-प्रदेश का नाम रोशन किया है। शिलांग के निग्रिमस इंडोर स्टेडियम में 13 से 15 फरवरी तक आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता में लतिका ने अपने पंचों का दम दिखाते हुये स्वर्ण पदक को अपने नाम किया। सोमवार को खेले गये प्रतियोगिता के फाइनल में उन्होंने नेपाल की नीमा गुरंग को 17-6 से हराकर सोने का पदक अपने नाम किया, जबकि इससे पूर्व सेमी फाइनल में उन्होंने भूटान की मेरीडोना को 17-3 के अंतर से पटखनी दी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व लतिका मई 2014 में उज्बेकिस्तान में आयोजित हुई 21वीं एशियन ताइक्वांडो चैंपियनशिप में भी 53 किग्रा से अधिक के भार वर्ग में कांश्य पदक जीत चुकी हैं। वह मध्य प्रदेश ताइक्वांडो अकादमी में भी ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेती रही हैं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके कोच सुनील थापा, उत्तराखंड राज्य ताइक्वांडो संघ के सचिव सीवीएस बिष्ट, नैनीताल जिला ताइक्वांडो संघ के संरक्षक दिग्विजय बिष्ट, उपाध्यक्ष हरीश नयाल, सचिव ललित आर्या तथा ताइक्वांडो से जुड़े दीपेंद्र थापा, कमलेश तिवारी, राजेंद्र मेहरा, चेतना आर्या, ज्योति दुर्गापाल, अमित बिष्ट व संदीप थापा आदि ने हर्ष जताते हुये उन्हें बधाइयां दी हैं।

उल्लेखनीय है की लतिका नैनीताल के राजमहल कंपाउंड निवासी असम रायफल्स में जेसीओ के रूप में कार्यरत महेंद्र अधिकारी और नीमा भंडारी की पुत्री हैं। यहाँ मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर से पढ़ी हैं। चार वर्ष की आयु से सुनील थापा से ताइक्वांडो सीखती रही हैं। वर्तमान में मध्य प्रदेश के बरकतुल्ला विश्व विद्यालय भोपाल के चाणक्य कॉलेज से पढ़ एवं मध्य प्रदेश ताइक्वांडो अकादमी से ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके भाई पीयूष भी ताइक्वांडो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत चुके हैं।

उधर बागेश्वर जिले के गरुड़ के निकट उडल गाँव के निवासी गजेन्द्र सिंह परिहार ने भी इन्ही सैफ खेलों में 54-58 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीतकर कुमाऊँ और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।

बालिकाओं के लिए स्वरक्षा एवं कोचों के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन रहा है ताइक्वांडो

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p style=”text-align: justify;”>-राष्ट्रीय-अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर पदक भी प्राप्त कर रही हैं नैनीताल की बालिकाएं
-गत वर्ष के बाद इस वर्ष भी आधा दर्जन के ब्लेक बेल्ट हासिल करने की भी संभावना
नैनीताल। देश भर में बालिकाओं के प्रति रुक न पा रहे अपराधों के साथ उनकी सुरक्षा के बीच सरोवरनगरी नैनीताल से आशा भरी किरण नजर आ रही है। यहां बालिकाओं बालकों से आगे बढ़कर आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो सीख रही हैं। इससे न केवल वे आत्म रक्षा में सक्षम व निपुण हो पा रही हैं, वरन इस खेल की प्रतिष्ठित ब्लेक बेल्ट के साथ ही राष्ट्रीय-अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर पदक भी प्राप्त कर रही हैं। वहीं उनके कोच भी घर पर स्वरोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

सरोवरनगरी में ताइक्वांडो के साथ आत्मरक्षा के गुर सीखती बालिकाएं।

बताया गया है कि सरोवरनगरी में ताइक्वांडो का खेल करीब ढाई दशक पुराना हो चला है। भाष्कर साह और जीतेंद्र थापा आदि को नगर में इस खेल को शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। आगे जीतेंद्र के शागिर्द सुनील थापा ने इसे आगे बढ़ाया और उनसे सीखी लतिका भंडारी 12वें दक्षिण एशियाई खेल-2016 में देश के लिए स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं, जबकि विश्वकेतु वैद्य जैसे कई शागिर्द राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद अब कोच के रूप में इस खेल को आगे बढ़ा रहे हैं। इधर बीते वर्ष नगर की दो बालिकाएं सनवाल स्कूल की साक्षी और भारतीय शहीद सैनिक स्कूल की बबीता राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर आई हैं। इसके अलावा 2017 में नगर के करीब आधा दर्जन युवाओं ने ब्लेक बेल्ट हासिल की है, और करीब इतने ही इस वर्ष इसकी तैयारी में हैं।

राष्ट्रीय सहारा, 29 मई 2018

वर्तमान में नगर में एक दर्जन से अधिक विद्यालयों के साथ ही नैनीताल ताइक्वांडो क्लब के द्वारा सेंट जॉन्स चर्च सूखाताल एवं डीएसबी परिसर के द्वारा तल्लीताल कैंट स्थित नये बने गिर्दा पार्क में सैकड़ों बच्चों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण ले रहे बच्चों में तीन-चार वर्ष की उम्र से 20-25 की उम्र के युवा शामिल हैं, और इनमें भी 60 फीसद से अधिक बालिकाएं हैं। इन्हें आत्मरक्षा के साथ ही किसी भी तरह के हमले, छेड़खानी आदि की स्थितियों से बचने के लिए बहुत ही सरल तकनीकें, जैसे छेड़खानी करने वाले की अंगुली पीछे की ओर मरोड़ने, कान के पीछे व पेट आदि में हाथ अथवा अपने पास मौजूद पेन आदि की मदद से हमला स्वयं को सुरक्षित करने की तरकीबें बताई जा रही हैं। इसके साथ ही नगर में बालिकाएं भी अन्य को कोचिंग दे रही हैं। इनमें ज्योति दुर्गापाल प्रमुख हैं। उनके अलावा विश्वकेतु, गोविंद, राजेंद्र सिंह, विनोद कुमार, योगेंद्र, राजकुमार, समीर सहित अनेक युवा ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देकर स्वयं स्वरोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं। इधर नगर के पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार में ताइक्वांडो के प्रशिक्षण के लिए सांई का केंद्र भी खुल गया है।

ऊन से रंग-बिरंगे पक्षी बनाने में माहिर हैं दिनेश

नैनीताल। रंग-बिरंगे पक्षियों को हम सब रोज देखते हैं, लेकिन कभी सोचा है कि अगर ये नहीं रहेंगे तो हम उन्हें कैसे देख पायेंगे। नाटककार, कलाकार, कवि और लेखन सहित अनेक विधाओं में माहिर नगर के दिनेश उपाध्याय ने उत्तराखंड में पाये जाने वाले पक्षियों को संरक्षित करने का एक अलग तरह का माध्यम खोज निकाला है। दिनेश रंग-बिरंगे ऊन के धागों की मदद से रंग-बिरंगे पक्षियों को रचने का अनूठा हुनर रखते हैं। उनका मानना है कि यदि इस तरह प्रदेश में पाये जाने वाले सभी 650 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों के बुतों को विशेष संग्रहालय में रखकर संरक्षित किया जा सकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां-बच्चे और यहां आने वाले सैलानी इन्हें देख सकें। यह एक अलग तरह का आकर्षण भी होगा।केएमवीएन में सहायक प्रबंधक दिनेश प्रदेश के जनकवि स्वर्गीय गिरीश तिवारी गिर्दा के साथ अनेक नाटकों में सहायक निर्देशक एवं नाटक लेखन के साथ ही अभिनय में भी सक्रिय रहे हैं तथा कविता लेखन के साथ होम्योपैथी सहित अनेक अन्य विधाओं में भी दखल रखते हैं। इधर वह पक्षियों को रंग-बिरंगे ऊन से बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं, तथा राज्य पक्षी मोनाल, निल्टावा, फ्लाई कैचर, मैगपाई व ग्रीन बैक्ड टिट सहित अनेक पक्षियों को इस तरह बना चुके हैं। इन्हें बनाने के लिए रुई, शादी के पुराने कार्ड आदि की फेवीबांड की मदद से लुगदी बनाकर उसे पक्षियों का स्वरूप दिया जाता है और बाहर से रंग-बिरंगे ऊन से उन्हें आकर्षक बना दिया जाता है। उनका कहना है कि बच्चों को यह विधा सिखाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने और आगे इन पक्षियों के लिए संग्रहालय स्थापित करने की जरूरत है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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