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यूपी में उत्तराखंड के लाखों रुपये में भ्रष्टाचार का आरोप, CM धामी से की गई शिकायत…

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Rupee Vs dollar: रुपये ने दिखाई शानदार रिकवरी, 20 पैसे की बढ़त से डॉलर के  मुकाबले इतने पर आया Rupee Vs dollar Rupee showed great recovery gain of 20  paise against the-बरेली में आयोजित होने वाले उत्तरायणी मेले की आयोजक संस्था के प्रति उत्तराखंड के सीएम को सचेत किया
नवीन समाचार, बरेली, 12 नवंबर 2022। उत्तर प्रदेश के बरेली में संभवतया उत्तराखंड से बाहर होने वाले सबसे पुराने उत्तराखंड के त्योहार उत्तरायणी पर आयोजित होने वाले सबसे पुराने उत्तरायणी मेले में भ्रष्टाचार के मामले का जिन्न फिर बाहर आ गया है। बरेली में उत्तरायणी मेले का आयोजन करने वाली उत्तरायणी जन कल्याण समिति के आजीवन सदस्य व बरेली कॉलेज के छात्रसंघ उपाध्यक्ष विनोद जोशी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर समिति में उत्तराखण्ड सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा दी जाने वाली लाखों रुपये की मदद के कोष से सालों से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किये जाने का आरोप लगाया है, और आगे समिति को कोई धनराशि दिए जाने के प्रति भी सचेत किया है। यह भी पढ़ें : प्रमुख होटल व्यवसायी की कार दुर्घटना में मौत, सीएम ने भी जताया शोक

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आरोप लगाया है कि 2014-15 में समिति के महामंत्री देवेन्द्र जोशी व कोषाध्यक्ष विपिन वर्मा की ओर से उत्तराखण्ड भवन की खरीद में बड़ा घोटाला तथा बैंक खातों में भारी गड़बड़ी की गयी है। इसके पुख्ता सबूत उपलब्ध है। इसी क्रम में बरेली के रजिस्ट्रार द्वारा समिति के पिछले 10 वर्षों के खातों के ऑडिट के आदेश दिये गये है। बताया है कि वर्तमान में समिति के अध्यक्ष समाजवादी पार्टी के नेता प्रमोद विष्ट हैं, उनके चुनाव में भी धांधली की जांच रजिस्ट्रार द्वारा की जा रही है। यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: अभी-अभी फिर डोली धरती, नैनीताल में भी किया गया महसूस

बताया है कि समिति के खातें में वर्तमान में 60 लाख रुपए से अधिक धनराशि जमा है, जिसे इन लोगों के द्वारा खुद-बुर्द किया जा रहा है। संभावना जताया है कि मेले के नाम पर ये लोग पुनः उत्तराखण्ड सरकार से पैसा मांगने जा रहे हैं जबकि समिति का रजिस्ट्रेशन अभी तक रजिस्ट्रार ने भ्रष्टाचार की शिकायतों के कारण रोक रखा है। इसलिए सीएम धामी से निवेदन किया गया है कि देवभूमि की भोली-भाली जनता का पैसा इन भ्रष्टाचारियों व संस्था को न दिया जाये तथा इस समिति को ब्लैकलिस्ट किया जाये। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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Culture of uttarakhand shown in uttarayani mela at rudrapur - उत्तरायणी  मेला: साज-सुरों के साथ पहाड़ी संस्कृति का एहसासनवीन समाचार, बरेली, 28 अगस्त 2022। उत्तराखंड की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली मुख्यालय में उत्तराखंडी लोगों की पहचान व स्वाभिमान के प्रतीक उत्तरायणी मेले की आयोजक संस्था उत्तरायणी जनकल्याण समिति का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। समिति के वर्तमान महामंत्री ने सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज को लिखे पत्र में स्वीकार किया है कि पूर्व में समिति में कई गड़बड़ियां हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि बरेली में उत्तराखंडी-पर्वतीय समाज के लोगों की अच्छी संख्या में आबादी राज्य बनने के पूर्व से निवास करती है। इस समाज में उत्तरायणी जनकल्याण समिति खासा महत्व रखती है। उत्तरायणी पर्व पर हर वर्ष 13, 14 व 15 जनवरी को बरेली क्लब के मैदान में उत्तरायणी मेले का आयोजन होता है, इसमें लाखों लोग जुटते हैं।

उत्तरायणी जनकल्याण समिति में पिछले दिनों चुनाव की घोषणा के बाद से विवाद की स्थिति चल रही है। इस बार समिति में पहली बार चुनाव की नौबत आई। तत्कालीन पदाधिकारियों पर आरोप-प्रत्यारोप लगे और अधिकारियों के साथ ही रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज के साथ ही उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के के मुख्यमंत्रियों तक शिकायतें भी हुईं। समिति पदाधिकारियों के विस्तार में संगठन मंत्री बने विनोद कुमार जोशी ने सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स सोसायटी को लंबी चौड़ी शिकायत करते हुए वर्ष 2001 से लेकर अब तक के आय-व्यय के साथ ही सभी क्रियाकलापों की जांच कराने की मांग की।

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जोशी की शिकायतों में मुख्य आरोप उत्तराखंड भवन की रजिस्ट्री का है। उन्होंने समिति के एक पूर्व पदाधिकारी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जोशी की शिकायत पर सहायक रजिस्ट्रार ने समिति के महामंत्री दिनेश चंद्र पंत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा तो पंत ने स्वीकार किया कि समिति में पूर्व में तमाम अनियमितताएं हुई हैं। पंत के अनुसार कई मामलों में कोई भी एजेंडा, प्रस्ताव या बैठक की कार्यवाही रिकार्ड में ही नहीं हैं।

उन्होंने मेले में लगने वाले स्टॉल बुकिंग व विज्ञापन, होर्डिंग, बैनर के काम में भी अनियमितता की बात मानी है। पंत ने तीन नवंबर 2021 के बाद समिति का नवीनीकरण लंबित होने की बात कहते हुए उसका नवीनीकरण कराने की मांग भी सहायक रजिस्ट्रार से शपथपत्र के साथ कही हैं। महामंत्री के इस पत्र के बाद उत्तरायणी जनकल्याण समिति का विवाद और अधिक गहराने की उम्मीद है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : यूपी से परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर बनी सहमति, उत्तराखंड को मिलेगी ये धनराशि

नवीन समाचार, लखनऊ, 28 जून 2018। उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार के बीच परिसंपत्तियों और आस्तियों के बटवारे को लेकर सचिवालय एनेक्सी लखनऊ में गुरुवार को बैठक हुई जिसमें कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। वहीं कुछ मुद्दे भारत सरकार को संदर्भित करने पर भी सहमति बनी।

प्रमुख सचिव पुनर्गठन आनंद बर्धन ने बताया कि उत्तर प्रदेश सिंचाई अभिकरण 3.9 करोड़ रुपये उत्तराखंड के मत्स्य विभाग को देगा। इसी तरह से उत्तर प्रदेश वन निगम द्वारा उत्तराखण्ड वन निगम को पहले चरण में 99 करोड़ रुपये देने पर सहमति बनी। शेष धनराशि आयकर की देयता में कटौती कर अगले चरण में उत्तर प्रदेश देगा। खाद्य विभाग उत्तराखण्ड द्वारा उत्तर प्रदेश खाद्य विभाग को 105 करोड़ रुपये देने पर सहमति बनी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा उत्तराखण्ड परिवहन को 8.27 करोड़ रुपये देने पर सहमति बनी।

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उत्तर प्रदेश ऊर्जा विभाग द्वारा उत्तराखण्ड ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के पीपीएफ का 174 करोड़ रुपये वास्तविक भुगतान करेगा। उत्तराखण्ड उत्तर प्रदेश को 160 करोड़ रुपये बिजली बिल का भुगतान करेगा। मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना के लिए अविभाजित उत्तर प्रदेश द्वारा ऋण लेने और इस परियोजना पर व्यय न करने का मामला भारत सरकार को संदर्भित किया जाएगा। दोनों राज्यों के बीच में इस बात पर सहमति बनी की उत्तराखण्ड की सीमा में स्थित सिंचाई विभाग की ज़मीन का 25 प्रतिशत उत्तराखण्ड को दिया जाएगा। बैठक में सचिव अमित नेगी, आर.मीनाक्षी सुंदरम, दिलीप जावलकर, अरविंद सिंह ह्यांकी सहित उत्तर प्रदेश के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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