Court News : कोरोना काल में क्वारन्टीन सेंटर में बच्ची की सांप के काटने से हुई मौत के मामले में दो आरोपित दोषमुक्त…

Court News

हल्द्वानी में आईएसबीटी (ISBT-Gaulapar) मामले में उच्च न्यायालय का दीर्घकालीन-नजीर पेश करने वाला 1 बड़ा आदेश

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वेंडिंग जोन पर नैनीताल नगर पालिका ने फिर गैंद फड़ (Farh) वालों के पाले में डाली

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High Court on Officers-हाईकोर्ट का नौकरशाही को बड़ा संदेश, एसडीएम पर लगाया 25 हजार का जुर्माना, व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने के आदेश भी…

High Court on Officers : The Uttarakhand High Court, headed by Chief Justice Vipin Sanghi and Justice Rakesh Thapliyal, has issued an order for the removal of Sunil Kumar Joshi from his position as Vice-Chancellor of Ayurvedic University. The court deemed his appointment as a violation of the rules governing the position. The decision was made after a petition filed by Vinod Kumar Chauhan, a resident of Haridwar, alleging illegal appointment and financial irregularities by Joshi. The petitioner argued that Joshi lacked the required qualifications and experience for the role, and further accused him of misusing his authority and making decisions contrary to government directives.

नैनीताल में जाम और पार्किंग के हल्ले से घटी नैनीताल आने वाले सैलानियों की संख्या, नैनीताल के पर्यटन की वास्तविक स्थिति पर देखें रिपोर्ट (Nainital-Crises)

Nainital-Crises, The number of tourists visiting Nainital has significantly decreased due to traffic congestion and parking issues, as reported by ‘Naveen Samachar.’ In an effort to provide an accurate assessment of the city’s tourism and traffic situation, the media outlet conducted on-ground reporting over the weekend. Several factors, such as diverted routes for vehicles, road repairs, and inconvenient parking arrangements, have contributed to the decline in tourist arrivals. The report also highlights concerns regarding online hotel bookings, illegal hotels, and the impact on traditional establishments. Furthermore, the closure of Delhi-Nainital bus services and the challenges faced by older hotels in renovating themselves have further affected the tourism industry in Nainital. Digvijay Bisht, President of the Nainital Hotel and Restaurant Association, suggests allowing vehicles with octroi stickers to enter the city directly and utilizing vacant parking spaces to alleviate congestion. Nainital tourism, Nainital tourism problems,
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यूट्यूब पर वीडियो देखने के बाद 24 वर्षीय हिंदू युवक के 5 बार नमाज पढ़ने की चर्चा और पाकिस्तान को सूचनाएं भेजने का शक-Namaj

Namaj, In Doiwala, the capital city of Dehradun, the police have apprehended a Hindu youth who is reportedly suffering from mental depression after watching videos related to Allah on YouTube. The individual has been confined to a room for approximately four years and is said to perform the five daily prayers of Islam.

Moreover, the detained youth is accused of encouraging others to adopt the Islamic faith and is suspected of having connections with Pakistan, potentially transmitting information through social media channels. The police currently have custody of the individual and are conducting interrogations.

As per the police’s information, the 24-year-old Vaibhav Bijlwan, a resident of Bullawala village in Doiwala, holds a polytechnic degree. According to the youth’s father, he has been homebound and experiencing mental distress since completing his studies.

The police state that during questioning, the youth confessed to not believing in God and admitted to regularly watching videos related to Allah on a YouTube channel. Rajesh Shah, the Kotwal of Doiwala, mentioned that the young man appears to be mentally disturbed, and the investigation is ongoing. Although there are suspicions of him transmitting information to Pakistan, this claim has not been verified yet.

उत्तराखंड में वन भूमि से मजारें व मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, जानें क्या हुआ…

Petition in High Court against demolition of tombs and mosques from forest land in Uttarakhand, know what happened, uttaraakhand mein van bhoomi se majaaren va masjid tode jaane ke khilaaph haeekort mein yaachika, jaanen kya hua

18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की शादियों पर उच्च न्यायालय का कड़ा रुख ! ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जवाब मांगा

High Court’s strong stand on marriages of girls below 18 years of age! Asked for answer from All India Muslim Personal Law Board, 18 varsh se kam umr kee kishoriyon kee shaadiyon par uchch nyaayaalay ka kada rukh ! ol indiya muslim parsanal lo bord se javaab maanga

वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की कोठी पर आगजनी के मामले में दो भाजपा नेता बरी…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अगस्त 2022। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा की एकलपीठ ने कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के प्यूड़ा-मुक्तेश्वर स्थित कोठी पर पिछले वर्ष हुई आगजनी और गोली चलाने के मामले में भाजपा नेता राकेश कपिल और मंडल अध्यक्ष कुंदन चिलवाल को … Read more

राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय किच्छा के अतिरिक्त कहीं स्थापित किया तो होगी हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की अवमानना

प्रयागराज में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय - Latest Current Affairs for  Competitive Examsडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मई 2022। अधिवक्ता डॉ. भूपाल भाकुनी ने मुख्यमंत्री द्वारा शीघ्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शुरू करने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को प्राग फार्म किच्छा से इतर कहीं स्थापित करना उच्चतम न्यायालय तथा माननीय उच्च न्यायालय दोनों की अवमानना होगी। साथ ही याद दिलाया कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय में आज भी विशेष अनुमति याचिका विचाराधीन है।

Bhupal Bhakuni
डा. भूपाल सिंह भाकुनी

शुरू से नैनीताल में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए संघर्षरत डॉ. भाकुनी ने बताया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय उत्तराखंड को उच्च न्यायालय के नजदीक तहसील किच्छा के निकट प्राग फॉर्म में स्थापित करने का आदेश जारी किया था, तथा इसके लिए सरकार द्वारा जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर के माध्यम से 25 एकड़ भूमि प्राग फॉर्म में आवंटित की गई थी जो आज भी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय उत्तराखंड के नाम पर दर्ज है।

किंतु तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने निजी स्वार्थों के तहत इसे अपने विधानसभा क्षेत्र डोईवाला स्थित रानी धारा में स्थापित करने का प्रयास किया। इस पर उन्होंने 2018 में उच्च न्यायालय में दो अवमानना याचिका दायर कीं। इसे 6 जनवरी 2022 को उच्च न्यायालय ने इस स्वतंत्रता के साथ निस्तारित कर दिया कि यदि याचिकाकर्ता चाहे तो कभी भी अवमानना याचिका पुनः दाखिल कर सकता है।

इस बीच न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए 3 मार्च 2019 को गुपचुप तरीके से रानीधारा डोईवाला में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का उद्घाटन भी कर दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय में आज भी इस बारे में एक विशेष अनुमति याचिका विचाराधीन है। इस प्रकार यदि सरकार इसे कहीं और स्थापित करने का प्रयास करती है तो यह उच्च एवं उच्चतम न्यायालय यानी दोनों की अवमानना होगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा उत्तराखंड में प्रस्तावित एक राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का मामला, मुख्यमंत्री पर क्षेत्रवाद का आरोप लगाते हुए व्यक्तिगत पार्टी बनाने की याचना…

-नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी प्राग फार्म किच्छा से रानीपोखरी डोईवाला खोलने के प्रयास के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 सितंबर 2019। मूल रूप से भवाली नैनीताल के लिए स्वीकृत राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को पहले प्राग फार्म किच्छा के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अपनी विधानसभा में खोलने की घोषणा कर दी गयी। अब यह मामला इसी बिंदु पर विरोध जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है। इस मामले में उत्तराखंड सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में की गई ‘पिटिसन फॉर स्पेसल लीव टू अपील संख्या 12359-12362 ऑफ 2019 उत्तराखंड सरकार बनाम डॉक्टर भूपाल सिंह भाकुनी’ में पैरवी करते हुवे डॉ. भाकुनी ने बताया कि अवमानना याचिका में अब राज्य के मुख्यमंत्री को भी व्यक्तिगत पार्टी बनाये जाने की याचना की जा रही है ।

डा. भाकुनी ने बताया कि पूर्व में भवाली, नैनीताल के लिए स्वीकृत राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को नैनीताल के तत्कालीन डीएम द्वारा जरूरी भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। इस कारण उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 19 जून 2018 को ऊधम सिंह नगर जनपद के डीएम को प्राग फार्म में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलने हेतु 25 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के आदेश दिए। डीएम ऊधमसिंह नगर ने इस पर उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड को मुख्य मार्ग से लगती हुई भूमि आवंटित कर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के नाम हस्तांतरित भी कर दी थी। यह भूति तहसील के राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज हो चुकी है। लेकिन इसी बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के द्वार गुपचुप तरीके से इस विवि को किच्छा के स्थान पर अपनी विधान सभा क्षेत्र डोइवाला के रानीपोखरी में खोलने की घोषणा करने के साथ ही 3 मार्च 2019 को गुपचुप तरीके से इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री यहाँ भी नहीं रुके, बल्कि उन्होंने उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय में अपील करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन अपील के निर्णय का इंतेजार किए बिना ही 13 अगस्त 2019 को कैबिनेट की बैठक में इस विवि को रानीपोखरी में मात्र 10 एकड़ भूमि में खोलने सम्बंधी प्रस्ताव पारित करवा लिया जब कि इसे विधान सभा में रख कर प्रस्ताव पारित होना चाहिये था। डा. भाकुनी का कहना है कि सरकार का यह कदम उच्च न्यायालय के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की भी स्पष्ट अवहेलना है।

मुख्यमंत्री पर लगाया क्षेत्रवाद का आरोप

Bhupal Bhakuni
डा. भूपाल सिंह भाकुनी

नैनीताल। याचिकाकर्ता डा. भाकुनी ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ऊधम सिंह नगर में स्थापना किए जाने की बजाय उच्च न्यायालय उत्तराखंड के आदेशों की जानबूझ कर अवहेलना तथा सरकार की शक्ति का दुरुपयोग करने का आरोप मुख्यमंत्री रावत पर लगाते हुए ऐसे प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुवे मुख्यमंत्री पर क्षेत्रवाद फैलाने का गम्भीर आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को केवल गढ़वाल का हीं नहीं कुमाऊँ का भी मुख्यमंत्री होने की याद दिलाते हुवे पूछा है कि आखिर वह कुमाऊँ मंडल की उपेक्षा क्यों करते रहते हैं ? कोई भी छोटा बड़ा शिक्षा संस्थान, उद्योग, विकास कार्य हो या कोई केंद्र की योजना हो सभी कुछ देहरादून या गढ़वाल मंडल में स्थापित क्यों करना चाहते हैं व भेदभाव करते हुवे कुमाऊँ की घोर उपेक्षा करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ ही यहाँ के नेता भी उतने ही जिम्मेदार है जो कि जनहित के मामलों में चुप्पी साधे रहते हैं। कहा कि अपवाद स्वरूप एक मात्र राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ही जनहित के कार्यों में दोनो मंडलों में संतुलन बना कर चलते हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व डीएम आदि को हाईकोर्ट से अवमानना जारी, व्यक्तिगत कोर्ट में पेश हों !

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जनवरी, 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलकर 16 अगस्त 2018 से कक्षाएं प्रारम्भ करने को लेकर आदेश पारित किये थे। इस आदेश का क्रियान्वयन नहीं होने पर मुख्य सचिव समेत अन्य पक्षकारों को अवमानना नोटिस जारी कर छह मार्च को व्यक्तिगत रूप से प्रगति रिपोर्ट के साथ पेश होने के आदेश पारित किए हैं।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने किच्छा के खुरपिया व प्राग फार्म में सीलिंग से निकली 3600 एकड़ भूमि में से 25 एकड़ भूमि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को हस्तांतरित करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। छह माह बीत जाने के पश्चात भी सरकार द्वारा कोई कार्यवाही ना किये जाने से क्षुब्ध नैनीताल निवासी याचिकाकर्ता डॉ. भूपाल सिंह भाकुनी ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि सरकार की मंशा उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार आधारित शिखा देने के बजाय बेशकीमती जमीन को बेचने की है। कहा कि राष्ट्रीय विधि विवि के खुलने से यहाँ के लोगों को न्यायिक क्षेत्र में रोजगार के साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त हो सकेगी ओर उत्तराखंड की एक अलग पहचान बनेगी। अवमानना याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, प्रमुख सचिव न्याय तथा डीएम ऊधमसिंह नगर को पक्षकार बनाया गया है।

पूर्व समाचार : आखिर अध्यादेश के आठ साल बाद जगी उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद

-2010 में हुआ था भवाली में स्थापित करने के लिये शासनादेश, 2015 में पहले तत्कालीन उच्च शिक्षा निदेशक अग्रवाल एवं फिर कुमाऊं विवि के तत्कालीन कुलपति प्रो. धामी को बनाया था प्रस्तावित विवि का ओएसडी

-गत दिवस केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देहरादून में स्थापना करने की की थी घोषणा
नवीन जोशी, नैनीताल, , 19 जून 2018। आखिर अध्यादेश के आठ सालों के बाद उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद फिर से बन गयी है। अलबत्ता पूर्व में नैनीताल जिले के भवाली में प्रस्तावित और इधर गत दिवस केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा देहरादून में स्थापना करने की घोषणा वाला राष्ट्रीय महत्व का यह विश्वविद्यालय नैनीताल जिले के हाथ से खिसक गया है। इसका कारण नैनीताल के डीएम द्वारा प्रस्तावित विवि के लिए जरूरी भूमि उपलब्ध न करा पाना बताया जा रहा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर जिले के प्राग व खुरपिया फार्म में इसे स्थापित कर बकायदा 16 अगस्त से कक्षाएं शुरू करने के आदेश दे दिये हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में 4 अक्टूबर 2015 को मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की संयुक्त खंडपीठ ने अपर शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा अजय अग्रवाल को भवाली में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विवि का विशेष कार्याधिकारी नियुक्त कर दिया था, और बाद में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी को यह दायित्व दे दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय विधि विवि का शासनादेश चार नवम्बर 2010 में जारी हा गया था। तभी से वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी व वरिष्ठ अधिवक्ता तथा पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल भवाली में राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना के लिए प्रयासरत थे। 2014 तक इसकी स्थापना के लिए सरकार के स्तर पर कोई प्रयास नहीं होने पर उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली। डा. भाकुनी ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब इसकी स्थापना हो जाने का विश्वास जताते हुए बताया कि नैनीताल के डीएम के द्वारा आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं करायी गयी। इस पर उन्होंने नैनीताल जिले में पटवाडांगर, टीवी सैनिटोरियम भवाली, भवाली-भीमताल के बीच फरसौली, कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालीकोट, आर्मी कैंप नेपा फार्म मालधनचौड़ व एचएमटी रानीबाग तथा ऊधमसिंह नगर जिले में किच्छा के खुरपिया फार्म, प्राग फार्म में सीलिंग की निकली 1800 एकड़ भूमि के स्थानों के विकल्प उच्च न्यायालय को सुझाये थे। जिनमें से प्राग फार्म के विकल्प को स्वीकार कर लिया गया है।

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उत्तराखंडः एनएच घोटाले का जिन्न फिर बोतल से बाहर, एनएचएआई के अधिकारी के घर आज की गई छापेमारी

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2022। दिल्ली से आई सीबीआई की टीम ने राजधानी देहरादून में तीन स्थानों पर छापेमारी की। इसमें एनएचएआई के एक बड़े अधिकारी के यहां से सीबीआई ने बैंक से जुड़े दस्तावेजों के साथ अन्य दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर सीबीआई की टीम सबसे … Read more

बड़ा समाचार: कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड के राष्ट्रीय स्मारक आम लोगों के लिये बंद

रवींद्र देवलियाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अप्रैल 2021। केन्द्र सरकार की ओर से कोरोना महामारी के प्रभावी रोकथाम के दृष्टिगत उत्तराखंड के समस्त राष्ट्रीय स्मारकों व पुरास्थलों को पर्यटकों व आम लोगों के लिये बंद कर दिया गया है। फिलहाल 15 मई तक इन पर रोक रहेगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से … Read more

नैनीताल : नगर पालिका के एक अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश

-निकाले गए तीन कर्मचारियों ने लगाए थे आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 नवम्बर 2020। नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी ने नौकरी से निकाले गए तीन कर्मचारियों-सौरभ पुत्र राजू, पवन पुत्र भगवत एवं मोहित पुत्र मनोज के द्वारा लगाए गए आरोपों पर नगर पालिका के सफाई निरीक्षक कुलदीप कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में नगर पालिका के वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। जांच समिति में नगर पालिका के अवर अभियंता एवं लेखाधिकारी को सदस्य बनाया गया है, तथा जांच समिति से एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि तीनों कर्मचारियों ने इस संबंध में अपने समाज की वाल्मीकि सभा को इस संबंध में पत्र लिखा था और नगर पालिका अध्यक्ष को पृष्ठांकित किया था, तथा वाल्मीकि सभा ने भी नगर पालिका अध्यक्ष से इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा था।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट ने माना, लेक ब्रिज चुंगी के पूरे मामले में सीबीआई के आरोपों के अनुसार भ्रष्टाचार हुआ ही नहीं…

-वर्ष 2010-11 में लेक ब्रिज चुंगी का मामला, मामले में हुई थी सीबीआई की जांच
-धारा 471 के मामले भी किसी पर साबित नहीं, दो आरोपितों पर निचली अदालत में होगा परीक्षण
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2010-11 में नैनीताल नगर पालिका की लेक ब्रिज चुंगी के मामले में सभी आरोपितों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के आरोप खारिज कर दिये हैं। उच्च न्यायालय द्वारा जारी 30 पन्नों के आदेश में साफ कहा गया है कि मामले में सभी आरोपितों-तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी, ठेकेदार आलोक चौधरी, क्लर्क राजेंद्र जोशी आदि के खिलाफ आपराधिक शडयंत्र, धोखाधड़ी या जालसाजी के आरोप में सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 120बी, 420, 468 के तहत लगायी गयी धाराओं का कोई मामला नहीं बनता है। धारा 471 में भी किसी पर आरोप साबित नहीं हुए हैं, बल्कि दो आरोपितों पर निचली अदालत में परीक्षण होगा। यानी सीबीआई द्वारा आरोपितों पर याचिकाकर्ता ठेकेदार नवबहार अली को निविदा प्रक्रिया से बाहर कर ठेकेदार आलोक चौधरी को ठेका दिलाने के लिए लाभ पहुंचाने के आरोप खारिज हो गये हैं।
मामले में उच्च न्यायालय ने माना कि 25 मार्च 2010 को नव बहार अली को उसके नाम पर निविदा निकलने की जानकारी देते हुए उसे निविदा की 50 फीसद धनराशि जमा करने को कहा गया। उसके मना करने पर दूसरे निविदादाता नवीन अग्रवाल से भी निविदा लेने को कहा गया। नवबहार अली इसके बाद तीन अप्रैल को हुई बोर्ड बैठक में भी मौजूद रहा। उसके द्वारा भी मना करने के बाद निविदा की प्रक्रिया नये सिरे से की गयी। मामले में नगर पालिका के तत्कालीन डिस्पैच क्लर्क राजेंद्र जोशी एवं यस कोरियर के एजेंट राजेंद्र शर्मा पर भी भारतीय दंड संहिता की धारा 471 के तहत भी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, बल्कि उनके विरुद्ध केवल धारा 471 के तहत ट्रायल कोर्ट में मामला चलेगा। इस मामले में राजेंद्र जोशी पर केवल इतना आरोप है कि उसने कोई जालसाजी नहीं की, बल्कि उसने (बीच में आत्महत्या करने वाले) पत्रवाहक राजेंद्र मेहरा द्वारा देरी से कोरियर की रसीद लाने पर डाक रजिस्टर में कोरियर के 15 रुपए चढ़ाने में संशोधन किया। वहीं कोरियर एजेंट मनोज शर्मा पर आरोप है कि उसने कोरियर की रसीद में नवबहार अली के हस्ताक्षर खुद कर दिये। इसीलिए उच्च न्यायालय की न्यायमूति रवींद्र मैठाणी की अदालत ने धारा 471 के मामले को ट्रायल कोर्ट में परीक्षण कराने को कहा है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल नगर पालिका के 9 वर्ष पुराने सीबीआई जांच के मामले में आये उच्च न्यायालय का बहुप्रतीक्षित फैसला…

-तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व ठेकेदार के खिलाफ सीबीआई को नहीं मिले अपेक्षित सबूत, मामला खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2019। वर्ष 2010-2011 में नगर पालिका नैनीताल के लेकब्रिज चुंगी मामले में हुई सीबीआई जांच के बहुचर्चित मामले में सीबीआई द्वारा देहरादून की सीबीआई कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट को धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली याचिकाओं पर न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ से बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार एकलपीठ ने याचिकाओं को यह कहते हुए स्वीकार किया है कि सीबीआई ने नगर पालिका नैनीताल के तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी व ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार आलोक चौधरी के खिलाफ जो आरोप लगाये थे, उसके उनके पास अपेक्षित जरूरी साक्ष्य नहीं हैं, जिससे कि यह मामला आगे चल सके। अलबत्ता, नगर पालिका के तत्कालीन डीलिंग क्लर्क एवं कोरियर वाले की जालसाजी में भूमिका के भारतीय दंड संहिता की धारा 471 के तहत तथ्य मिले हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010-11 लेक ब्रिज चुंगी की निविदा प्रक्रिया विवादों में आ गई थी। मामले में चुंगी की निविदा नवबहार के नाम पर 2 करोड़ 10 लाख में हुई थी, लेकिन वह निर्धारित समय के भीतर निविदा की 50 फीसदी राशि जमा करने नही आये। इस कारण नगर पालिका को दुबारा से निविदा निकालनी पड़ी। जबकि नवबहार ने नगर पालिका पर आरोप लगाया था कि निविदा के संबंध में उसे किसी भी प्रकार की सूचना नही दी गयी। बाद में कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सीबीआई जाँच हुई थी। सीबीआई ने जाँच रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी, जिसे नगर पालिका नैनीताल के तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी व ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार आलोक चौधरी ने चुनौती देकर उन पर सीबीआई द्वारा लगाई गई आपराधिक मामलों व शडयंत्र की धाराएं लगाने को गलत बताते हुए कहा था कि सभी निर्णय केवल उनके नहीं, बल्कि नगर पालिका बोर्ड के सर्वानुमति से लिये गये हैं। जो कुछ भी किया गया वह प्रोक्योरमेंट नियमावली के तहत ही किया गया। उनसे किसी प्रकार का धन आदि भी बरामद नहीं हुआ।

करीब 9 वर्ष बाद बेदाग साबित हुए

नैनीताल। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी व तत्कालीन अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी सीबीआई के आरोपों से 9 वर्ष बाद बेदाग साबित हुए हैं। इससे उन्होंने बड़ी राहत की सांस ली है। उल्लेखनीय है कि नैनीताल में सीबीआई के दायरे में आने का पहला मामला था। आरोपों से खासकर मुकेश जोशी का राजनीतिक कॅरियर भी प्रभावित हुआ था। बेदाग साबित होने पर उन्होंने अपनी सभी सुभेच्छुओं का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच से उनकी छवि को जो आघात पहुंचा, उसकी भरपाई नहीं हो सकती है। मामले में न्यायालय का फैसला आने से इन के साथ देश की दूसरे नंबर की ऐतिहासिक नैनीताल नगर पालिका में इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप भी एक तरह से खारिज हुए हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल नगर पालिका की सीबीआई जांच का मामला फिर सतह पर, हाईकोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2019। वर्ष 2010-2011 में नगर पालिका नैनीताल के लेकब्रिज चुंगी मामले में हुई सीबीआई जांच का बहुचर्चित मामला फिर से सतह पर आ गया है। मामले में सीबीआई की चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हर न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने शुक्रवार को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। निर्णय अगले 10 दिन के भीतर सुनाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010-11 लेक ब्रिज चुंगी की निविदा प्रक्रिया विवादों में आ गई थी। मामले में चुंगी की निविदा नवबहार के नाम पर 2 करोड़ 10 लाख में हुई थी, लेकिन वह निर्धारित समय के भीतर निविदा की 50 फीसदी राशि जमा करने नही आये। इस कारण नगर पालिका को दुबारा से निविदा निकालनी पड़ी। जबकि नवबहार ने नगर पालिका पर आरोप लगाया था कि निविदा के संबंध में उसे किसी भी प्रकार की सूचना नही दी गयी। बाद में कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सीबीआई जाँच हुई थी। सीबीआई ने जाँच रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी, जिसे नगर पालिका नैनीताल के तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी व ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार आलोक चौधरी ने चुनौती देकर उन पर सीबीआई द्वारा लगाई गई आपराधिक मामलों व शडयंत्र की धाराएं लगाने को गलत बताते हुए कहा था कि सभी निर्णय केवल उनके नहीं, बल्कि नगर पालिका बोर्ड के सर्वानुमति से लिये गये हैं। जो कुछ भी किया गया वह प्रोक्योरमेंट नियमावली के तहत ही किया गया। उनसे किसी प्रकार का धन आदि भी बरामद नहीं हुआ।

यह भी पढ़ें : सीबीआई जांच के दायरे में आईं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्या व वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री

-उनकी प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति और राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुए नामांकन से संबंधित अधिकारी भी आ सकते हैं जांच के दायरे में
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रामनगर के गोमती पूरन प्रसाद आर्य कन्या इंटर कालेज में विभिन्न पदों के लिए हुई भर्ती की प्रक्रिया में धांधली के आरोपों पर सीबीआई को चार माह के भीतर जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले में दिलचस्प तथ्य यह भी है कि विद्यालय की प्रधानाचार्य हरिप्रिया सती वर्ष 2014 के राष्ट्रपति पुरस्कार से 5 सितंबर 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं, तथा वर्तमान में सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के बाद राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने पर मिलने वाले दो वर्ष के सेवा लाभ के तहत ही पद पर कार्यरत हैं। साथ ही वे 35 वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी वरिष्ठ नेत्री भी हैं। इधर उन्होंने रामनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भी दावेदारी की हुई है।

इधर 31 मई को उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के सीबीआई जांच कराने से संबंधित आदेश पर रोक लगा दी है।

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एडीएम हरबीर सिंह ने संभाला जिला विकास प्राधिकरण सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार

नैनीताल, 9 2018। जनपद के अपर जिलाधिकारी हरबीर सिंह ने शुक्रवार को नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया। वे दिन में प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचे और कामकाज निपटाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के सचिव के रूप में मिले दायित्व का ईमानदारी से निर्वाह किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि श्री सिंह इससे पूर्व जनवरी माह से दो बार इस पद का दायित्व पहले भी संभाल चुके हैं, किंतु तत्कालीन नाटकीय परिस्थितियों में वे इस पद पर कार्य आगे बढ़ा नहीं पाए। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि उनका कार्यकाल ‘निशंक’ होगा।

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