नवीन समाचार, चंपावत, 23 जून 2026 (Leopard Arrived Near Buffalo in Shed)। उत्तराखंड के चंपावत (Champawat) जनपद के लोहाघाट (Lohaghat) के समीपवर्ती गुमदेश क्षेत्र के खिलपिटी-मानाढुंगा (Khilpiti-Manadhunga) गांव में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने ग्रामीणों को हैरानी में डाल दिया। आमतौर पर गांवों में गुलदार (Leopard) के आने की खबर का मतलब दहशत, भगदड़ और पशुओं पर हमले की आशंका माना जाता है, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग थी।
एक गुलदार अचानक एक ग्रामीण की गोठ (पारंपरिक गोशाला) में पहुंच गया और वहां बंधी भैंस के पास ऐसे बैठ गया, मानो किसी पुराने परिचित से मिलने आया हो। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि करीब दो घंटे तक साथ रहने के बावजूद न तो गुलदार ने भैंस को नुकसान पहुंचाया और न ही बाहर खड़े लोगों की ओर कोई आक्रामकता दिखाई। आप यह संबंधित वीडिओ भी जरूर देखना चाहेंगे : रात्रि में गौशाला में घुसा गुलदार, लेकिन जो किया वह बेहद चौंकाने वाला..
प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव निवासी द्वारिका सिंह (Dwarika Singh) की गोठ में यह अनोखी घटना सामने आई। परिवार के सदस्य सुबह पशुओं को चारा-पानी देकर अपने काम में लग गए थे। सब कुछ सामान्य था। शाम ढलने के बाद जब जंगल से लौटकर एक गाय गोठ की ओर पहुंची तो भीतर कुछ हलचल महसूस हुई। अंधेरा बढ़ चुका था। ऐसे में परिवार के लोगों ने टॉर्च की रोशनी अंदर डाली। रोशनी पड़ते ही सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक ओर भैंस शांत खड़ी थी और दूसरी ओर गुलदार आराम से बैठा हुआ था।
भैंस भी शांत, गुलदार भी शांत, गांव वाले हैरान
कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे गांव में फैल गई। लोग घरों से निकलकर गोठ के बाहर जमा होने लगे। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि एक गुलदार भैंस के इतने करीब बैठा है और फिर भी हमला नहीं कर रहा। ग्रामीणों ने पहले इसे अपनी आंखों का भ्रम समझा, लेकिन जब कई लोगों ने टॉर्च की रोशनी में उसे देखा तो पूरा गांव इस अनोखे दृश्य का साक्षी बन गया।
कई ग्रामीणों ने शोर मचाकर गुलदार को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। वह कभी गर्दन घुमाकर लोगों को देखता तो कभी आराम से बैठा रहता। इस दौरान भैंस भी असामान्य रूप से शांत दिखाई दी। यही कारण रहा कि गांव में इस घटना की तुलना पुरानी लोककथाओं और पौराणिक प्रसंगों से की जाने लगी।
दो घंटे तक बना रहा ‘मेहमान’, फिर चुपचाप लौट गया जंगल
ग्रामीणों के अनुसार करीब दो घंटे तक गुलदार गोठ में ही बैठा रहा। लगातार लोगों की आवाजाही और शोरगुल के बाद वह धीरे-धीरे उठा और बिना किसी को नुकसान पहुंचाए जंगल की ओर लौट गया। उसके जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
घटना का वीडियो भी कुछ ग्रामीणों ने अपने चलभाष (Mobile Phone) में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब इंटरनेट माध्यमों पर तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो देखने वाले लोग भी यह देखकर हैरान हैं कि एक हिंसक वन्यजीव इतने लंबे समय तक पालतू पशु के पास शांत कैसे बैठा रहा।
कोई बोला बूढ़ा-बीमार होगा, कोई बोला देवी शक्ति का संकेत
घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि गुलदार बूढ़ा या कमजोर हो सकता है, इसलिए उसने हमला नहीं किया। वहीं कुछ ग्रामीण इसे देवी शक्ति का आशीर्वाद और शुभ संकेत मानकर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वन्यजीव के व्यवहार को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
वन विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह
वन विभाग (Forest Department) ने घटना के बाद लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। वन क्षेत्राधिकारी रमेश चंद्र जोशी (Ramesh Chandra Joshi) ने कहा कि ग्रामीण अकेले जंगल की ओर न जाएं, बच्चों और पालतू पशुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें तथा किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को दें।
उल्लेखनीय है कि बाराकोट (Barakot) विकासखंड के सिमलखेत (Simalkhet) क्षेत्र में 10 जून को गुलदार के हमले की घटना सामने आने के बाद से वन विभाग पहले ही सतर्क है। ऐसे में मानाढुंगा की यह घटना भले बिना किसी नुकसान के समाप्त हो गई हो, लेकिन यह जंगल और आबादी के बीच बढ़ते संपर्क की ओर स्पष्ट संकेत करती है।
एक ओर इस घटना ने ग्रामीणों को आश्चर्यचकित किया, वहीं दूसरी ओर यह भी याद दिलाया कि पहाड़ के गांवों में वन्यजीवों की मौजूदगी अब पहले से कहीं अधिक करीब महसूस की जा रही है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
