(Hatya) 50 रुपये के लिये कर दी गयी 45 वर्षीय व्यक्ति की हत्या…

(Man took Lift in Car-Shot Armyman from Bank Seat) (18-year-Youth Shot dead after Lured in a Park) (Blood-Soaked Body of 14Year-Old Girl Found-Raped) (Suspecting Illicit Relations-Husband Kill FriendRoorkee-Father of BSF Jawan Brutally Murdered (Haldwani-Youth Brutally Killed by Crushing With) Pita ne ki betiyon ki hatya

Hatya

(Bharti Ghotala) दारोगा भर्ती घोटाले में बड़ी खबर, जांच पूरी, विजीलेंस ने शासन को सोंपी रिपोर्ट, निलंबित दारोगाओं के भविष्य पर फैसले की घड़ी करीब !

Tourists Creating Problems

Bharti Ghotala

(Health Problems) हल्द्वानी में 3 क्लीनिक नियम विरुद्ध चलते मिले, प्रशासन ने किये सील…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 जनवरी 2024 (Health Problems)। हल्द्वानी में प्रशासन ने जिलाधिकारी वंदना सिंह के निर्देशों पर रविवार को हल्द्वानी में स्वास्थ्य विभाग के साथ अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों में छापेमारी कर कार्यवाही की।

haldwaniसिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह के नेतृत्व में की गयी इस छापेमारी में टीम ने बनभूलपुरा लाइन नंबर 17 और इंदिरा नगर क्षेत्र में 6 क्लीनिकों के दस्तावेजों की जांच की। इनमें से 3 क्लीनिकों के दस्तावेज नियमानुसार नहीं मिले और कई कमियां पायी गयीं। इस पर संयुक्त टीम ने बंगाली मेडिकोज सहित तीन क्लीनिकों को ‘क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत चालान कर सील कर दिया।

कहा कि अवैध तरीके से क्लीनिक या मेडिकल स्टोर संचालित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसा करने वालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कार्रवाई में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रजत भट्ट, अर्बन हेल्थ ऑफिसर राघवेंद्र रावत, प्राधिकरण से अंकित, औषधि निरीक्षक मीनाक्षी बिष्ट आदि शामिल रहे।

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यह भी पढ़ें : (Health Problems) रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय के आपातकालीन कक्ष में पार्टी ! एसडीएम ने दिये जांच के आदेश…

नवीन समाचार, रामनगर, 13 दिसंबर 2023 (Health Problems)। सरकारी व्यवस्था की व्यवस्थाओं में सुधार के लिये पीपीपी मोड में दिये जाने के बावजूद रामनगर का रामदत्त जोशी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय लगातार गलत कारणों से चर्चाओं में आ रहा है।

(Health Problems) Momo party in Ramnagar hospitalयहां कभी गर्भवती महिला के परिजनों से पैसे मांगने का मामला सामने आता है। कभी कर्मचारी वेतन को लेकर हंगामा करते हैं। कभी बाथरूम में पानी नहीं आता। अब इस चिकित्सालय के इमरजेंसी रूम यानी आपातकालीन कक्ष में मोमो पार्टी (Momo Party in Ramnagar Hospital) किये जाने की बात सामने आई है। कक्ष में पड़ी गंदगी चिकित्सालय में कार्यरत कर्मचारियों और यहां की व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है।

किसी व्यक्ति के द्वारा मोबाइल फोन में कैद की गयी और रामदत्त जोशी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के आपातकालीन कक्ष की बतायी जा रही तस्वीरों में फर्श पर पड़ी मोमो की चटनी और पत्तल दिखायी दे रहे हैं। इससे आपातकालीन कक्ष मरीजों का इलाज का कम बल्कि कर्मचारियों की मौज-मस्ती और पार्टी का स्थान अधिक नजर आ रहा है।

इससे यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों को फैल सकने वाले संक्रमण की संभावना भी जतायी जा रही है। इस मामले में एसडीएम राहुल शाह ने संज्ञान लेते हुए कहा कि वह गंभीर मामला है। उन्होंने इस मामले में तहसीलदार कुलदीप पांडे को निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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यह भी पढ़ें : (Health Problems) चिकन खाने से जीभ कटी, दंत चिकित्सक ने लगा दिये जीभ में टांके, हो गयी मौत…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2023 (Health Problems)। उत्तराखंड के सितारगंज में दांतों के चिकित्सक द्वारा एक युवक की कटी जीभ में टांके लगाने के बाद युवक की मौत होने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उधमसिंह नगर जनपद स्थित सितारगंज के गणेश मंदिर निवासी नितिन कुमार कुशवाहा की चिकन खाने के दौरान जीभ कट गई थी।

इस पर वह अपने पिता के साथ पास के एक दंत चिकित्सक के पास अपनी कटी जीभ दिखाने के लिए चला गया। वहां दंत चिकित्सक ने युवक की कटी जीभ को टांके लगाकर जोड़ दिया। लेकिन बताया गया कि इससे उसका खून बहने लगा। इसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सितारगंज लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक के परिजनों का आरोप है कि दंत चिकित्सक द्वारा जीभ में टांके लगाने के कारण अत्यधिक खून बहने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सितारगंज के चिकित्सक डॉ. रविंद्र ने बताया कि एक व्यक्ति को चिकित्सालय में मृत अवस्था में में लाया गया था। इसकी सूचना सितारगंज पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए खटीमा भेज दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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यह भी पढ़ें : (Health Problems) उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के दो रोगियों में भी दिखे चीन में फैले इन्फ्लूएंजा फ्लू जैसे लक्षण

नवीन समाचार, बागेश्वर, 30 नवंबर 2023 (Health Problems)। चीन में फैले माइक्रो प्लाज्मा, निमोनिया और इन्फ्लूएंजा फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। इधर बागेश्वर जिले में दो बच्चों में इन्फ्लूएंजा फ्लू जैसे लक्षण दिखे हैं। दोनों के नमूने जांच के लिए डॉ.सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी भेजे गए हैं।

जनपद के एसीएमओ डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि बुधवार को जिला अस्पताल में दो बच्चों को लाया गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण की आशंका को देखते हुए दोनों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट चार-पांच दिन में मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि इन्फ्लूएंजा से निपटने के लिए भी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।

इस वायरस जनित बीमारी में पांचवीं स्टेज में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जिला अस्पताल के सभी 68 बेड ऑक्सीजन पाइप लाइन से जुड़े हुए हैं। जिला अस्पताल में 650 एलपीएम के दो ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित हैं। कांडा और कपकोट सीएचसी में भी ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगे हुए हैं। जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल में अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा। उसके बाद ही आईसोलेशन वार्ड बनाने की कार्यवाही की जाएगी।

अल्मोड़ा में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर

चीन में फैले इन्फ्लूएंजा फ्लू और न्यूमोनिया के बाद अल्मोड़ा जिले में स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर है। स्वास्थ्य महकमे के दावा है कि इन्फ्लूएंजा फ्लू से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जरूरत पड़ने पर अलग से आईसीयू वार्ड भी बनाया जाएगा। सीएमओ डॉ. आरसी पंत के अनुसार जिले में इन्फ्लूएंजा फ्लू का कोई मरीज अब तक नहीं आया है। इसके निपटने के लिए हमने पूरी तैयारी कर रखी है। आइसोलेशन बेड, वार्ड, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त है। यदि जरूरत पड़ी तो अलग से आईसीयू वार्ड बनाया जाएगा।

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यह भी पढ़ें : Health Problems : हृदयाघात से 48 वर्षीय विवाहिता की मृत्यु !

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्टूबर 2023 (Health Problems)। हृदयाघात एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन गया है। बुधवार को उपचार हेतु बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लायी गयी एक 48 वर्षीय विवाहिता की मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। खास बात यह भी है कि मृतका को कोई बीमारी नहीं थी। वह कोई भी दवा आदि नहीं लेती थी।

मृतका के परिजनों ने बताया कि 48 वर्षीया विनीता शर्मा पत्नी शंकर शर्मा नगर के तल्लीताल में आर्युवेदिक अस्पताल के पास रहती थी। उसकी अपनी संतान नहीं थी। अलबत्ता वह पति तथा गोद ली हुई 5 वर्षीय बच्ची के साथ रहती थी। सुबह करीब 8-8.30 बजे उसने सीने में दर्द की शिकायत बताई। इस पर परिजन उसे 10.10 बजे जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया और मृत्यु का प्रथमदृष्टया कारण हृदयाघात होना बताया।

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यह भी पढ़ें : Health Problems : छायाकार अमित साह की मृत्यु पर परिजनों-क्षेत्रीय लोगों ने किया स्वास्थ्य सचिव का घेराव, सचिव ने सीएमओ-पीएमएस को किया दून तलब, दिये जांच के आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 सितंबर 2023 (Health Problems)। जिला मुख्यालय नैनीताल में दो दिन सुप्रसिद्ध छायाकार, व्लॉगर व पर्वतारोही अमित साह की हृदयाघात से हुयी मौत के मामले में बुधवार को जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के लिये पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य सहित आर राजेश को असहज स्थिति से गुजरना पड़ा।

स्वर्गीय साह के परिजनों व क्षेत्रीय लोगों-भाजपा कार्यकर्ताओं में इस विषय पर उन्हें घेर दिया। आखिर सचिव ने इस मामले में जनपद की मुख्य चिकित्साधिकारी और चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को देहरादून निदेशालय तलब किया, तब जाकर विरोध कर रहे लोग वापस लौटे।

Health Problems स्वास्थ्य सचिव ने किया बीडी पांडे अस्पताल का निरीक्षणइस मामले में स्वर्गीय साह के परिजनों का कहना था कि वह अमित को सीने में दर्द होने की शिकायत पर सोमवार रात्रि लगभग दो बजे जिला चिकित्सालय लेकर आये। इस दौरान आपातकालीन ड्यूटी में तैनात ईएमओ चिकित्सक ने अमित का ईसीजी कराकर इसकी रिपोर्ट चिकित्सालय के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधांशु को भेजी और डॉ. सुधांशु ने अमित को तत्काल हायर सेंटर भेजने को कहा लेकिन ईएमओ ने कथित तौर पर इसकी जगह रात्रि में या सुबह अमित को हायर सेंटर ले जाने को कहा।

इस कारण परिजन अमित को घर ले गये, लेकिन सुबह 4 बजे यानी 2 घंटे के भीतर ही अमित का असामयिक निधन हो गया। परिजनों का आरोप था कि ईएमओ के ‘अभी या सुबह’ हायर सेंटर ले जाने को कहने की वजह से ही अमित की मौत हुई। इस पर सचिव कुमार ने बताया कि उन्होंने सीएमओ डॉ. भगवती जोशी और पीएमएस डॉ. द्रोपदी गर्ब्याल को देहरादून निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से तलब करने के साथ मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

उन्होंने आश्वस्त किया है कि अगर चिकित्सालय की ओर से की गयी कोई लापरवाही सामने आएगी तो सख्त कार्यवाही की जाएगी। इस पर परिजन मान गये, अलबत्ता उन्होंने सचिव को कार्रवाई के लिए तीन दिनों का समय देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।

इस दौरान डॉ. कुमार ने जिला चिकित्सालय में महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी को देखते हुये जल्द पदों को भरने की बात कही। इस मौके पर स्वास्थ्य निदेशक-कुमाऊं डॉ. तारा आर्य, सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी, पीएमएस डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल, डॉ. एमएस दुग्ताल, डॉ. संजीव खर्कवाल, डॉ. अनिरुद्ध गंगोला व मेट्रन शशिकला पांडे आदि मौजूद रहे।

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यह भी पढ़ें : Health Problems : सरकारी चिकित्सालय में 18 माह के मासूम की मौत….

नवीन समाचार, रामनगर, 17 सितंबर 2023 (Health Problems)। नैनीताल जनपद के रामनगर के सरकारी चिकित्सालय में उल्टी दस्त से बीमार 18 माह के एक बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सालय प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दी है।

Death of a child suffering from vomiting and diarrheaप्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के खत्याड़ी मोहल्ला निवासी मो. रिजवान ने बताया कि उसके 18 माह के पुत्र अब्दुल कादिर को शुक्रवार रात से उल्टी दस्त हो रहे थे। शनिवार सुबह 10.30 बजे वह रामनगर के सरकारी अस्पताल में बेटे को भर्ती करने के लिए गए। अस्पताल प्रशासन कभी उसे आधार कार्ड लाने तो कभी आयुष्मान कार्ड लगाने के लिए इधर-उधर दौड़ाता रहा। दोपहर सवा एक बजे अस्पताल में भर्ती किया और डेढ़ बजे उसके बेटे की मौत हो गई।

उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर बेटे के उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि यदि समय रहते उसके बेटे को उपचार मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मृतक बालक सभासद अजमल का भतीजा था। शाम के समय सभासद गुलाम सादिक सहित परिजनों ने कोतवाली जाकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तहरीर दी।

इधर पीपी मोड पर संचालित चिकित्सालय के प्रबंधक डॉ. प्रतीक सिंह ने बताया कि परिजन साढ़े 12 बजे बच्चे को चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। यहां चिकित्सकों ने उपचार के बाद बच्चे को भर्ती करने के लिए कहा। इसके बाद परिजन बच्चे को भर्ती करने की प्रक्रिया में लग गए।

(Health Problems) इसी बीच बच्चे की मां उसे लेकर घर चली गई। उनका कहना है कि बच्चे की मौत घर पर हुई न कि चिकित्सालय में हुई थी। दूसरी ओर, चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. चंद्रा पंत ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। गंभीर मामला है, इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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यह भी पढ़ें : नैनीताल (Health Problems): पहाड़ चढ़े डेंगू-मलेरिया, जिला चिकित्सालय में भर्ती रोगी में हुई पुष्टि

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2023 (Health Problems)। पर्वतीय क्षेत्रों में मच्छरों से संक्रमित होने वाले मलेरिया व डेंगू जैसे रोगों की संभावना नहीं मानी जाती है, लेकिन देश-प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में इन दिनों चिंता का कारण बने डेंगू व मलेरिया के रोगी पर्वतीय पर्यटन नगरी नैनीताल में भी सामने आये हैं।

जनपद मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित एक रोगी में डेंगू होने की पुष्टि हुई है। जबकि इससे पहले मलेरिया काएक मरीज भी यहां आया था। बताया गया है कि डेंगू का रोगी बाहर से आया है। उसके लिये चिकित्सालय में अलग व्यवस्था की गई है, ताकि वह अन्य लोगों के संपर्क में न आये।

जिला चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल ने बताया कि जिला चिकित्सालय में भर्ती हुए डेंगू के मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री है। यानी वह नगर में डेंगू से संक्रमित नहीं हुआ है, बल्कि बाहर से डेंगू से संक्रमित होकर आया है। वह यहां बुखार की शिकायत पर पहुंचा था, लेकिन जांच में उसे डेंगू होने की पुष्टि हुई है। पीएमएस ने बताया कि मरीज की स्थिति अब उपचार के बाद बेहतर है।

सर्दी-जुकाम व वायरल बुखार के मरीज भी बढ़े
नैनीताल। राज्य के अन्य स्थानों की तरह जिला मुख्यालय में भी इन दिनों सर्दी-जुकाम व वायरल बुखार के काफी मामले आ रहे हैं। जिला चिकित्सालय में भी इनके मरीज काफी बढ़ गए हैं।

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यह भी पढ़ें : नैनीताल (Health Problems) : महिला पर्यटक का अचानक बिगड़ा स्वास्थ्य, और हो गयी संदिग्ध मौत…

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 सितंबर 2023 (Health Problems)। दिल्ली से नैनीताल घूमने आई एक महिला पर्यटक का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया। परिजन उसे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया और प्रथमदृष्टिया मौत का कारण हृदयाघात बताया।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार हौज खास नई दिल्ली निवासी 57 वर्षीय शहनाज सफीक अपने परिवार के साथ नैनीताल घूमने आई हुई थीं। और नगर के एक होटल में परिवार सहित ठहरी थी। शनिवार को होटल में ही महिला का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ने लगा। परिजन होटल कर्मियों की मदद से उन्हें बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गए। लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी।

लिहाजा चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और प्रथमदृष्टिया मौत का कारण हृदयाघात बताया। बाद में महिला उपनिरीक्षक प्रियंका मौर्या ने शव को पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पर्यटक शव लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।

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(Health Problems) अधिवक्ता न्यायालय में जिरह करते-करते अचानक गिर पड़े और हो गई मौत… हर कोई स्तब्ध

(Health Problems) crime news advocate dies after being shot in kanpur bar association  elections sht | Kanpur News: कानपुर बार एसोसिएशन के चुनाव में फायरिंग, गोली  लगने से अधिवक्ता की मौत, जांच में जुटीनवीन समाचार, हरिद्वार 21 फरवरी 2023। (Health Problems) जिला अदालत के परिवार न्यायालय कक्ष में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पारिवारिक वाद की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय यादव अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। साथी अधिवक्ता उन्हें अस्पताल ले जाते, इससे पहले ही उनकी मौत हो गयी। अधिवक्ता की इस तरह हुई मौत से अदालत परिसर में हर कोई स्तब्ध रह गया।  यह भी पढ़ें : नैनीताल में अब दो किमी के सफर के लिए 59 की जगह चुकाने होंगे 70 रुपए

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुभाष नगर ज्वालापुर के रहने वाले अधिवक्ता संजय यादव काफी समय से हरिद्वार के जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रैक्टिस करते थे। सोमवार को भी वे रोज की तरह अदालत पहुंचे और पूरे दिन विभिन्न न्यायालय में जिरह की। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड: पटाखा फैक्टरी में लगी आग, लगातार हुए धमाकों से 4 लोगों की मौत, कई गंभीर घायल…

वहीं अपराह्न में वह परिवार न्यायालय में चल रहे एक वाद में अपने मुवक्किल के पक्ष में तर्क रखने के लिए न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत हुए। इस दौरान ही वह अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। साथी अधिवक्ता तत्काल उन्हें गाड़ी में डाल कर नजदीक के मेट्रो अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें जांच के दौरान मृत घोषित कर दिया।

(Health Problems) माना जा रहा है कि अधिवक्ता की मौत न्यायालय में ही हृदयाघात करने से हुई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 7 मिनट में ही टूटा 7 फेरे लेकर 7 जन्म निभाने का वादा, दूल्हे की फेरे लेने के बाद हृदयाघात से मौत….

रानीखेत में शादी की खुशियां मातम में बदली,फेरे लेने के दौरान दूल्हे की मौत,  हल्द्वानी से आई थी‌ बरात - Prakrit Lokनवीन समाचार, रानीखेत, 11 फरवरी 2023। दूल्हे ने अपनी दुल्हन के साथ सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किया लेकिन किसे पता था कि काल के क्रूर हाथों ने उन्हें कमोबेश सात मिनट ही साथ निभाने का मौका दिया।

(Health Problems) सात फेरों के तत्काल बाद ही दूल्हे को हृदयाघात हो गया और उसकी अस्पताल ले जाते हुए मौत हो गई। इससे शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। दूल्हा मेडिकल के क्षेत्र में ही, एक चिकित्सालय में कार्यरत था। यह भी पढ़ें : शराब कारोबारियों ने यूपीसीएल के खाते से 10.13 करोड़ रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए, सीबीआई ने किया मामला दर्ज…

प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से पिथौरागढ़ निवासी दंत चिकित्सक डॉ. समीर उपाध्याय (30) पुत्र नवीन उपाध्याय वर्तमान में हल्द्वानी के नंदपुर, कठघरिया में रहते हैं। शुक्रवार को रानीखेत के श्रीधरगंज मोहल्ले की रहने वाली युवती के साथ उनके विवाह का कार्यक्रम रानीखेत के शिव मंदिर के बारातघर में चल रहा था। शादी में जश्न का माहौल चल रहा था।

(Health Problems) पुलिअर्घ्य के बाद शादी की रस्में शुरू हुई। बताया जा रहा है कि 3  फेरे ही हुए थे कि डॉ. समीर के सीने में अचानक दर्द उठा। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन दोनों परिवारों के लोग नाच-गाकर खुशियां मना रहे थे। यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल में निकले़ बड़े पियक्कड़, नैनीताल वाले तो सबसे बड़े पियक्कड़..

तभी अचानक दूल्हा बने डॉ. समीर अचेत होकर जमीन पर गिर गये। आनन-फानन में दूल्हे को स्थानीय एसएस श्रीवास्तव हास्पिटल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन हायर सेंटर ले जाते वक्त रास्ते में ही दूल्हे ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने मौत का कारण हृदयाघात बताया है। बताया गया है कि दूल्हा समीर उपाध्याय मैट्रिक्स हास्पिटल में कार्यरत थे।

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इस घटना के बाद शादी का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। किसी को समझ में ही नही आया कि क्या हुआ। दुल्हन की विदाई से पहले ही दूल्हे की मौत हो गयी। इस घटना से पूरे परिवार में शोक की लहर है। आज शुक्रवार को डॉ. समीर का अंतिम संस्कार चित्रशिला घाट रानीबाग में कर दिया गया है। इस घटना को लेकर लोग स्तब्ध रह गए हैं।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों नैनीताल में 42 व 32 वर्षीय दो युवाओं और पिथौरागढ़ में एक 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। जबकि रानीखेत में पहले भी ऐसे ही एक दूल्हे की इसी तरह विवाह समारोह के दौरान मौत हो चुकी है। हृदयाघात से ऐसी तात्कालिक मौतों से लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति भी चिंतित हो रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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भीषण ठंड से नसों में जम रहा खून का थक्का...हार्ट और ब्रेन अटैक से एक ही शहर  में 24 घंटे के भीतर 25 मौतें - Death toll due to heart attack and

नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 4 फरवरी 2023। जिला मुख्यालय में भारतीय सेना में जाने की तैयारी कर रहे, और घर से 4 किलोमीटर दौड़ कर आए एक 18 वर्षीय युवक की मैदान में व्यायाम करते-करते हृदयाघात होने से अचानक गिर कर दुःखद मौत हो गई। ऐसे व्यायाम कर रहे व मात्र 18 वर्षीय युवक की मौत से हर कोई स्तब्ध रह गया है। यह भी पढ़ें : कॉलेज में 6 घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा, कॉलेज की छत पर चढ़ी छात्र संघ अध्यक्ष…

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय के निकटवर्ती, चार किलोमीटर दूर स्थित कासनी गांव निवासी 18 वर्षीय युवक पारस कसन्याल पुत्र मनोज कसन्याल भारतीय सेना में भर्ती की तैयारियों में जुटा हुआ था। वह हर रोज अपने गांव से दौड़ लगाकर नगर के देव सिंह मैदान में पहुंचकर व्यायाम करता था। शुक्रवार की सुबह तड़के लगभग सात बजे वह मैदान में व्यायाम कर रहा था। तभी वह अचानक गिरकर बेहोश हो गया। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में खिली धूप के बीच चार जिलों में मौसम का अलर्ट

उसके गिरते ही मैदान में व्यायाम कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र लुंठी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर व शंकर खड़ायत आदि लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टर अमन आलम ने उसकी हृदय गति वापस लाने के लिए तमाम प्रयास किए और अंततः उसे जांच के बाद मृत घोषित कर दिया, और मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया।

(Health Problems) इस घटना से अस्पताल में मौजूद खिलाड़ियों एवं आम लोगों की आंखें नम हो गईं। परिजन भी तब तक अस्पताल पहुंच गए। गमगीन माहौल में युवक का शव उसके गांव कासनी ले जाया गया। युवक के आकस्मिक निधन पर नगर में शोक का माहौल है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एक विद्यालय में आधे से अधिक बच्चे अचानक बीमार होने से दहशत, एक गंभीर बच्चा दिल्ली ले जाया गया, विद्यालय तीन दिन के लिए बंद…

नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 28 जनवरी 2023। अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय वल्मरा में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चों में अचानक बुखार, खांसी और जुकाम होने से हड़कंप मच गया है। इस कारण विद्यालय को अगले तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया है। साथ ही चिकित्सकों की टीम ने बच्चों का उपचार शुरु कर दिया है।

(Health Problems) इनमें से एक बच्चे को गंभीर स्थिति के कारण उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया है। अचानक फैले संक्रमण से अभिभावकों में दहशत का माहौल है। यह भी पढ़ें : युवक को जंगल में दबोचकर ले गया बाघ, वन कर्मियों के पहुंचने के बावजूद तीन घंटे तक शव को नोंचता रहा, 14 राउंड फायर कर बमुश्किल छुड़ाया शव…

बताया जा रहा है कि राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय वल्मरा में पिछले चार दिन से बच्चे एक-एक कर बुखार, सर्दी और जुकाम की चपेट में आ रहे थे। बच्चों में यह संक्रमण बेहद तेजी से फैल रहा है। विद्यालय में अध्ययनरत कुल 44 में से 22 से 25 बच्चे संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। इनमें सातवीं कक्षा के सर्वाधिक 14 बच्चे शामिल हैं।

(Health Problems) इनमें से ग्राम जनरखाण निवासी एक बच्चे की तबीयत काफी खराब हो गई थी। उसे बच्चे को परिजन उपचार के लिए घाट से भिकियासैंण और फिर दिल्ली ले गए है। यह भी पढ़ें : मिठाई बनाने में प्रयोग हो रहे थे मुर्गी दाना, फिटकरी का घोल, नकली रिफाइंड, रंग और केवड़े की खुशबू ! रुद्रपुर, हल्द्वानी, सितारगंज, अल्मोड़ा की नामी दुकानों में हो रही थी आपूर्ति

विद्यालय के प्रधानाचार्य टीआर टम्टा ने बताया कि संक्रमण बढ़ने की सूचना से उप शिक्षा अधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया। चिकित्सकीय टीम की सलाह पर रविवार को अवकाश के साथ ही सोमवार और मंगलवार को भी विद्यालय बंद करने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को स्थितियां सुधरने पर विद्यालय खोला जाएगा। यह भी पढ़ें : फर्जी डिग्री से बने चार फर्जी चिकित्सक गिरफ्तार

उधर सीएचसी प्रभारी डॉ. एसके विश्वास ने बताया कि बच्चों को बुखार व खांसी के साथ ही गले, हाथ और पैर में दर्द और गले में बलगम की शिकायत है। शनिवार को डॉ रजनीश बेदी, सीएसओ पूजा और दो आशाओं ने बीमार बच्चों का उपचार किया। साथ ही उन्हें दवाएं भी वितरित कीं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में 45 वर्षीय अधेड़ की पार्टी के बाद हृदयाघात से मौत…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 10 जनवरी 2023। सर्दियों में अचानक हृदयाघात की अनेक डराने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी घटनाएं हृदयरोगों के प्रति सचेत करने वाली हैं। अब हल्द्वानी में 45 वर्षीय अधेड़ की पार्टी के बाद हृदयाघात से मौत हो गई है। यह भी पढ़ें : संविदा कर्मचारियों के मानदेय में अप्रैल से बढ़ोत्तरी व KMVN-GMVN के एकीकरण सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी…

बताया गया है कि मृतक का एक पोता भी था। वह बरेली से पोते का जन्मदिन मनाने हल्द्वानी आया था। पार्टी की अगली सुबह उसकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में दो कॉलोनियों की खरीद-फरोख्त पर रोक…

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बरेली गजनेरा निवासी 45 वर्ष बेगराज का बेटा राजकुमार रामपुर रोड मानपुर पश्चिम में रहता है। रामकुमार के बेटे आयुष का रविवार को जन्मदिन था। पोते आयुष का जन्मदिन मनाने उसके 45 वर्षीय दादा बेगराज भी यहां पहुंचे थे। रविवार देर शाम धूमधाम से जन्मदिन की पार्टी हुई। यह भी पढ़ें : कल से नैनीताल जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों के लिए छुट्टी, पर कर्मियों के लिए नहीं…

लेकिन सोमवार को दादा बेगराज अचानक घर के बाहर सड़क पर गश खाकर गिर गए। परिजन उन्हें तत्काल एसटीएच ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस भी एसटीएच पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मेडिकल चौकी प्रभारी हरि राम ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया हृदयाघात से मौत हुई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल में रहने-पढ़़ने वाले 12 वर्षीय बच्चे की अल्मोड़ा में डायरिया से मौत

Diarrhea outbreak in Panchkula 9-year-old child dies more than 300 sick -  हरियाणा: पंचकूला में डायरिया का प्रकोप, 9 साल के बच्चे की मौत, 300 से अधिक  बीमारनवीन समाचार, अल्मोड़ा, 6 जनवरी 2023। अल्मोड़ा जनपद के एक गांव निवासी नैनीताल में निवासरत 12 वर्षीय बच्चे की डिहाइड्रेशन-डायरिया की वजह से मौत का दुःखद समाचार है। बताया गया है कि वह तीन दिन से डिहाइड्रेशन से पीड़ित था। गुरुवार को परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह भी पढ़ें : 11 वर्ष की बच्ची के घर से भागने पर पुलिस के हाथ पांव फूले, वजह चिंताजनक…

प्राप्त जानकारी के अनुसार अल्मोड़ा जनपद के हवालबाग विकासखंड के ज्यूड़ निवासी 12 वर्षीय दीपक तिवारी के पिता दिनेश चंद्र तिवारी नैनीताल के एक विद्यालय में कार्यरत हैं जबकि उसकी मां शिक्षिका है। दीपक अपने पिता के साथ नैनीताल में ही रहता था और वहीं पढ़ता था। इधर शीतकालीन छुट्टियां होने पर इन दिनों वह गांव पिता के साथ गांव आया था। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के बनभूलपुरा मामले में आया सर्वोच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश…

इधर, गांव आने के बाद पिछले कुछ दिनों से उसका स्वास्थ्य खराब चल रहा था। उसे तीन दिन से लगातार उल्टियां हो रही थीं। इस कारण उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। गुरुवार को परिजन उपचार के लिए दीपक को जिला अस्पताल ला रहे थे।

(Health Problems) बताया जा रहा है कि रास्ते में भी किशोर को उल्टी हुई। इससे उसकी हालत और बिगड़ गई। परिजन जब तक उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। यह भी पढ़ें : स्पा सेंटर में बड़े स्तर पर चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़, दो महिला संचालकों सहित 11 महिलाओं सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार

दीपक की मौत से परिजन टूट गए हैं। माता और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे की मौत से ज्यूड़ गांव में भी शोक छा गया। दीपक की मौत से उसके साथी भी सदमे में है। जिला अस्पताल, अल्मोड़ा की प्रभारी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुसुमलता ने बताया कि किशोर डिहाइड्रेशन से पीड़ित था।

(Health Problems) परिजनों ने बताया कि उसे उल्टी हो रही थी। लगातार उल्टी होने से उसकी हालत बिगड़ती गई। परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : निजी चिकित्सालय में फिल्म गब्बर जैसी शर्मनाक हरकत, 7 माह के मृत बच्चे को गंभीर बताते हुए थमा दिया सवा दो लाख का बिल…

Besthospitalrudrapur | Krishan Hospital & Critical Care Center | Rudrapurनवीन समाचार, रुद्रपुर, 3 जनवरी 2023। शहर के एक निजी चिकित्सालय में फिल्म गब्बर जैसी शर्मनाक हरकत किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया गया है कि कृष्ण हास्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर नाम के निजी अस्पताल में 25 मई 2022 को एक सात माह के बच्चे को भर्ती किया गया।

(Health Problems) बच्चे की मौत 26 मई को हो गई, लेकिन अस्पताल के चिकित्सक डा. पारस अग्रवाल ने 27 मई की सुबह बच्चे के पिता राहुल को बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए सवा दो लाख रुपये का बिल थमा कर रेफर कर दिया। इस पर परिजन उसे लेकर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे, जहां जांच कर पता चला कि बच्चे की मौत एक दिन पहले ही हो चुकी है। यह भी पढ़ें : नैनीताल : एक भगवा झंडा लगने पर शुरू हुई राजनीति, और बढ़ा आरोप-प्रत्यारोपों का दौर…

इस मामले में राहुल ने स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और मानवाधिकार आयोग को सितंबर में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने सोमवार को जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। उन्होंने बताया कि सभी आरोप सही पाए गए हैं। यह भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण ध्वस्तीकरण का मामला, घर बचाने को हर जुगत की जाने लगी

जांच रिपोर्ट में यह भी आया है कि कृष्ण हास्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर के चिकित्सक डा. पारस अग्रवाल एमबीबीएस हैं और आर्ची संस्थान से डीसीएच की उपाधि प्राप्त की है, जो कि भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड देहरादून की ओर से बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

(Health Problems) ऐसे में अत्यंत गंभीर मरीज को बिना समय गंवाए किसी उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाना चाहिए था। इससे समय पर बच्चे को उचित उपचार मिलता और उसकी जान बचाई जा सकती थी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : आस-पड़ोस के 8 बच्चों को अचानक होने लगे उल्टी-दस्त, एसटीएच में भर्ती, जेट्रोफा का फल खाने से बिगड़ी हालत

doctors would come from sth n women hospital in haldwani - महिला अस्पताल  में एसटीएच से डॉक्टर आएंगेनवीन समाचार, लालकुआं, 27 नवंबर 2022। शनिवार को नैनीताल जनपद के लालकुआं थानांतर्गत बिंदुखत्ता के इंदिरानगर द्वितीय गांव में आठ बच्चों को उल्टी दस्त होने से हड़कंप मच गया। पता चला कि उन्होंने जैव ईंधन बनाने के लिए प्रसिद्ध जंगली फल जेट्रोफा यानी रतनजोत खा लिया था। इससे वह बीमार पड़ गए थे। उन्हें गंभीर हालत में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती किया गया है। बताया गया है कि उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार है। यह भी पढ़ें : नैनीताल: पेड़ पर लटका मिला 34 वर्षय व्यक्ति का शव

प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार की शाम को बिंदुखत्ता गौलागेट स्थित स्कूल से इंदिरानगर द्वितीय में रहने वाले पूरन सिंह थुवाल, दिनेश थुवाल और भगत सिंह राठौर के बच्चे घर लौट रहे थे। इसी दौरान वे अनजाने में गौला नदी के किनारे झाड़ियों की तरफ चले गए और वहां लगे जेट्रोफा के फलों को खा लिया। फल खाते ही बच्चों को उल्टियां होने लगीं।

(Health Problems) किसी तरह वह अपने घर पहुंचे। बच्चों को बीमार हाल में देखकर उनके परिजनों में हड़कंप मच गया। यह भी पढ़ें : पिता ने किये रिश्ते तार-तार, 27 वर्षीय पुत्र को कुल्हाड़ी से गला काटकर मार डाला…

उन्होंने बच्चों से उनकी हाल के बारे में पूछा तो घटना का पता चला। इस पर परिजनों ने 12 वर्षीय चेतन थुवाल, 10 वर्षीय विकास कुमार, 5 वर्षीय चंदू थुवाल, 8 वर्षय नेहा थुवाल, 7 वर्षीय कमल, 6 वर्षीय सौरभ थुवाल, 6 वर्षीय हर्षित राठौर और 8 वर्षीय जानकी राठौर को हालत बिगड़ती देख तत्काल आपातकालीन एंबुलेंस 108 की मदद से हल्द्वानी के सुशीला तिवारी चिकित्सालय में भर्ती कराया। यह भी पढ़ें : रिश्तेदारी में आये 19 वर्षीय युवक की मौत…

इधर, बच्चों के जहरीले फल खाने की सूचना पर उच्चाधिकारियों ने हल्दूचौड़ चौकी प्रभारी कृपाल सिंह को मौके पर भेजा। चौकी प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर जानकार ली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लालकुआं के चिकित्सा अधिकारी डॉ. लव पांडे ने कहा कि जेट्रोफा में जहरीले तत्व पाए जाते हैं।

(Health Problems) छोटे बच्चे अगर इसे खा लें तो उन्हें उल्टी, पेट दर्द व दस्त लगने लगती है, अधिक सेवन प्राण घातक भी हो सकता है। ऐसे में बच्चों को तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इसके बारे में जानकारी फैलाना जरूरी है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : चिंताजनक (Health Problems) : 46 वर्षीय शिक्षक कक्षा में पढ़ाते-पढ़ाते गिर पड़े, हुई हृदयाघात से मौत….

Bihar high school teachers training and exam 70 percent marks are  compulsory diksha app primary teachers online training - बिहार में अब  शिक्षकों की ट्रेनिंग और इम्तिहान, इस परीक्षा में लाने हीनवीन समाचार, पिथौरागढ़, 4 नवंबर 2022 (Health Problems) । हृदयाघात बड़ी समस्या बन गई है। अब पिथौरागढ़ के राजकीय प्राथमिक विद्यालय अनरगांव में कक्षा में बच्चों को पढ़ाते समय 46 वर्षीय शिक्षक प्रताप सिंह बिष्ट की हृदय गति रुक जाने से मौत होने का दुःखद समाचार है। घटना से शिक्षक के परिजनों के साथ ही पूरे क्षेत्र में शोक है। साथ ही कम उम्र में हृदयाघात से मौत से आम लोगों में भी चिंता व्याप्त हो गई है। यह भी पढ़ें : 24 घंटे से पहले हल्द्वानी के कारोबारी पर गोली चलाने वालों के साथ पुलिस की मुठभेड़, एक बदमाश को गोली लगी

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय अनरगांव में इसी गांव के रहने वाले एकमात्र शिक्षक प्रताप सिंह पुत्र रतन सिंह बिष्ट तैनात थे। बृहस्पतिवार को वह कक्षा में बच्चों को पढ़ा रहे थे, तभी पढ़ाते-पढ़ाते समय अचानक वह जमीन पर गिर गए और अचेत हो गए। यह भी पढ़ें : गजब: पति की मौत के बाद लाचारी में बैंक खाता बंद करने पहुंची मजदूरी करने को मजबूर महिला, बैंक ने थमा दिया 2 लाख का चेक

(Health Problems) बच्चों ने अभिभावकों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अभिभावक और ग्रामीण बेहोशी की हालत में शिक्षक को इलाज के लिए सीएचसी गंगोलीहाट ले गए जहां चिकित्सकों ने देखने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने बेरीनाग में तैनात डॉ. सिद्धार्थ पाटनी को सीएचसी गंगोलीहाट बुलाया। डॉ. पाटनी ने अध्यापक का पोस्टमार्टम किया।

(Health Problems) चिकित्सक के अनुसार अध्यापक की मृत्यु हृदय गति रुकने के कारण हुई है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में दिन दहाड़े बड़ी वारदात, पुलिस कर्मी की पत्नी की घर में घुसकर हत्या

(Health Problems) स्वर्गीय प्रताप सिंह अपने पीछे पत्नी, माता और तीन बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा हल्द्वानी में बीएससी कर रहा है जबकि दो बेटियों में से एक अल्मोड़ा सें बीए और दूसरी बेटी गांव के पास चौरपाल इंटर कॉलेज में पढ़ रही है। यह भी पढ़ें : नैनीताल में पिछले दिनों हुई बाइक, टीवी, मंगलसूत्र, लैपटॉप आदि की चोरियों का खुलासा

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सुगम क्षेत्रों के विद्यालयों में तो पर्याप्त शिक्षक हैं, लेकिन दुर्गम श्रेणी के दूरस्थ के विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। जिले के 1024 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक सहित कुल 1235 विद्यालयों में से 450 विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे चल रहे है। ऐसे विद्यालयों में एकमात्र शिक्षक के किसी भी कारण से अवकाश पर जाने की स्थिति में स्कूल में ताला लगने की नौबत आ जाती है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल (Health Problems) : घायल को 108 एंबुलेंस के लिए करना पड़ा करीब डेढ़ घंटे का इंतजार

उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों का कार्यबहिष्कार, थम गए 234  गाड़ियों के पहिए - 108 ambulance service employees strike in uttarakhand  atrc - AajTakनवीन समाचार, नैनीताल, 30 अक्तूबर 2022 (Health Problems) । नगर के हिमालय दर्शन क्षेत्र में बीती रात्रि नीरज नाम का एक युवक घायल अवस्था में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां चिकित्सकों ने घायल का प्राथमिक उपचार करने के बाद हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन हायर सेंटर जाने के लिए घायल को घंटों तक एंबुलेंस नहीं मिली। इस कारण घायल एवं उसके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड-बड़ा समाचार : कूड़ा बीनने वाली निकली विदेशी आतंकी की पत्नी

(Health Problems) घायल के परिजनों ने बताया कि उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा को फोन कर एंबुलेंस बुलाई लेकिन एंबुलेंस कर्मियों ने 2 घंटे बाद आने का समय बताया। तब तक घायल अस्पताल में ही तड़पता रहा। करीब डेढ़ घंटे बाद भीमताल से 108 एंबुलेंस नैनीताल पहुंची और घायल को हल्द्वानी हायर सेंटर ले जाया गया। यह भी पढ़ें : अचानक शव मिलने से सनसनी

(Health Problems) अलबत्ता, इस मामले में जिला चिकित्सालय के ईएमओ डॉ. हाशिम अंसारी ने बताया कि युवक संभवतया नशे में करीब 10 फिट की सीढ़ियों से गिर गया था। जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति खतरे से बाहर थी।

(Health Problems) अलबत्ता, सिर में चोट लगी होने की आशंका से उसे हल्द्वानी रेफर किया गया। इस दौरान नैनीताल की एंबुलेंस एक अन्य मरीज को लेकर गई थी, इसलिए उसके लिए भीमताल से करीब डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस आई। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी तक पहुंचा अफ्रीकन स्वाइन फ्लू, 8 सुअरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, हड़कंप

African Swine Fever: मिजोरम में 87 सूअरों की मौत, स्वाइन फीवर की आशंका से  फैली घबराहट - African Swine Fever 87 pigs die in Mizoram village near  Bangladesh borderनवीन समाचार, हल्द्वानी, 7 अगस्त 2022 (Health Problems) । कोरोना के साथ लगातार नई-नई संक्रामक बीमारियां मानव जीवन पर नया खतरा बनकर उभर रही हैं। पहले से ही जताई जा रही आशंकाओं के बीच अफ्रीकन स्वाइन फ्लू हल्द्वानी तक पहुंच गया है। यहां राजपुरा क्षेत्र में भी 8 सुअरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है।

(Health Problems) जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि राजपुरा और जवाहर नगर क्षेत्र से सुअरों की ब्लड रिपोर्ट टेस्ट के लिए भेजा था। जिसमें इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन सुअरों को जिला प्रशासन की अनुमति के बाद मारने की कार्रवाई की गई है।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने विभागीय अधिकारियों को भी मामले को गंभीरता से लेने के आदेश दिए हैं। अग्रिम आदेशों तक सुअर का मांस प्रतिबंधित कर दिया गया है और बीमारी की रोकथाम के लिए संक्रमित इलाकों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है।

(Health Problems) अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक और खतरनाक पशु रोग है, जो घरेलू और जंगली सुअरों को संक्रमित करता है। इसके संक्रमण से सुअर एक प्रकार के तीव्र रक्तस्रावी बुखार से पीड़ित होते हैं। इस बीमारी को पहली बार 1920 के दशक में अफ्रीका में देखा गया था। इस रोग में मृत्यु दर 100 प्रतिशत के करीब होती है और इस बुखार का अभी तक कोई इलाज नहीं है।

(Health Problems) इसके संक्रमण को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका जानवरों को मारना है। वहीं, जो लोग इस बीमारी से ग्रसित सुअरों के मांस का सेवन करते हैं उनमें तेज बुखार, अवसाद सहित कई गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी-काठगोदाम के तीन क्षेत्रों में ‘अफ्रीकन स्वाईन फीवर’ रोग की पुष्टि, ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 जुलाई 2022 (Health Problems) । शहर में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है और चिंता को बढ़ा दिया है। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया है कि हल्द्वानी के जवाहर नगर, नई बस्ती और काठगोदाम में सूअर पशुओं में ‘अफ्रीकन स्वाईन फीवर’ रोग की पुष्टि हुई है।

(Health Problems) इस बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए तीनों जगहों को तीन भागों में बांटा गया है। पूरे क्षेत्र की 1 किमी की परिधि को आगामी दो माह अथवा क्षेत्र में रोग के प्रकोप की सूचना शून्य होने तक सर्विलांस जोन यानी ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित किया गया है। इस जोन में सूअर के मांस व सूअर के मांस की दुकानों, सूअर के आवागमन को पूर्णतया प्रतिबिन्धत कर दिया गया है।

(Health Problems) मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संक्रमित वार्डों एवं स्थानों में प्रभावी कार्रवाई करने, दवा युक्त धंुवा छोड़ने व सूअरों को मारने व उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने तथा प्रत्येक 15 दिनों के अन्तराल में इन क्षेत्रों से सूअरों के प्राप्त नमूने जांच के लिए आईसीएआर निसाद प्रयोगशाला भोपाल भेजने के निर्देश दिए हैं।

(Health Problems) इस क्षेत्र में कोई भी सूअर पशु अन्य क्षेत्रों में नही भेजा जाएगा और न ही लाया जाएगा। इस क्षेत्र से बाहर के जनपद के अन्य क्षेत्रों को बीमारी मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : जिला चिकित्सालय सहित पांच चिकित्सालय जाने के बाद भी नही बची प्रसूता की जान

Maternity Life Did Not Survive Even After Going To Five Hospitals - पांच  अस्पताल जाने के बाद भी नहीं बची प्रसूता की जान - Champawat Newsनवीन समाचार, चंपावत, 31 जुलाई 2022 (Health Problems) । इसे चिकित्सालयों की लापरवाही कहें, स्वयं जनता की बुरी किस्मत या कि व्यवस्था की बड़ी खामी, मुख्यमंत्री के गृह जनपद में जिला चिकित्सालय सहित पांच चिकित्सालय जाने के बाद भी एक प्रसूता की जान चली गई। कहने को तो कहा जा रहा है कि जिला चिकित्सालय में संध्या नाम की प्रसूता का ऑपरेशन से सुरक्षित प्रसव कराया गया,

(Health Problems) और तीन दिन तक चिकित्सालय में उसकी पूरी देखभाल भी की गई। लेकिन चिकित्सालय दोबारा आने के बाद एकाएक उसकी तबीयत बिगड़ गई। इस पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया और उसकी मौत हो गई।

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार चंपावत के बाजरीकोट निवासी 24 वर्षीय संध्या पत्नी दीपक ने गत 19 जुलाई को जिला अस्पताल में ऑपरेशन से शिशु को जन्म दिया। 21 जुलाई को जच्चा-बच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

(Health Problems) संध्या के चाचा हरीश कुमार ने बताया कि उनकी भतीजी को 23 जुलाई से लगातार बुखार रहा। दवा से राहत नहीं मिलने और तबीयत बिगड़ने पर 27 जुलाई को संध्या को फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन एक दिन बाद 28 जुलाई को यहां से हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

(Health Problems) हल्द्वानी ले जाने से पहले उसे एक निजी अस्पताल में भी दिखाया। परीक्षण के बाद निजी अस्पताल ने संक्रमण फैलने की दलील देते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी। इस पर उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल और वहां से भी जवाब देने के बाद वे 29 जुलाई को बरेली के भोजीपुरा स्थित मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां डॉक्टरों ने संक्रमण फैलने से शरीर के अधिकांश अंगों के काम नहीं करने की जानकारी दी, और इसी दिन शाम को इसी अस्पताल में संध्या ने दम तोड़ दिया।

(Health Problems) इस पर परिजनों ने जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि प्रसव के दौरान लापरवाही और बाद में रेफर करने में की गई देरी की वजह से संध्या की जान गई है। इस मामले की सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएम और सीएमओ से शिकायत कर जांच की मांग की है। इस पर जिला चिकित्सालय के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने अस्पताल की लापरवाही से पूरी तरह से इंकार किया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : उत्तराखंड में मरीजों को बरगला रहे 41 चिकित्सकों पर कार्रवाई की तलवार

Uttarakhand Medical Council Online Registration / Renewal | www.statusin.inनवीन समाचार, देहरादून, 7 जुलाई 2022 (Health Problems) । उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने विज्ञापनों में झूठे दावे करने वाले उत्तराखंड के 41 डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है। उन्हें चेताया है कि इसके बाद भी वह न माने तो उन पर कार्रवाई की जा सकती है। बताया गया है कि प्रोफेशनल कंडक्ट, एटीक्यूट एंड एथिक्स रेगुलेशन 2002 यानी पेशेवर आचरण, रवैया एवं नैतिकता नियमन अधिनियम 2002 के तहत कोई भी चिकित्सक न तो अपनी तस्वीर किसी विज्ञापन में प्रकाशित करा सकता है और न ही कोई बरगलाने वाला दावा कर सकता है।

(Health Problems) लेकिन कई चिकित्सक किसी एक विषय के ही विशेषज्ञ होने के बावजूद अपने विज्ञापन में कई-कई दावे कर रहे हैं, और कई अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अपनी बड़ी तस्वीरों के साथ विज्ञापन प्रकाशित, प्रसारित करा रहे हैं। मेडिकल काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के सदस्य सचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि वह लगातार इन विज्ञापनों की निगरानी करते हैं। सितंबर से यह प्रक्रिया चल रही है।

(Health Problems) विज्ञापन में अपनी तस्वीर प्रकाशित कर रहे, या मरीजों को गुमराह करने वाले विज्ञापन प्रकाशित कर रहे 41 चिकित्सकों को रेगुलशन के नोटिस जारी किये जा चुके है। जबकि कई अन्य भी इस जद में हैं। चिकित्सकों को नियमों के प्रति सजग रहने को भी कहा गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : पीएमएस हुए सेवानिवृत्त, हृदयरोग विशेषज्ञ विहीन हुआ प्रदेश, पुनेरा को कार्यभार

world heart day: take care of your heart - हृदय रोग: लक्षण, कारण, टाइप और  परहेज - Navbharat Times Photogallery

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2022 (Health Problems) । मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पीएमएस यानी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद पिछले एक माह से संभाल रहे डॉ. केबी जोशी गुरुवार को अधिवर्षता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति पर उन्हें जिला चिकित्सालय में अन्य सेवानिवृत्त हो रहे प्रभारी फार्मेसी अधिकारी डीके जोशी के साथ विदाई दी गई।

(Health Problems) इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. जोशी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि वह प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद जिला चिकित्सालय ही नहीं पूरा प्रदेश हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया है।

(Health Problems) उनकी सेवानिवृत्ति के उपरांत शासन ने पूर्व में महिला चिकित्सालय के एमएस यानी चिकित्सा अधीक्षक रहे व चिकित्सालय के वरिष्ठतम चिकित्सक डॉ. वीके पुनेरा को जिला चिकित्सालय का नया प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त किया है। वह शुक्रवार से कार्यभार ग्रहण करेंगे। बताया गया है कि डॉ. पुनेरा का करीब 3 वर्ष का कार्यकाल शेष है।

(Health Problems) सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई कार्यक्रम में जनपद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भागीरथी जोशी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण टम्टा, सेवानिवृत्त पीएमएस डॉ. केएस धामी, डॉ. एमएस दुग्ताल, डॉ.संजीव खर्कवाल, डॉ. मोनिका कांडपाल, डॉ.वीके मिश्रा, डॉ.अनिरुद्ध गंगोला, डॉ.प्रियांशु श्रीवास्तव, डॉ.ममता पांग्ती व डॉ.पंकज वर्मा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सा कर्मी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

नैनीताल (Health Problems) : आगामी 30 से जिला चिकित्सालय के साथ पूरा प्रदेश हो जाएगा हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2022 (Health Problems) । मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केबी जोशी इस पद पर एक माह कार्यरत रहने के बाद इस 30 जून को सेवानिवृत हो रहे हैं। वह यहां मूलतः हृदय रोग विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह प्रदेश के समस्त राजकीय चिकित्सालयों में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ थे।

(Health Problems) इस प्रकार कहा जा रहा है कि उनकी सेवानिवृत्ति से जहां हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद रिक्त हो जाएगा, वहीं प्रदेश भर के सरकारी चिकित्सालयों में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं रह जाएगा, यानी राज्य के सरकारी चिकित्सालय हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन हो जाएंगे।

(Health Problems) बताया गया है कि पूरे प्रदेश एवं पूरे स्वास्थ्य विभाग में वर्तमान में केवल एक ही हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ केबी जोशी हैं, जिनको दो वर्ष पूर्व नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में तैनाती दी गई थी। इधर 31 मई को तत्कालीन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस धामी के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें इस पद पर भी तैनाती दी गई थी।

(Health Problems) डॉ. केबी जोशी का कहना है कि कार्डियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ बनने के लिए एमबीबीएस के बाद एमडी और फिर डॉक्टरेट इन मेडिशन की पढ़ाई करनी पड़ती है। लेकिन प्रदेश के मेडिकल कालेजों में एमडी की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण मेडिकल छात्र कार्डियोलॉजी की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं।

(Health Problems) वहीं उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. शैलेजा भट्ट ने बताया कि निदेशालय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के प्रयास किये जा रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सको को सेवानिवृत होने के बाद भी सेवाकाल में विस्तार करने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। सेवाकाल विस्तार के लिए डॉ. जोशी से बात की जा रही है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी : निजी चिकित्सालय में दिखाने के बाद चार बच्चों की हालत बिगड़ी, एक की मौत

one child dead and three infected by food poisoning in kaushambi up | फूड  प्वाइजनिंग से मासूम की मौत, परिवार के ही तीन अन्य बच्चों की हालत गंभीर |  Patrika Newsनवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 मई 2022 (Health Problems) । जनपद के लालकुआं के आसपास के क्षेत्रों में बच्चों में खांसी, सर्दी-जुकाम निमोनिया जैसी स्थिति में तीन परिवारों के चार बच्चों को हल्द्वानी के डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय (एसटीएच) में पिछले तीन दिनों में भर्ती कराया गया है।

(Health Problems) इनमें से दो साल के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जबकि एक अन्य बच्चे की हालत भी गंभीर बनी हुई है। जबकि दो बच्चों के स्वास्थ्य में उपचार के बाद सुधार आया है। बताया जा रहा है कि बच्चों को निजी अस्पताल में दिखाया गया था। वहां खांसी की दवा पीने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ी।

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार बिंदुखत्ता निवासी आठ माह के आरव और दो वर्ष के लक्ष्य नैनवाल के अलावा मोटाहल्दू निवासी 11 माह के जुड़वा भाई हिमांशु व हर्ष को बेहद गंभीर स्थिति में एसटीएच में भर्ती कराया गया था। यहां लक्ष्य नैनवाल की उपचार के दौरान शनिवार को मौत हो गई।

(Health Problems) चिकित्सकों ने बताया कि जब उसे अस्पताल लाया गया तब उसकी हालत बहुत गंभीर थी। उसके दोनों फेफड़ों में संक्रमण था। शरीर का रंग नीला पड़ गया था। उसे वेंटिलेटर पर भर्ती करना पड़ा। निमोनिया इतना बिगड़ चुका था कि उसको सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी।

(Health Problems) अन्य बच्चों को भी बुखार, जुकाम, खांसी जैसी शिकायत होने के बाद किसी निजी क्लीनिक में दिखाने के बाद खांसी की दवा दिलाने की बात बताई गई है। जिसके बाद बच्चों का स्वास्थ्य अधिक बिगड़ गया। बेहोशी होने, सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर लक्षण होने पर चारों बच्चों को एसटीएच के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर पर रखा गया था।

(Health Problems) बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. ऋतु रखोलिया ने बताया कि बच्चे को बार-बार बेहोशी के दौरे पड़ रहे थे। उनका कहना था कि खांसी, जुकाम की दवा से बच्चे इतनी गंभीर अवस्था में नहीं जा सकते। बच्चों के परिजनों ने फिलहाल दवा का कोई पर्चा उन्हें नहीं दिखाया है।

(Health Problems) सीएमओ नैनीताल डा. भागीरथी जोशी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मामले की जांच कराई जाएगी ओर लापरवाही सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई-सजा का ऐलान…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 मार्च 2022 (Health Problems) । अब तक लगातार नकारने के बाद राजकीय मेडिकल कालेज प्रशासन ने शनिवार को मान लिया है कि रैगिंग हुई थी, और दूसरी बार एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक कर 121 सीनियर छात्रों पर सामूहिक तौर पर कार्रवाई करते हुए सभी छात्रों पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगा दिया है।

Video Of Alleged Ragging In Haldwani Medical College Goes Viral. उत्तराखंड: मेडिकल  कॉलेज में रैगिंग, 27 छात्रों के सिर मुंडवाए गए…वायरल हुआ वीडियो. Haldwani  Medical College Ragging Videos ...(Health Problems) शनिवार को राजकीय मेडिकल हल्द्वानी के प्राचार्य कार्यालय में एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में हाई कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी के सभी सदस्यों ने माना कि जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग व दुर्व्यवहार हुई है। हालंाकि रैगिंग करने वालों की पहचान नहीं हो सकी।

(Health Problems) इस आधार पर कमेटी ने सामूहिक रूप से हास्टल संख्या दो में रहने वाले करीब 121 छात्रों पर पांच हजार रुपये अर्थदंड लगा दिया। यह धनराशि चार अप्रैल तक जमा करनी होगी। अर्थदंड जमा नहीं करने वाले छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया जाएगा, तथा कक्षाओं से भी वंचित किया जाएगा।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि राजकीय मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में प्रथम वर्ष के प्रवेश के बाद चार मार्च को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें 27 छात्र सिर मुड़वाए हुए हास्टल से कक्षा में जाते समय सिर नीचे किए हुए और हाथ पीछे बांधे हुए चल रहे थे। सात मार्च कोएंटी रैगिंग कमेटी की पहली बैठक में पता चला कि 43 छात्रों ने सिर मुड़वाए थे।

(Health Problems) लेकिन अधिकांश छात्रों ने रैगिंग की शिकायत नहीं की थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने नौ मार्च को जनहित याचिका की सुनवाई में कमिश्नर व डीआइजी को जांच के निर्देश दिए थे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : महिला विधायक प्रत्याशी के गांव में महिला ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म

नवीन समाचार, भवाली, 20 जनवरी 2022 (Health Problems) । नैनीताल से भाजपा की प्रत्याशी व पूर्व विधायक सरिता आर्य के गांव भूमियाधार में दो घंटे तक इंतजार के बावजूद 108 आपातकालीन एंबुलेंस के नहीं आने से गुरुवार को एक महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से महिला को भवाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से दोनों जच्चा-बच्चा को हल्द्वानी रेफर कर दिया गया।

(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार मल्ला भूमियाधार निवासी निर्मला आर्य पत्नी मनोज आर्य ने सुबह नौ बजे 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन 10 बजे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिवार और स्थानीय महिलाएं प्रसूता को सड़क तक लाई और 108 एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। जब दो घंटे बाद प्रसूता को काफी पीड़ा होने लगी और उसने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।

(Health Problems) इसके बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को हल्द्वानी रेफर किया। उम्मीद करनी होगी कि आगे इन स्थितियों में सुधार आएगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : जवाहर नवोदय विद्यालय में सैकड़ों छात्र सर्दी-जुकाम व पांच दर्जन वायरल की चपेट में

Jawahar Navodaya Vidyalaya, Dhungir, Purola: Admission, Fee, Affiliationनवीन समाचार, पुरोला, 28 नवंबर 2021 (Health Problems) । पुरोला के जवाहर नवोदय विद्यालय धुनगिर में वायरल बुखार से स्थिति गंभीर हो गई है। यहां कक्षा छह से लेकर 12वीं तक के सैकड़ों छात्र खांसी-जुकाम की चपेट में और इनमें से करीब पांच दर्जन से अधिक बच्चे वायरल की चपेट में बताए गए हैं।

(Health Problems) रविवार को पुरोला सीएचसी में इनमें से एक दर्जन से अधिक बच्चों का रैपिड एंटीजन व आरटीपीसीआर टेस्ट किया गया। इससे पूर्व भी विद्यालय के 35 बच्चों का आरटीपीसीआर टेस्ट किया गया था, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

(Health Problems) रविवार को विद्यालय की जीएनएम मीनाक्षी ने 14 छात्रों का यहां सीएचसी में रैपिड व आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया। रैपिड टेस्ट में सभी छात्रो की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में करीब 60 छात्र वायरल से पीड़ित है, जिनका उपचार किया जा रहा है। इनके अलावा विद्यालय में खांसी से सैकड़ों छात्र पीड़ित हैं।

(Health Problems) विद्यालय के प्राचार्य प्रमोद रावत ने बताया कि पूर्व में वायरल से पीड़ित 35 बच्चों का कोरोना टेस्ट किया गया था। वर्तमान की उनको जानकारी नहीं है। वह अवकाश पर चल रहे है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Health Problems) : कोरोना के उपचार में 17 लाख खर्चने के बावजूद नहीं बची महिला, अस्पताल प्रबंधन सहित अनेक चिकित्सकों-चिकित्सा कर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

नवीन समाचार, देहरादून, 3 नवंबर 2021 (Health Problems) । कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए निर्धारित से अधिक फीस लेने पर राजपुर थाना पुलिस ने राजधानी के मसूरी डायवर्जन स्थित मैक्स अस्पताल, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और पांच चिकित्सकों अन्य चिकित्सालय कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

Max Hospital, Dehradun | Health/medical/pharmaceuticals | -NA-(Health Problems) प्राप्त जानकारी के अनुसार विशाल अग्रवाल निवासी एकता एवेन्यू डालनवाला ने गत सप्ताह पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार से मैक्स अस्पताल के विरुद्ध शिकायत कर कहा था कि उनकी माता सावित्री देवी को कोरोना संक्रमण होने पर 23 अप्रैल 2021 को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

(Health Problems) यहां कुछ दिन बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उनसे इलाज के नाम पर 17 लाख रुपये वसूल लिए, जो निर्धारित शुल्क से काफी अधिक थे। उन चिकित्सकों की भी विजिटिंग फीस वसूल की गई, जिन्होंने उनकी माता का इलाज नहीं किया। विशाल का कहना है कि इसकी पुष्टि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से भी की जा चुकी है।

उनका आरोप है कि इसके बावजूद दो जून को चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उनकी माता का निधन हो गया। हालांकि, अस्पताल ने उन्हें अतिरिक्त धनराशि नहीं लौटाई। विशाल का यह भी आरोप है कि इस मामले में उन्होंने राजपुर थाना पुलिस और एसएसपी से शिकायत की थी, लेकिन दोनों ही स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में पुलिस महानिदेशक से गुहार लगानी पड़ी।

(Health Problems) राजपुर के थानाध्यक्ष मोहन सिंह ने बताया कि पुलिस महानिदेशक के आदेश पर मैक्स अस्पताल, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, डा. प्रीति शर्मा, डा. पुनीत त्यागी, डा. वैभव छाजर, डा. चंद्रकांत, डा. बिपेश उनियाल सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उधर, मैक्स अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मुकदमे की प्रति उन्हें प्राप्त हो गई है। वह जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अपने पैरों पर चलकर चिकित्सालय आए तीन साल के बच्चे की अनदेखी की वजह से मौत !

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 30 सितंबर 2021(Health Problems) । ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा नई बस्ती निवासी तीन साल के बच्चे की बीती रात्रि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में मौत हो गई। बच्चे के परिजनों ने इसके लिए चिकित्सालय के कर्मियों एवं चिकित्सकों की लापरवाही को जिम्मेदारी बताया है और इसकी शिकायत चिकित्सालय के प्राचार्य से की है।

सुशीला तिवारी अस्पताल में तीन साल के बच्चे की मौत, स्वजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप(Health Problems) मृतक बच्चे के पिता मुकेश के अनुसार उसके बेटे कपिल को पेशाब नहीं आ रही थी, ओर वह जांघ के पास दर्द की शिकायत कर रहा था। इसके इलाज के लिए वह 24 सितंबर की शाम एसटीएच आए थे। रात इमरजेंसी में दिखाने के बाद 25 सितंबर को उन्होंने बच्चे को बच्चा वार्ड में दिखाया। इस पर चिकित्सकों ने बच्चे को भर्ती कराने की सलाह दी। 26 सितंबर को उन्होंने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।

(Health Problems) आरोप लगाया कि चिकित्सकों ने दवाएं मंगाने के बावजूद दवाएं बच्चे को नहीं दी। इधर बुधवार यानी 29 सितंबर की रात बच्चे की परेशानी बढ़ गई। इस दौरान चिकित्सकों ने बच्चे को देखा भी नहीं। इस कारण उसकी मौत हो गई। बच्चे के परिजनों का कहना था कि बच्चा अपने पैरों पर चलकर चिकित्सालय आया पर चिकित्सकों की लापरवाही व अनदेखी की वजह से उसकी मौत हो गई। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें(Health Problems) : पर्वतीय क्षेत्र में चिकित्सालयों की स्थापना व सीईए में शिथिलीकरण की मांग को HC में याचिका दायर

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2021 (Health Problems) । उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिये हाईकोर्ट में जनहित याचिका की गई है। याचिका पर उच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।

(Health Problems) अपने साथियों के साथ इंटरनेट पर ‘कोविड हेल्प सेण्टर यूके’ व अन्य ग्रुप चलाने वाले देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर द्वारा दायर की गई इस याचिका में आवास विभाग से पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सालय, नर्सिंग होम व स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट योजना ‘ओटीएस-2021’ में कमियों व क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-सीईए में शिथिलता की मांग की गई है, ताकि इससे राज्य के चिकित्सालयों में बेडों की वर्तमान संख्या को घटने से रोकने व उनकी संख्या बढ़ाई जा सकेगी।

(Health Problems) याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस याचिका के स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के विषय का संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने को कहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें (Health Problems) : तो बायोमेट्रिक्स मशीन से कोरोना को बुलावा देकर मेडिकल कॉलेज करेगा कोरोना की तीसरी लहर का मुकाबला !

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 जुलाई 2021 (Health Problems) । डा. सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज प्रशासन ने आगामी 26 जुलाई से शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए अपने कार्यालयों में आने पर बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है। कर्मियों का कहना है कि एक ओर कोरोना की तीसरी लहर देश में दस्तक दे रही है, ऐसे में बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति का फरमान कालेज के कर्मियों के लिए कोरोना को आमंत्रण देने वाला साबित हो सकता है।

(Health Problems) बताया गया है कि कॉलेज प्रशासन ने बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति का फरमान तत्कालीन प्राचार्य डा. सीपी भैंसोड़ा ने गत 9 जुलाई को प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत द्वारा नए विभाग का जिम्मा संभालते ही मेडिकल कॉलेजों की पहली समीक्षा बैठक में दिए गए आदेशों के अनुपालन में जारी किया था। उनके तबादले के बाद नए प्राचार्य डा. अरूण जोशी ने भी उसी आदेश को लागू करने का फरमान जारी कर दिया है।

(Health Problems) उल्लेखनीय है कि मेडिकल कालेज में पहले भी बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति की व्यवस्था थी लेकिन कोरोना शुरू होने के बाद सावधानी के तौर पर बायोमेट्रिक्स मशीनों को हटा दिया गया था। महामारी की दो लहरों तक इन मशीनों को उपयोग नहीं किया गया। लेकिन अब जब देश में तीसरी लहर का अंदेशा जताया जा रहा है, फिर से इन मशीनों के उपयोग का आदेश किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

‘नवीन समाचार’ में स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित पूर्व में प्रकाशित समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

(Badalta Daur) सार्वजनिक शौचालय में आपत्तिजनक हरकत करते पकड़े गये 4 नाबालिग प्रेमी-प्रेमिकाएं…

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(Muslims Issues) उत्तराखंड की मुस्लिम संस्था से आई आवाज : बाबर हमारे पूर्वज नहीं, हिंदुओं के उत्सव में शामिल होंगे…

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(Avaidh Sambandh) साली पर बुरी नजर रखता था जीजा, रास्ते से हटाने के लिये उसके पति पर झोेंक दिया था फायर

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नैनीताल (Yuvti se nashila padarth pilakar Dushkarm) : 1 युवती को जूस में पिलाया नशीला पदार्थ और होटल में ले जाकर किया दुष्कर्म…

Fathers Shameful Act with Daughter Father Rapes his Own Minor Daughter, Uttarakhand girl raped, Rape and abortion of a minor by young man of another religion, Dehradun gang-rape, Rishte kalankit, Nabalig,

Yuvti se nashila padarth pilakar Dushkarm

कुमाऊं के लोक देवी-देवता

Dharm Astha Hindu

Devi Devta

(Uttarakhand Politics) आगामी लोक सभा चुनाव के लिये भाजपा की बड़ी बैठक, तय किया हर सीट 5 लाख से अधिक वोटों से जीतकर ‘हैट्रिक’ बनाने का लक्ष्य, कांग्रेस ने नियुक्त किये समन्वयक

Uttarakhand Rajniti BJp Congress

Uttarakhand Politics

हल्द्वानी गौलापार में 1 फर्जी (Farji) तरीके से चल रहे पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट का खुलासा, संचालक एमडी गिरफ्तार….

Farji

(Crime Uttarakhand) सहपाठी छात्रा से बात करने को लेकर 1 छात्र को गोली मारी…

Dehradun-Man Shot Woman in Love Affair, Arms Licenses in Banbhulpura Revoked, Government Action on Restaurant (Sister-s Wedding Broken due to Lack of Money) (Police Encounter-3 Shot-4 Arrested by UDN Police)

Crime Uttarakhand

(Uttarakhand Aandolan) क्या आपको पता है 29 वर्ष पूर्व उत्तराखंड के दो युवाओं ने भी भारतीय संसद में की थी 13 अक्टूबर जैसी ही हिमाकत, जानें कौन थे वे युवा और उन्होंने क्या किया था…?

Uttarakhand Aandolan

दान’वीर’ सिंह ‘मालदार’: उत्तराखंड के पहले अरबपति-‘टिंबर किंग ऑफ इंडिया’, ब्राजील तक फैला कारोबार, फिल्म भी बनी, लेकिन अंत….

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 दिसंबर 2023 (Pahad ke Bete)। आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे बेटे के बारे में बताने जा रहे हैं जो था तो एक घी बेचने वाले सामान्य से पिता का बेटा, लेकिन अपने असाधारण कौशल से वह अंग्रेजी दौर में ‘टिंबर किंग ऑफ इंडिया’ और उत्तराखंड का पहला अरबपति ‘मालदार’ कहलाया। देखें उत्तराखंड के पहले अरबपति देश के टिंबर किंग के उत्थान व अवसान की रोमांचक कहानी…

उसका कारोबार भारत के साथ ब्राजील में भी फैला। अपने नाम के पहले शब्द ‘दान’ को उन्होंने ‘दानवीर’ के रूप में भी बदला। उनके नाम पर उनसे ही कर्ज लेकर फिल्म भी बनी। लेकिन अंग्रेजी सरकार में मिली उनकी कामयाबी देश की आजादी के बाद ताश के पत्तों की तरह मिट्टी में मिल गयी। पूरी कहानी बड़ी ही दिलचस्प है।

उत्तराखण्ड के अरबपति दान सिंह 'मालदार' की कहानी - Kafal Tree1906 में जन्म ठाकुर दान सिंह बिष्ट के बारे में कहा जाता है कि वह कुमाऊं, उत्तराखंड के एक सर्वाधिक धनी-मालदार व्यक्ति होने के साथ दानवीर व परोपकारी व्यक्ति भी थे। वह उत्तराखंड के पहले अरबपति थे। लकड़ी के व्यापार में उनकी महारत के चलते उन्हें ‘टिबंर किंग ऑफ इंडिया’ कहा जाता था। उनकी संपत्ति भारत के साथ ही नेपाल तक थी।

वह एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने गरीबी से उठ कर अपना उद्योग का साम्राज्य खड़ा किया। एक दो नहीं बल्कि व्यापार के कई क्षेत्रों में अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि अंग्रेजी हुकूमत भी उनकी कद्रदान हो गई थी। लेकिन बदलते वक्त के साथ उनके खड़े किये साम्राज्य को ऐसी सरकारी दीमक लगी कि उनके जाते ही उनका नाम भी इतिहास के पन्नों में कहीं दब गया।

कहते हैं कि दान सिंह बिष्ट के पूर्वज मूलतः नेपाल के बैतड़ी जिले के थे लेकिन बाद में वे पिथौरागढ़ के क्वीतड़ गांव में आकर बस गए। उनके पिता देव सिंह बिष्ट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में झूलाघाट में देश की आजादी से पहले अपनी छोटी सी दुकान में घी बेचा करते थे। 1906 में क्वीतड़ गांव में ही देव सिंह के घर दान सिंह नाम के असाधारण बेटे ने जन्म लिया।

जब दान सिंह की उम्र 12 साल रही होगी तभी उन्होंने लकड़ी का व्यापार करने वाले एक ब्रिटिश व्यापारी के साथ बर्मा यानी आज के म्यांमार जाने का फैसला किया। बर्मा में दान सिंह ने लकड़ी के व्यापार की बारीकियों को सीखा, इसी के बल पर उन्होंने बाद में ‘टिबंर किंग आफ इंडिया’ की उपाधि प्राप्त की।

हालांकि बर्मा से लौटने के बाद दान सिंह ने अपने पिता के साथ घी बेचने का काम किया। इसी बीच उनके पिता ने उनके साथ मिलकर एक ब्रिटिश कंपनी से बेरीनाग में एक चाय का बगान खरीद लिया और दान सिंह को चाय बागान की पूरी जिम्मेदारी सोंप दी। कहते हैं कि उस दौर में भारत ही नहीं बल्कि विश्व के चाय व्यापार में चीन का एकछत्र राज था।

दान सिंह ने चीन की चाय तैयार करने प्रक्रिया का अध्ययन किया और इसी के आधार पर अपनी चाय का उत्पादन शुरू किया। कहते हैं कि एक समय ऐसा आया जब बेरीनाग की चाय के जायके की प्रसिद्धि चीन की चाय को भी पीछे छोड़ पूरी दुनिया में फैलने लगी और बेरीनाग की चाय सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि ब्रिटेन और चीन में भी अपने स्वाद का डंका बजाने लगी।

चाय के व्यापार में सफल होने के बाद उन्होंने 1924 में ब्रिटिश इंडियन कॉपरेशन लिमिटेड नामक कंपनी से नैनीताल के ब्रेवरी-बीरभट्टी के पास शराब की भट्टी खरीदी और अपने पिता और अपने लिए बंगला, कार्यालय व कर्मचारियों के रहने के लिए आवासों का निर्माण करवाया। इस इलाके को बाद में ‘बिष्ट स्टेट’ के नाम से जाना जाने गया।

किंग आफ टिंबर के नाम से मशहूर हुए दान सिंह ने अविभाजित भारत में जम्मू कश्मीर, लाहौर, पठानकोट से वजीराबाद तक लकड़ी की बल्लियों की विशाल मंड़ियां स्थापित करने के बाद अपने लकड़ी के व्यापार को कश्मीर से लेकर बिहार व नेपाल तक फैलाया। अपने व्यापार द्वारा उन्होंने उत्तराखंड के साथ साथ देश के अन्य क्षेत्रों के लगभग 6000 लोगों को रोजगार दिया।

इस तरह देखते ही देखते घी बेचने वाले का बेटा दान सिंह बिष्ट अब दान सिंह मालदार बन चुके थे। उन्होंने धीरे धीरे पिथौरागढ़ के अलावा टनकपुर, हल्द्वानी, नैनीताल, मेघालय, असाम तथा नेपाल के बर्दिया और काठमांडू तक में अपनी संपत्तियां खरीदीं और अपने बुद्धि-कौशल और व्यापार के बारे में अपनी सोच से अंग्रेजों तक को अपना कायल कर लिया था। इस दौरान उनकी दोस्ती जिम कॉर्बेट सहित जाने माने ब्रिटिश लोगों से हो गई थी।

दान सिंह उस समय काफी चर्चा में आए थे जब 1945 में उन्होंने मुरादाबाद के राजा गजेन्द्र सिंह की अंग्रेजों द्वारा कर्ज के कारण जब्त की गयी संपत्ति को 2,35,000 रुपये में खरीद लिया था। बताया जाता है कि मालदार यह नहीं चाहते थे कि यह संपत्ति किसी अंग्रेज के कब्जे में जाए इसलिए उन्होंने इसे खरीद लिया। उनका उद्योग जगत का साम्राज्य देश की सीमा से बाहर ब्राजील सहित दूसरे देशों में भी फैलने लग गया था।

खास बात यह भी थी कि अपनी इस अमीरी को उन्होंने केवल खुद पर ही नहीं खर्च किया बल्कि इसकी मदद से उन्होंने अपने नाम के साथ दानवीर भी जोड़ लिया। आजादी के बाद जन कल्याण के लिए उन्होंने कई स्कूल, अस्पताल और खेल के मैदान बनवाए ताकि देश के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें। उन्होंने 1951 में नैनीताल के तत्कालीन वेलेजली गर्ल्स स्कूल को खरीद कर इसका पुनःनिर्माण कराया और अपने पिता स्वर्गीय देव सिंह बिष्ट के नाम से यहां एक कॉलेज की शुरुआत की।

कहते हैं कि इस कॉलेज के लिए उन्होंने उन दिनों 15 लाख मूल्य की 12 एकड़ से अधिक जमीन और 5 लाख रुपये दान में दिए थे। इसी कॉलेज में तब उनके स्वर्गीय पिता देव सिंह बिष्ट के नाम से आगरा विश्वविद्यालय का डीएसबी कॉलेज और बाद में कुमाऊं विश्वविद्याालय का मुख्य परिसर डीएसबी परिसर बना।

इसके अलावा उन्होंने पिथौरागढ़ में अपनी मां और पिता के नाम से सरस्वती देव सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का निर्माण किया। इस विद्यालय के पास की जमीन खरीद कर एक खेल के मैदान भी बनवाया। इसके अलावा उन्होंने अपनी मां के नाम पर छात्रों के लिए श्रीमती सरस्वती बिष्ट छात्रवृत्ति बंदोबस्ती ट्रस्ट की शुरुआत भी की। इस ट्रस्ट ने द्वितीय विश्वयुद्ध में पिथौरागढ़ के शहीद हुए सैनिकों के बच्चों को पढ़ने के लिए छात्रवृति प्रदान की।

दान सिंह ने बहुत धन संपत्ति अर्जित की, बहुत दान किये लेकिन आज उनके नाम से ज्यादा लोग परिचित नहीं हैं। इसकी वजह ये है कि उनके निधन के बाद उनका कोई पुत्र नहीं था और उनके वारिसों में एका नहीं रहा। उनकी कम्पनी डीएस बिष्ट एंड संस ने वर्ष 1956 में किच्छा में ‘बिष्ट इंडस्ट्रियल कारपोरेशन लिमिटेड’ नाम से एक शुगर मिल शुरू करने के लिए लाइसेंस लिया था।

उन्हें उम्मीद थी कि भारत सरकार किच्छा शुगर मिल के लिए मुर्शिदाबाद से लायी जा रही मशीनरी को किच्छा लाने में छूट मिल जाएगी। लेकिन उनके इस सपने पर पानी तब फिर गया जब कलकत्ता के बंदरगाह में जहाज में लदी इस मशीनरी को जहाज से नीचे उतारने की अनुमति नहीं दी गई।

मशीनरी इतनी महंगी थी कि दोबारा इसे खरीदने के लिए उन्हें कर्ज उठाना पड़ा लेकिन इसके बावजूद वह एक दिन भी किच्छा शुगर मिल को चला नही पाए। स्थिति ये हो गई कि उन्हें इस शुगर मिल के शेयर बेचने पड़े। यही घटना मालदार के तनाव और फिर उनकी बीमारी की वजह बनी।

इस तरह मालदार दान सिंह बिष्ट 10 सितंबर सन 1964 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। कारण यह भी था कि अंग्रेजी हुकूमत ने जहां उनकी व्यापार कौशलता को सम्मान दिया था लेकिन भारत की आजादी के बाद अपनी ही देश की सरकार ने उन्हें कम आंका।

दान सिंह बिष्ट के कोई बेटा नहीं था और उनकी बेटियां कम उम्र की थीं जिस वजह से उनके बाद उनकी कंपनी डीएस बिष्ट एंड संस की जिम्मेदारी उनके छोटे भाई मोहन सिंह बिष्ट और उनके बेटों ने संभाली। लेकिन किसी में भी दान सिंह जैसी व्यापारिक कौशलता नहीं थी जिस वजह से उनका खड़ा किया हुआ विशाल व्यापार साम्राज्य सिमटता चला गया और एक समाप्त हो गया।

Dan Singh Bisht उल्लेखनीय कि दान सिंह के जीवन पर जगमणि पिक्चर्स द्वारा एक हिंदी फिल्म भी बनाई गई थी। मालदार नामक इस फिल्म ने हिमालायी हिस्सों में धूम मचाने के साथ साथ पूरे भारत में बहुत अच्छा कारोबार किया था। खास बात यह भी थी कि दान सिंह के जीवन पर आधारित इस फिल्म को बनाने के लिए दान सिंह से ही 70,000 रुपये उधार लिए गए थे। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : (Pahad ke Bete) 4 दिन के प्रवास के बाद नैनीताल से रवाना हुये धौनी…

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete) । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धौनी सोमवार को अपने चार दिवसीय नैनीताल प्रवास के बाद परिवार सहित वापस लौट गये हैं। बताया गया है कि यहां से पंतनगर के लिये निकले हैं, जहां से वह हवाई मार्ग से आगे अपने गंतव्य को जायेंगे। उल्लेखनीय है कि धौनी यहां गत 17 नवंबर से रह रहे थे। (Pahad ke Bete)

'जिस सुकून के लिए पहाड़ आए वह साकार हुआ, उत्तराखंड में एक सप्ताह रुकने के बाद बोले MS Dhoniउल्लेखनीय है कि धौनी ने रविवार को यहीं अपनी धर्मपत्नी साक्षी का जन्म दिन मनाया और भारत एवं आस्ट्रेलिया के बीच खेला गया क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मुकाबला भी देखा। देखें वीडिओ :

नैनीताल प्रवास के बाद से लौटे धोनीइस बीच साक्षी ने नगर की आराध्य देवी माता नयना के मंदिर में बेटी जीवा सहित दर्शन कर आर्शीवाद लिया और नैनी झील में नौकायन किया। इसके अलावा जन्मदिन के अवसर पर धौनी, उनकी पत्नी एवं बेटी आदि ने नगर के एक सैलून में अपने बाल भी बनवाये। (Pahad ke Bete)

IMG 20231120 WA0003.jpgइस दौरान उनका कहना था कि वह विश्व कप के फाइनल मुकाबले की संवेदनशीलता के दृष्टिगत मीडिया में कुछ भी कहने से बच रहे थे। इधर सोमवार को वह पूर्वाह्न करीब 11 बजे नगर से प्रस्थान कर गये। बताया गया है कि पंतनगर से उनकी आगे की उड़ान है। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : (Pahad ke Bete) धौनी पहुंचे नैनीताल, गूगल की वजह से हुये परेशान

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete)। क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम की कप्तानी करते हुये देश को तीनों प्रारूपों के विश्व कप जिताने वाले (Pahad ke Bete) पूर्व भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी शुक्रवार को नैनीताल पहुंचे।

Screenshot 2023 11 17 15 59 27 202 com.whatsapp editपूरी तरह से अपने नैनीताल आगमन को गुप्त रखने का प्रयास करने के बावजूद (Pahad ke Bete) धौनी नगर के प्रवेश द्वार-लेक ब्रिज चुंगी पर ही पहचान लिये गये, लेकिन स्वयं गूगल मैप के भरोसे चलने की वजह से नगर की संकरी सड़कों पर भटकते रहे। आखिर मीडिया कर्मियों ने उन्हें सही रास्ता बताया और वह पंगोट की ओर रवाना हो गये। बताया गया है कि धौनी की पत्नी साक्षी का जन्मदिन 19 नवंबर को है, और धौनी का 20 नवंबर को पंतनगर से लौटने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। लिहाजा वह यहीं अपनी पत्नी का जन्मदिन मना सकते हैं। (Pahad ke Bete)

प्राप्त जानकारी के अनुसार (Pahad ke Bete) धौनी पंजाब के नंबर की ऑडी एवं फॉच्यूनर सहित चार कारों के काफिले के साथ अपराह्न करीब सवा दो तल्लीताल लेक ब्रिज चुंगी से मल्लीताल की ओर लोवर मॉल रोड से गुजरे। इस दौरान मॉल रोड पर काफी भीड़ थी। उन्हें संभवतया पंगोट-किलबरी की ओर जाना था। लेकिन सही रास्ते की जगह वह मनु महारानी तिराहे से पहले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के आवास की ओर चले गये।

वहां से वापस लौटकर पुनः वह गलत दिशा में एटीआई की ओर और वहां केएमवीएन के मुख्यालय की ओर और वहां से फिर से लौटकर एटीआई से पॉलीटेक्निक के पैदल मार्ग की ओर चले गये। वहां मीडिया कर्मियों ने उन्हें रोककर उनका गंतव्य पूछा। उनके पंगोट बताने पर उन्हें सही मार्ग पर वापस मनु महारानी तिराहे से बारापत्थर का मार्ग बताया गया। इसके बाद वह अपने गंतव्य को रवाना हुये। इस दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों के साथ फोटो खिंचवाये लेकिन धन्यवाद जताने के अलावा कोई औपचारिक बात नहीं की। (Pahad ke Bete)

इससे पहले (Pahad ke Bete) धौनी के कैंची धाम में बाबा नीब करौरी के दर्शनों का कार्यक्रम भी बताया जा रहा था, किंतु नैनीताल आते हुये उनके द्वारा कैंची धाम में बाबा नीब करौरी के दर्शन किये जाने की बात सामने नहीं आयी है। गौरतलब है कि इस दौरान मॉल रोड व अन्य स्थानों पर सैलानी एवं आम लोग उन्हें पहचान कर उनके साथ फोटो खींचने की गुहार लगाते रहे, किंतु उन्होंने अपनी गाड़ी का शीशा नहीं खोला और किसी के साथ फोटो भी नहीं खिंचवाये। लोग उनकी गाड़ी के पीछे भागते रहे। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : (Pahad ke Bete) 20 साल बाद अपने पैतृक गांव पहुंचे महेंद्र सिंह धौनी..

नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 15 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete)। अपने कॅरियर की बुलंदियों पर कभी पैतृक गांव व प्रदेश का नाम न लेने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी आखिर अपने कॅरियर के अवसान पर ही सही, 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने पैतृक गांव पहुंच गये हैं।

(Pahad ke Bete) धोनी अपनी पत्नी साक्षी धोनी व बेटी जीवा के साथ बुधवार को अपने गांव ल्वाली अल्मोड़ा पहुंचे हैं। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया गया। धोनी व उनकी पत्नी ने गांव में मंदिरों में ईष्ट देव की पूजा अर्चना की। देखें वीडिओ :

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अपने उज्ज्वल करियर के चरम पर रहते कभी यहां आना तो दूर उत्तराखंड का नाम भी नहीं लेने वाले महेंद्र सिंह धौनी पूरे 20 वर्ष बाद अपने अल्मोड़ा उत्तराखंड स्थित गांव ल्वाली आए.. तब आए जब पिता के बाद चाचा भी गांव छोड़कर हल्द्वानी वासी हो चुके हैं.. मौसी को कहना पड़ा, ‘मैं तुम्हारी मौसी हूं। चाहे जितने बड़े हो जाओ, पैर तो छूने पड़ेंगे..,’ तब थोड़ा सा झुके, पता नहीं, पैर छुए भी या नहीं, पर मौसी ने जरूर गले से लगा लिया.. पूरे गांव ने स्वागत किया… महिलाओं ने साक्षी के शादी के 10 साल बाद पहली बार ससुराल आने पर ‘च्यूडे परखे’, 101 रुपए का ‘पीठ्या’ भी लगाया.. और वह तो रात भी ‘घर’ नहीं, नाटाडोल के एक ‘होमस्टे’ में बिता गए बल…. हां घर की ‘देली’ पर पत्नी संग खींची फोटो को जरूर वायरल करा गए…

आज दोपहर करीब 11 बजे (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी गांव पहुंचे। उनके गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। ग्रामीणों ने गांव की सड़क में धोनी व उनकी पत्नी का पारंपरिक तरीके से ‘च्यूड़े परखकर’ स्वागत किया। जिसके बाद धोनी ग्रामीणों के साथ अपने पैतृक आवास पहुंचे। (Pahad ke Bete)

इस दौरान गांव और क्षेत्र के युवा क्रिकेट की बारीकियां सीखने के लिए (Pahad ke Bete) धोनी के पास पहुंच गए। बच्चे (Pahad ke Bete) धोनी से कहने लगे हम भी आपकी तरह क्रिकेटर बनना चाहते हैं। (Pahad ke Bete) धोनी ने उनकी हौसला अफजाई की। ग्राम प्रधान दिनेश सिंह धोनी ने बताया कि (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी व उनकी पत्नी साक्षी गांव पहुंचे है। उन्होंने गांव के हरज्यू मंदिर में पूजा अर्चना की। फिलहाल वह दूसरे मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण यह कहते भी सुने जा रहे थे कि धौनी को आखिर गांव के ग्राम देवता व कुलदेवता गांव बुलाने में सफल रहे।

ग्राम प्रधान दिनेश सिंह धोनी ने यह भी बताया कि (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी इससे पहले अपने परिजनों के साथ 2003 में गांव आए थे। 20 साल बाद वह दोबारा गांव आए है। उन्होंने बताया कि इस दौरान ग्रामीणों की धोनी से काफी मुद्दों पर बातचीत भी हुई। (Pahad ke Bete)

(Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी व उनकी पत्नी के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों व युवाओं ने उनके साथ जमकर तस्वीरें खींची। बताया गया है कि वह बीती रात नाटाडोल में एक होमस्टे में ठहरे हुए थे। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : Pahad ke Bete-1 : अब भारतीय क्रिकेटर (Pahad ke Bete) महेंद्र धौनी भी बाबा नीब करौरी के दर पर, लेकिन नहीं कर सके दर्शन… आगे क्या है कार्यक्रम ?

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी, बेटी जीवा और अपने कुछ दोस्तों के साथ नैनीताल जनपद पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि धोनी कल कैंची धाम पहुंचे थे, लेकिन दर्शन नहीं कर पाये।

वह अब आज सपरिवार कैंची धाम में बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन कर सकते हैं, और इसके बाद अल्मोड़ा जनपद के लमगड़ा क्षेत्र में स्थित अपने पैतृक गांव ल्वाली भी जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि वह अगले 5 दिन यहीं रहेंगे और यहीं अपनी पत्नी साक्षी का जन्मदिन भी मनायेंगे।

Pahad ke bete
पंतनगर एयरपोर्ट पर धौनी एवं धौनी की पत्नी द्वारा डाली गयी तस्वीर।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व भारतीय क्रिकेटर (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी, बेटी जीवा और कुछ खास दोस्तों के साथ मंगलवार सुबह इंडिगो की फ्लाइट से पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने परिवार के साथ एयरपोर्ट पर करीब आधा घंटे का समय बिताया। इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट कर्मियों के साथ फोटो भी खिंचवाई। बाद में कार से नैनीताल स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा श्री नीब करौरी महाराज के के दर्शनों के लिए नैनीताल जनपद स्थित कैंची धाम पहुंचे।

किंतु यहां अत्यधिक भीड़ को देखते हुये अल्मोड़ा की ओर आगे बढ़ गये। हालांकि उनके नैनीताल स्थित मेस आर्मी गेस्ट हाउस में रुकने की भी चर्चायें हैं, लेकिन पुष्टि नहीं हो रही है।

गौरतलब है कि (Pahad ke Bete) धौनी के उत्तराखंउ आने का खुलासा उनकी पत्नी साक्षी धौनी द्वारा संभवतया रानीबाग के पास से नैनीताल, रानीखेत व भीमताल की दूरियां लिखे बोर्ड का फोटो डालने से हुआ। हालांकि बाद में उनकी पंतनगर एयरपोर्ट की तस्वीर भी सामने आयी। अलबत्ता उनके बारे में पूरी तरह से पुख्ता कोई सूचना नहीं है।

अल्मोड़ा एवं नैनीताल जनपद की पुलिस भी उनके बारे में मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार कयास लगा रही है। नैनीताल की तल्लीताल, भवाली, अल्मोड़ा व लमगड़ा पुलिस खबरों पर ही नजर रखे हुये हैं, और उनके दौरे को निजी दौरा बताते हुये उनके बारे में किसी भी जानकारी से पूरी तरह से इंकार कर रही है।

बताया गया है कि 20 नवंबर को इंडिगो की फ्लाइट से (Pahad ke Bete) धौनी की परिवार सहित वापसी की टिकट बुक है। इस दौरान धोनी की पत्नी साक्षी का 19 नवंबर को जन्मदिन है। माना जा रहा है कि धोनी ने पत्नी का जन्मदिन मनाने के लिए उत्तराखंड को चुना है।

उल्लेखनीय है कि (Pahad ke Bete) धोनी का पैतृक गांव अल्मोड़ा में है। उनके पिता पान सिंह 40 साल पहले अपना पैतृक गांव छोड़ रोजगार के लिए रांची चले गए और तब से वहीं रहते हैं। हालांकि पान सिंह धार्मिक आयोजनों में गांव में आते हैं। (Pahad ke Bete) धोनी को यज्ञोपवीत संस्कार पैतृक गांव ल्वाली में ही हुआ। अलबत्ता अब धोनी के चाचा घनपत सिंह भी गांव में नहीं रहते हैं। वह भी चार वर्ष पूर्व गांव से पलायन कर हल्द्वानी बस गए हैं। धौनी का परिवार इससे पहले वर्ष 2004 में गांव आया था।

भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप समेत आई.सी.सी.पुरुष टी-20 विश्व कप और आई.सी.सी.चैंपियंस ट्रॉफी तीनों जिताने वाले विकिट कीपर और धुरंदर बल्लेबाज कप्तान ऑनरेरी (Pahad ke Bete) ले.कर्नल महेंद्र सिंह धौनी महेंद्र सिंह धौनी अपने कुमाऊं के निजी दौरे में पहुंचे हैं। दोपहर में दिल्ली से पंतनगर एयरपोर्ट में उतरे जहां एयरपोर्ट अथॉरिटी के हैड ने उनसे मुलाकात की और फ़ोटो खिंचवाया। इसके बाद बेहद सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुछ बच्चों ने भी धौनी के साथ फोटो खिंचवाया। 

अपनी पत्नी साक्षी धौनी और मित्रों के साथ पहुंचे (Pahad ke Bete) महेंद्र पहाड़ों की ठंड को देखते हुए जैकिट भी साथ लाए थे। पीठ में बैग टांगे (Pahad ke Bete) धौनी एयरपोर्ट से अपनी सफेद ऑडी के लिए निकले। पंजाब नंबर की धौनी की गाड़ी के साथ चार सफेद अन्य गाड़िया भी सुरक्षाकर्मियों की चल रही थी। धौनी का कारवां सीधे भवाली से गुजरते हुए कैंचीं धाम के समीप पहुंचा। बताया जा रहा है कि वहां भीड़ भाड़ को देखते हुए धौनी लौट आए। 

यह भी है कि (Pahad ke Bete) धौनी ने कभी एक बार भी स्वयं को उत्तराखंड का निवासी नहीं बताया है, इससे धौनी को लेकर उत्तराखंड के लोगों में एक तरह की बड़ी नाराजगी भी है।

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यह भी पढ़ें (Pahad ke Bete) : सुबह का सुखद समाचार : नैनीताल की एक सहित उत्तराखंड की 5 हस्तियों को सरकार देगी उत्तराखंड गौरव सम्मान

नवीन समाचार, देहरादून, 7 नवंबर 2022 (Pahad ke Bete)। उत्तराखंड सरकार इस वर्ष से एक नई पहल करने जा रही है। इस पहल के तहत सरकार ने ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार के लिए पांच हस्तियों का नाम चुना है।

उत्तराखंड सरकार के सामान्य प्रशासन के सचिव विनोद कुमार सुमन द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि देवभूमि उत्तराखंड में उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार वर्ष 2022 के लिए समिति द्वारा पांच हस्तियों को चुना गया है।

इनमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Pahad ke Bete) अजीत कुमार डोभाल, भारतीय फिल्म जगत से कवि, लेखक, गीतकार एवं वर्तमान में भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष (Pahad ke Bete) प्रसून जोशी, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सेनाध्यक्ष (Pahad ke Bete) स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत, प्रदेश के दिवंगत जनकवि, लेखक, लोक गीतकार (Pahad ke Bete)  स्वर्गीय गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ तथा साहित्यकार व पत्रकार (Pahad ke Bete) स्वर्गीय वीरेन डंगवाल को उत्तराखंड गौरव सम्मान वर्ष 2022 के लिए चयनित किया गया है।

यह भी पढ़ें : गौरवान्वित हुआ नैनीताल-उत्तराखंड, पहाड़ के बेटे (Pahad ke Bete) ब्रिगेडियर अजय सिंह नेगी को दूसरी बार राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा पदक

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जनवरी 2022। इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर गढ़वाल राइफल्स के ब्रिगेडियर (Pahad ke Bete) अजय सिंह नेगी को दूसरी बार राष्ट्रपति के विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। ब्रिगेडियर नेगी का नैनीताल से खास रिश्ता है।

8 फरवरी 1966 को जन्मे (Pahad ke Bete) ब्रिगेडियर अजय सिंह नेगी का परिवार नैनीताल के आल्मा कॉटेज क्षेत्र में रहता है। उनके पिता स्वर्गीय भगवत सिंह नेगी राजकीय पॉलिटेक्निक नैनीताल में यांत्रिक प्रशिक्षक और माता बसंती नेगी नगर के स्नोभ्यू स्थित विद्यालय में शिक्षिका थीं। उनकी पढ़ाई यहीं हुई।

उन्होंने नगर के भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय से 1980 में हाई स्कूल और 1982 में इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया और फिर यहीं डीएसबी परिसर से 1984 में बीएससी की। इस दौरान वह एनसीसी से भी जुड़े थे और सीनियर अंडर ऑफिसर भी रहे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में वह हॉकी, क्रिकेट और फुटबॉल भी खेलते थे। यहां एमएससी करने के दौरान ही 1985 में उनका चयन सीडीएस परीक्षा के माध्यम से आईएमए के लिए हुआ।

वर्तमान में दिल्ली में तैनात (Pahad ke Bete) ब्रिगेडियर नेगी अपने साढ़े तीन दशक के सेवाकाल के दौरान उन्होंने जम्मू कश्मीर में कारगिल लद्दाख के साथ ही अन्य सेक्टर में कई सैन्य अभियानों का नेतृत्व करते हुए न केवल आतंकियों का सफाया किया बल्कि मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई संगठनों को भारी नुकसान पहुंचाया। इन्हीं उपलब्धियों के कारण उन्हें दूसरी बार राष्ट्रपति के विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल से जुड़े दो लेखकों-(Pahad ke Bete) देवेंद्र मेवाड़ी व नमिता गोखले को मिले साहित्य अकादमी पुरस्कार

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 दिसंबर 2021 (Pahad ke Bete) । वर्ष 2021 के साहित्य अकादमी पुरस्कार दो ऐसे लेखकों को मिले हैं, जो नैनीताल से संबंधित हैं। केंद्रीय साहित्य अकादमी ने नैनीताल के कालाआगर गांव में जन्मे, पले व बढ़े बाल-विज्ञान लेखक (Pahad ke Bete) देवेंद्र मेवाड़ी को उनके नाटक ‘नाटक नाटक में विज्ञान’ के लिए बाल साहित्य पुरस्कार तथा नैनीताल में पली, बढ़ी व पढ़ी अंग्रेजी लेखिका नमिता गोखले को उनके अंग्र्रेजी उपन्यास ‘थिंग्स टु लिव बिहाइंड’ के लिए अंग्रेजी साहित्य की श्रेणी में यह पुरस्कार देने की घोषणा की है।

(Pahad ke Bete) उल्लेखनीय है कि देवेंद्र मेवाड़ी का जन्म 7 मार्च 1944 को उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के कालाआगर गांव में एक किसान-पशुपालक किशन सिंह मेवाड़ी के घर में हुआ था। पहाड़ की चोटी के इस गांव के लोग गर्मियों के छह माह यहां और सर्दियों के छह माह ककोड़ गांव में बिताते थे। इसलिए इन दोनों स्थानों पर प्रारंभिक से लेकर इंटर तक की शिक्षा के बाद देवेंद्र ने नैनीताल के डीएसबी परिसर से वनस्पति विज्ञान में एमएससी व हिंदी में एमए तथा बाद में राजस्थान विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया।

(Pahad ke Bete) 73 वर्षीय देवेंद्र मेवाड़ी ‘मेरी यादों का पहाड़’ जैसी चर्चित आत्मकथात्मक संस्मरण एवं बच्चों को किस्सागोई के अंदाज में विज्ञान की बारीकियों को सरल शब्दों में किस्सा गोई द्वारा अनूठे अंदाज में समझाने के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने बच्चों के लिए सौर मंडल की सैर, विज्ञान और हम, विज्ञाननामा, मेरी विज्ञान डायरी, मेरी प्रिय विज्ञान कथाएं, फसलें कहें कहानी, सूरज के आंगन में, सौरमंडल की सैर, विज्ञान बारहमासा, विज्ञान जिनका ऋणी है और पशुओं की प्यारी दुनिया सहित बीस से अधिक पुस्तकों का संपादन किया है।

(Pahad ke Bete) वहीं नमिता गोखले की बात करें तो उनके नाना सीडी पांडे राज्यसभा के सांसद थे और चिड़ियाघर रोड पर बक स्कूल के पास रहते थे। नैनीताल के सेंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज से वह नमिता पंत के नाम से पढ़ी हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के कानून मंत्री एचआर गोखले के पुत्र से विवाह किया, जिसके बाद वह नमिता गोखले हो गईं।

उन्हें जिस पुस्तक पर पुरस्कार मिला है, उसका लोकार्पण 2015 में नैनीताल के प्रसादा भवन में आयोजित हुए कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल में अल्मोड़ा के मूल निवासी जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर पुष्पेश पंत के हाथों हुआ था।

(Pahad ke Bete) पंत ने इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद भी किया था। वह हिमालयन इकोज से भी जुड़ी हैं और यहां आती रहती हैं। बताया गया है उनके साहित्य अकादमी पुरस्कार जीतने वाले उपन्यास की विषयवस्तु देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौर के नैनीताल और कुमाऊं से ही संबंधित है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Pahad ke Bete) : देश के प्रख्यात भूगर्भ शास्त्री, कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मविभूषण प्रो. वल्दिया का देहावसान

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 सितंबर 2020। देश के प्रख्यात भूगर्भ शास्त्री पर्यावरणविद् पद्मविभूषण व पद्मश्री तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति (Pahad ke Bete) प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का मंगलवार को 85 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया। उनके निधन के समाचार से कुमाऊं विश्वविद्यालय, प्रो. वल्दिया द्वारा

(Pahad ke Bete) यहां स्थापित भूविज्ञान विभाग में शोक की लहर छा गई है। उनके निधन पर कूटा यानी कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की ओर से अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, महासचिव डा. सुचेतन साह, डा. विनय कुमार, डा. दीपक कुमार, डा. दीपिका गोस्वामी के साथ ही प्रो. राजीव उपाध्याय, डा. बीएस कोटलिया, डा. आशीष तिवारी व विधान चौधरी आदि ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।

(Pahad ke Bete) उल्लेखनीय है कि प्रो. वल्दिया मूलतः पिथौरागढ़ जनपद के निवासी हैं, और वर्तमान में बंगलुरू में ही रहते थे। परंतु उनका नैनीताल नगर में भी लांग व्यू क्षेत्र में आवास है, जहां वह अक्सर गर्मियों में आते रहते थे।

भूगर्भविद्, वैज्ञानिक पद्म भूषण (Pahad ke Bete) खड्ग सिंह वल्दिया का जीवन परिचय

माताः श्रीमती नन्दा वल्दिया, पिताः स्व. देव सिंह वल्दिया, जन्मतिथि: 20 मार्च 1937, जन्म स्थान: कलौ (म्यामार), पैतृक गाँव: घंटाकरण जिला-पिथौरागढ़, पारिवारिक स्थिति- एक विवाहित पुत्र, शिक्षा: एमएससी., पीएचडी

प्रमुख उपलब्धियाँ : 1965-66 में अमेरिका के जान हापकिन्स विश्वविद्यालय के ‘पोस्ट डाक्टरल’अध्ययन और फुलब्राइट फैलो। 1969 तक लखनऊ विवि में प्रवक्ता। राजस्थान विवि, जयपुर में रीडर। 1973-76 तक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियॉलॉजी में वरिष्ट वैज्ञानिक अधिकारी। 1976 से 1995 तक कुमाऊँ विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे।

1981 में कुमाऊँ विवि के कुलपति तथा 1984 और 1992 में कार्यवाहक कुलपति रहे। 1995 से जवाहरलाल नेहरू सेन्टर फार एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च केन्द्र बंगलौर में प्रोफेसर हैं। मध्य हिमालय की भूवैज्ञानिक संरचना से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण अध्ययनों के अध्येता।

(Pahad ke Bete) उल्लेखनीय कार्य के लिए 1976 में ‘शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार’ से सम्मानित। जियॉलाजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा ‘रामाराव गोल्ड मैडल’। 1977-78 में यूजीसी द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्मान। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा ‘एसके मित्रा एवार्ड’ और डीएन वाडिया मैडल। 1997 में भारत सरकार द्वारा ‘नेशनल मिनरल अवार्ड एक्सीलेंस’।

दो दर्जन से अधिक विशेषज्ञों की राष्ट्रीय समितियों, परिषदों, कमेटियों के सदस्य हैं। 1983 में प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य और योजना आयोग की अनेक उप समितियों के सदस्य रहे। 2 फरवरी से 2003 इन्सा के राष्ट्रीय प्रोफेसर।

हिमालय की ऐतिहासिक व भूगर्भीय परतें खोलने में रहा है (Pahad ke Bete) प्रो. वल्दिया का बड़ा योगदान

-पहाड़ पर मैग्नेसाइट, खड़िया आदि खनिजों की खोज, प्रदेश में बांधों के निर्माण, राज्य के भू-क्षरण संभावित क्षेत्रों की पहचान व बचाव पर रहा है व्यापक कार्य
-कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर में भूविज्ञान विभाग की स्थापना और इसे सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज के स्तर तक पहुंचाने में रहा है अप्रतिम योगदान

(Pahad ke Bete) नवीन जोशी, नैनीताल। मंगलवार को 85 वर्ष की उम्र में दिवंगत हुए ख्यातिलब्ध भूविज्ञानी, शिक्षाविद्, लेखक और पर्यावरणविद् (Pahad ke Bete) प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का देश के साथ ही उत्तराखंड के लिए कई बड़े उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

(Pahad ke Bete) हिमालय पर्वत के स्थान पर करीब दो करोड़ वर्ष पूर्व टेथिस महासागर की उपस्थिति होने, और लघु हिमालय के पहाड़ों की संस्तरिकी के अन्य पहाड़ों से इतर उल्टा यानी कम उम्र पहाड़ों के नीचे और अधिक पुराने पहाड़ों के उनके ऊपर होने जैसी अनूठी बातों को दुनिया के समक्ष लाने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है।

(Pahad ke Bete) उत्तराखंड में मैग्नेसाइट तथा खड़िया व स्लेट आदि खनिजों की उपस्थिति से भी उन्होंने दुनिया को रूबरू करवाया, तथा यहां की कमजोर भू संरचना के मद्देनजर भूधंसाव व भूक्षरण संभावित स्थानों की पहचान तथा इनसे बचने के उपाय एवं इनके बीच बांधों के निर्माण पर उनका अप्रतिम योगदान रहा है। कुमाऊं विवि में उनके द्वारा स्थापित भूविज्ञान विभाग आज उच्चानुशील केंद्र (सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज) के स्तर तक पहुंच गया है।

(Pahad ke Bete) 20 मार्च 1937 में प्रदेश के पिथौरागढ़ जिले में जन्मे (Pahad ke Bete) वल्दिया के बारे में बताया जाता है कि वह छात्र जीवन से ही नए शोधों व खोजों में लगे रहते थे। 1976 में कुमाऊं विवि के तत्कालीन डीएसबी संगठक महाविद्यालय में मात्र 39 वर्ष की आयु में प्रोफेसर बनने से पूर्व ही वह राजस्थान विवि उदयपुर व वाडिया इंस्टिट्यूट देहरादून में उपनिदेशक रह चुके हैं।

तथा 1959 में लखनऊ विवि से एमएससी करने और वहीं प्रवक्ता बन जाने के दौरान ही उन्होंने पिथौरागढ़ की चंडाक पहाड़ी व गंगोलीहाट क्षेत्रों में ‘स्ट्रोमेटोलाइट्स” नाम के एक प्रकार के शैवाल की पहचान कर उसके आधार पर करीब दो करोड़ वर्ष पूर्व हिमालय के पहाड़ों की जगह हजारों मीटर गहरा टेथिस महासागर होने की परिकल्पना कर उसकी विकास यात्रा का अध्ययन करने लगे थे।

1961-62 में 25 वर्ष की उम्र से ही उनके शोध पत्र देशी-विदेशी विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगे थे। वे ही पहाड़ों में मैग्नेसाइट खनिज की उपलब्धता को दुनिया के समक्ष अपने शोध पत्रों के माध्यम से लाए, जिसके बाद पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा में इसकी फैक्टरियां लगीं।

नैनीताल की नैनी झील के अलावा कश्मीर की डल व भोपाल की झीलों में हुए संरक्षण के कार्य उन्हीं के शोधों के परिणामस्वरूप बताए जाते हैं। डीएसबी में 1975 में बने भूविज्ञान विभाग में अपने शोध छात्रों के साथ इकलौते कक्ष के वर्षा के दौरान पानी चूने के कारण छाते लेकर शोध कार्य करने के दौर से

लेकर 2012 में इसे उच्चानुशील केंद्र बनाने तक को उनके विभाग के लोग उन्हीं का योगदान बताने में नहीं झिझकते। 1995 तक वह कुमाऊं विवि में कार्यरत रहे, तथा इस दौरान भूविज्ञान विभागाध्यक्ष तथा कुमाऊं विवि के कार्यकारी कुलपति भी रहे।

प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकारों की समिति के सदस्य, विज्ञान के क्षेत्र के बड़े पुरस्कार जीएस मोदी, हिंदी सेवी सम्मान एवं पद्मश्री (2007) सम्मानों से वह पूर्व में ही नवाजे जा चुके हैं। वर्तमान में जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च में कार्यरत प्रो. वल्दिया अभी बीते वर्ष तक भी भी पहाड़ से जुड़े हुए थे। वह हर वर्ष गर्मियों में यहां एलपीएस के पास स्थित अपने आवास पर रहने आते थे, तथा पिथौरागढ़ जिले में बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करते थे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बम धमाकों में खोई श्रवण शक्ति

नैनीताल। शुरुआती जीवन में बेहद अभावों में रहकर भी ऊंचाई पर पहुंचे (Pahad ke Bete) प्रो. वल्दिया के दादा म्यांमार (तत्कालीन वर्मा) में राजधानी रंगून के पास कलावा नाम के स्थान पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान द्वारा रंगून पर की गई भीषण बमबारी के धमाकों की वजह से उनकी श्रवण शक्ति काफी क्षींण हो गई।

प्रो. वल्दिया की कुछ प्रमुख बातें

-भारतीय महाद्वीप एशिया महाद्वीप को हर वर्ष 54 सेमी की दर से उत्तर दिशा की ओर धकेल रहा है।
-हिमालय के पहाड़ प्रतिवर्ष 18 मिमी की दर से ऊपर उठ रहे हैं।
-नेपाल के पहाड़ तीन से पांच मिमी प्रतिवर्ष की दर से ऊपर उठ रहे हैं।
-छोटे भूकंपों से ही भूगर्भ के भीतर की ऊर्जा बाहर निकलती रहती है, तथा अंदर का तनाव कुृछ हद तक कम होता रहता है।

-प्रकृति मानव के विकास के बीच नहीं आ रही वरन मानव प्रकृति के बीच आ रहा है, इस कारण केदारनाथ जैसी आपदाएं आ रही हैं।                                                                                          -नदियां वर्षों बाद वापस अपने मार्ग पर लौट कर आती हैं, इसलिए नदियों के करीब मानव को प्रतिरोध या अपनी बस्तियां, सड़क आदि नहीं बनानी चाहिए।

मोदी से विज्ञान जगत में निराशा, पर आशा बाकी: पद्मभूषण वल्दिया

-उत्तराखंड की बजाय कर्नाटक की ओर से पुरस्कार मिलने के सवाल को टाल गए
नैनीताल। अभी हाल में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों देश का तीसरा सर्वाेच्च पद्मभूषण पुरस्कार प्राप्त करने वाले भू वैज्ञानिक (Pahad ke Bete) प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश के विज्ञान जगत में निराशा का माहौल है। विज्ञान जगत को ना तो सरकार से दिशा-निर्देश ही प्राप्त हो रहे हैं, और ना अपेक्षित आर्थिक सहायता ही मिल पा रही है।

पीएम मोदी ने स्वयं भी जो घोषणाएं की थीं, वह भी पूरी नहीं हो रही हैं। विज्ञान से जुड़े अनेक संस्थानों में एक-डेढ़ वर्ष से निदेशक व महानिदेशकों की नियुक्ति तक नहीं हो रही है। अलबत्ता, उन्होंने जोड़ा कि वह आशावादी हैं कि मोदी के नेतृत्व में जिस तरह देश अन्य दिशाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसी तरह विज्ञान जगत के लिए भी ‘अच्छे दिन” आएंगे।

(Pahad ke Bete) प्रो. वल्दिया रविवार (12.04.2015) को मुख्यालय में मीडिया कर्मियों के सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने 14 वर्षों में उत्तराखंड के नियोजन से भी स्वयं को असंतुष्ट बताया। अलबत्ता उत्तराखंड के बजाय कर्नाटक की ओर से पद्मभूषण हेतु नाम जाने पर सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा,

और स्वयं के वर्ष में चार माह उत्तराखंड में ही कार्य करने व यहां के लोगों की शुभकामनाओं से एक साधन विहीन व्यक्ति (स्वयं) को सम्मान मिलने की बात कही, लेकिन उनकी जुबां से यह दर्द भी बाहर आया कि जिसे समाज ने भुला दिया था, उसे पुरस्कार के योग्य समझा गया।

हिमालयी क्षेत्र के लिए उन्होंने आपदाओं का सामना करने के लिए नीतियां बनाने व उनका ठीक से क्रियान्वयन करने, जल प्रवाह को बढ़ाने के लिए पहाड़ों पर भी बिना देर किए बड़े पैमाने पर वर्षा जल संग्रहण के प्रयास करने तथा वन संपदा के संरक्षण को स्थानीय जन समुदाय से जोड़ने की आवश्यकता जताई।

प्रो. वल्दिया के दो आलेख:

1. अपने आप नहीं आ रही, बुलाई जा रही हैं आपदाएं !

नवीन जोशी, समय लाइव, नैनीताल। दैवीय आपदा के बारे में जहां धारी देवी की मूर्ति को उनके स्थान से हटाने और प्रदेश में बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं बनाने जैसे अनेक कारण गिनाए जा रहे हैं, वहीं भू-वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि आपदाएं स्वयं नहीं आ रही हैं, वरन बुलाई जा रही हैं। आपदा मनुष्य के पास नहीं आ रहीं, वरन मनुष्य आपदा के पास स्वयं जा रहा है।

दूसरे विश्व में बहुचर्चित ग्लोबल वार्मिग का सर्वाधिक असर पहाड़ों पर हो रहा है।भू-वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया के अनुसार करीब दो करोड़ वर्ष पुराना हिमालय दुनिया का युवा पहाड़ कहा जाता है। अपने दौर के महासमुद्र टेथिस की कमजोर बुनियाद पर जन्मा हिमालय आज भी  युवाओं की तरह ऊंचा उठ रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय भू-प्लेट हर वर्ष करीब 55 मिमी की गति से उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है। ऐसे में ऊंचे उठते पहाड़ अपने गुरुत्व केंद्र को संयत रखने की कोशिश में अतिरिक्त भार को नीचे गिराते रहते हैं।

दूसरी ओर पानी अपनी प्रकृति के अनुसार इसे नीचे की ओर मैदानों से होते हुए समुद्र में मिलाता रहता है। ऐसे में ऊंचे उठते पहाड़ों और नीचे की ओर बहते पानी के बीच हमेशा से एक तरह की जंग चल रही है, और पहाड़ कमजोर होते जा रहे हैं। नदियों के किनारे की रेत, राख, कंकड़-पत्थर व बालू आदि की भूमि पर अच्छी कृषि होने के साथ ही इसके कमजोर होने और कम श्रम से ही कार्य हो जाने के लालच में पहाड़ पर अधिकतर सड़कें नदियों के किनारे ही बनाई जाती हैं।

सड़कों से पानी को हटाने का प्रबंध भी नहीं किया जाता, इस कारण यहां लगातार पानी के रिसते जाने और वाहनों के भार से भूस्खलन होते जाते हैं। सड़कों के किनारे ही बाजार, दुकानें आदि व्यापारिक गतिविधियां विकसित होती हैं। यहां तक कि नदियों के पूर्व में रहे प्रवाह क्षेत्रों में भी भवन बन गए हैं, और गत दिनों आई जल पल्रय में देखें तो सर्वाधिक नुकसान नदियों के किनारे के क्षेत्रों और सड़क के नदी की ओर के भवनों को ही पहुंचा है।

प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का कहना है कि पहाड़ पर अतिवृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ का होना सामान्य बात है, लेकिन इनसे होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी बड़ी आबादी के क्षेत्रों में होता है। आबादी क्षेत्रों में निर्बाध रूप से निर्माण हो रहे हैं। सरकार जियोलॉजिकल सव्रे आफ इंडिया की रिपोटरे की भी अनदेखी करती रही है।

 नदियों के छूटे पाटों में यह भुलाकर भवन बन गए हैं कि वह वापस अपने पूर्व मार्ग (फ्लड वे) में नहीं लौटेंगी। लेकिन इस बार ऐसा ही हुआ, और अकल्पनीय नुकसान हुआ। वहीं केदारनाथ मंदिर इस लिए बच गया कि यह मंदाकिनी नदी के पूर्वी और पश्चिमी पथों के बीच ग्लेशियरों द्वारा छोड़ी गई जमीन-वेदिका (टैरेस) पर बना हुआ है, जबकि अन्य निर्माण नदी के पूर्व पथों पर बने थे। (राष्ट्रीय सहारा, दिल्ली संस्करण, जून 29, 2013,शनिवार, पेज-15)

2. हर वर्ष दो सेमी तक ऊपर उठ रहे हैं हम

-एशिया को 54 मिमी प्रति वर्ष उत्तर की ओर धकेल रहा है भारत
नवीन जोशी, नैनीताल। शीर्षक पड़ कर हैरत में न पड़ें । बात हिमालय क्षेत्र के पहाड़ों की हो रही है। शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात भू वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. केएस वाल्दिया का कहना है कि भारतीय प्रायद्वीप एशिया को 54 मिमी की दर से हर वर्ष उत्तर की आेर धकेल रहा है। इसके प्रभाव में हिमालय के पहाड़ प्रति वर्ष 18 मिमी तक ऊंचे होते जा रहे हैं।  
प्रो. वल्दिया ने कहना है कि भारतीय प्रायद्वीपीय प्लेट 54 मिमी से चार मिमी कम या अधिक की दर से उत्तर दिशा की ओर सरक रही है, इसका दो तिहाई प्रभाव तो बाकी देश पर पड़ता है, लेकिन सवाधिक एक तिहाई प्रभाव यानी 18 मिमी से दो मिमी कम या अधिक हिमालयी क्षेत्र में पड़ता है। मुन्स्यारी से आगे तिब्बतन—हिमालयन थ्रस्ट पर भारतीय व तिब्बती प्लेटों का टकराव होता है।
कहा कि यह बात जीपीएस सिस्टम से भी सिद्ध हो गई है। उत्तराखंड के बाबत उन्होंने कहा कि यहां यह दर 18 से 2 मिमी प्रति वर्ष की है। कहा कि न केवल हिमालय वरन शिवालिक पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई भी बढ़ रही है। उन्होंने नेपाल के पहाड़ों के तीन से पांच मिमी तक ऊंचा उठने की बात कही। 
उत्तराखंड के बाबत उन्होंने बताया कि यहां मैदानों व शिवालिक के बीच हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट, शिवालिक व मध्य हिमालय के बीच मेन बाउंड्री थ्रस्ट (एमबीटी), तथा मध्य हिमालय व उच्च हिमालय के बीच मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) जैसे बड़े भ्रंस मौजूल हैं। इनके अलावा भी नैनीताल से अल्मोड़ा की ओर बढ़ते हुए रातीघाट के पास रामगढ़ थ्रस्ट, काकड़ीघाट के पास अल्मोड़ा थ्रस्ट सहित मुन्स्यारी के पास सैकड़ों की संख्या में सुप्त एवं जागृत भ्रंस मौजूद हैं। हिमालय की ओर आगे बढ़ते हुए यह भ्रंस संकरे होते चले जाते हैं।

लेकिन भू गर्भ में ऊर्जा आशंकाओं से कम

नैनीताल। प्रो. वल्दिया का यह खुलासा पहाड़ वासियों के लिये बेहद सुकून पहुंचाने वाला हो सकता है। अब तक के अन्य वैज्ञानिकों के दावों से इतर प्रो. वल्दिया का मानना है कि छोटे भूकंपों से भी पहाड़ में भूकंप की संभावना कम हो रही है। जबकि अन्य वैज्ञानिकों का दावा है कि 1930 से हिमालय के पहाड़ों में कोई भूकंप न आने से भूगर्भ में इतनी अधिक मात्रा में ऊर्जा का तनाव मौजूद है जो आठ से अधिक मैग्नीट्यूड के भूकंप से ही मुक्त हो सकता है।
इसके विपरीत प्रो.वाल्दिया का कहना है कि हिमालय में सर्वाधिक भूकंप आते रहते हैं। इनकी तीव्रता भले कम हो, लेकिन इस कारण भूगर्भ से ऊर्जा निकलती जा रही है। इसलिये भूगर्भ में उतना तनाव नहीं है, जितना कहा जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रकृति मां की तरह है, वह कभी किसी का नुकसान नहीं करती। भूकंप व भूस्खलन अनादि काल से आ रहे हैं।
इधर जो नुकसान हो रहा है वह इसलिये नहीं कि प्राकृतिक आपदाएं आबादी क्षेत्र में आ रही हैं, वरन मनुष्य ने आपदाओं के स्थान पर आबादी बसा ली हैं। कहा कि वैज्ञानिक व परंपरागत सोच के साथ ही निर्माण करें तो आपदाओं से बच सकते हैं। सड़कों के निर्माण में भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट न लिये जाने पर उन्होंने नाराजगी दिखाई।

अपरदन बढऩे का है खतरा 

नैनीताल। पहाड़ों के ऊंचे उठने के लाभ—हानि के बाबत पूछे जाने पर कुमाऊं विवि के भू विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. चारु चंद्र पंत का कहना है कि इस कारण पहाड़ों पर अपरदन बढ़ेगा। यानी भू क्षरण व भूस्खलनों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। पहाड़ों के ऊंचे उठते जाने से उनके भीतर हरकत होती रहेगी। वह बताते हैं कि इस कारण ही विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर से दो मीटर बढ़कर 8,850 मीटर हो गई है। यह जलवायु परिवर्तन का भी कारक हो सकता है ।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के बेटे के नेतृत्व में सिक्किम की अनछुवी चोटी को छूने निकले आईटीबीपी के 34 जांबाज

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 2018। भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 34 पर्वतारोहियों का एक दल शुक्रवार को सिक्किम के लिंगडुम, गैंगटॉक से अब तक किसी के द्वारा भी फतह न की जा सकी 6,270 मीटर ऊंची चोटी को छूने के लिए निकला है। खास बात यह है कि इस ’ईस्टर्न फ्रंटियर माउंटेनियरिंग एक्सपेडीशन-आईटीवीपी विजय’ दल का नेतृत्व नैनीताल निवासी आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट परीक्षित साह कर रहे हैं। साथ ही इस दल में नैनीताल के एक अन्य पर्वतारोही सुमित साह भी हैं।

आईटीबीपी के डीआईजी केडी द्विवेदी ने उन्हें आईटीबीपी का ध्वज प्रदान कर इस बेहद कठिन मिशन के लिए रवाना किया है। दल के सदस्यों को इस मिशन के लिए उत्तराखंड के ऑली में पिछले 30 दिनों से कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा था। बताया गया है कि पूर्वी हिमालय की यह चोटी तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन प्राकृतिक चोटी है।

उल्लेखनीय है कि परीक्षित नगर के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे हैं, और वर्तमान में आईटीबीपी की हल्दूचौड़ यूनिट में कार्यरत हैं। उनके दादा स्वर्गीय पूरन लाल साह नगर के अपने समय के अच्छे खिलाड़ी और ‘रेंजर साहब’ के नाम प्रसिद्ध रहे हैं।

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