नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जून 2026 (Concern Among Teachers Over TET)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में शिक्षकों और संविदा कर्मियों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दे सोमवार को चर्चा में रहे। एक ओर राष्ट्रव्यापी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद प्राथमिक शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता और असमंजस बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल विकास निगमों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण तथा समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। दोनों मामलों में कर्मचारी संगठनों ने सरकार से शीघ्र समाधान की मांग करते हुए आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कीं-टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता बरकरार
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित अपने पूर्व आदेश की समीक्षा की मांग करने वाली 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को बरकरार रखा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कक्षा एक से आठ तक अध्यापन करने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा तथा किसी भी शिक्षक को स्थायी छूट नहीं दी जाएगी। हालांकि, कार्यरत शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गयी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समय-सीमा में अंतिम विस्तार है और इसके बाद कोई अतिरिक्त मोहलत नहीं दी जाएगी। साथ ही जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम अवधि शेष है, उन्हें टीईटी से छूट प्रदान की गयी है, हालांकि पदोन्नति के लिए उन्हें परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि टीईटी केवल औपचारिक परीक्षा नहीं, बल्कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
टेट को लेकर शिक्षकों में बढ़ी बेचैनी, आंदोलन की रूपरेखा पर मंथन
उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति की सोमवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) और अनिवार्य स्थानांतरण के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देशभर के अनेक शिक्षक असमंजस और मानसिक तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को सेवा के अंतिम चरण में पुनः टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ सकता है, जिससे व्यापक चिंता का माहौल बना हुआ है।
तकनीकी कारणों से आवेदन भी नहीं भर पा रहे कई शिक्षक
बैठक में यह भी मुद्दा उठाया गया कि विभिन्न समयों पर अलग-अलग नियमों और संवर्गों के अंतर्गत नियुक्त हुए अनेक शिक्षकों को टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन करने में तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सैकड़ों शिक्षक मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। बैठक में सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए गए। तय किया गया कि इस विषय पर नेता प्रतिपक्ष सहित प्रदेश के सांसदों से मुलाकात कर राजनीतिक स्तर पर भी समाधान का प्रयास किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी
संगठन ने अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के साथ समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार करने का निर्णय भी लिया है। साथ ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के माध्यम से समाधान निकालने के विकल्प पर भी सहमति बनी।
बैठक में वार्षिक अनिवार्य स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिनियम के अनुरूप शीघ्र लागू करने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने शिक्षकों से एकजुटता और धैर्य बनाए रखने की अपील की। बैठक में मनोज तिवारी, जितेंद्र सिंह वाल्दिया, दिगंबर सिंह नेगी, दीपक सजवान, उत्तम सिंह फर्त्याल, विनोद रतूड़ी, देवेंद्र सिंह चौधरी, धन्नाथ गोस्वामी, अश्विनी कुमार, पूरन बोरा, देवेश डोभाल और दीपक सिंह रावत सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संविदा कर्मियों ने नियमितीकरण और समान वेतन की मांग उठाई
इधर उत्तराखंड क्रांति दल अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के आह्वान पर संयुक्त कर्मचारी महासंघ कुमाऊं-गढ़वाल मंडल विकास निगम तथा संघर्ष समिति के सहयोग से निगम मुख्यालय नैनीताल में धरना कार्यक्रम शुरू किया गया। राज्य निर्माण सेनानी दिनेश गुरुरानी के नेतृत्व में चल रहे इस कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण अभियान के 686वें दिन भी पौधारोपण किया गया और कर्मचारियों की मांगों को लेकर धरना जारी रखा गया।
नियमितीकरण और बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुख
धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं मंडल विकास निगम और गढ़वाल मंडल विकास निगम में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतानों का शीघ्र निस्तारण किया जाना चाहिए। दिनेश गुरुरानी ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान लंबे समय से लंबित है और निगम प्रशासन को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
कर्मचारियों से एकजुट होने की अपील
प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष कंचन चंदोला ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों के समाधान के लिए सभी कर्मियों को आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महामंत्री नीरज जोशी ने सरकार से कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। धरना कार्यक्रम में चंद्र सिंह राठौड़, दिनेश सांगुड़ी, दीपचंद जोशी, त्रिभुवन, देवेंद्र सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
रोजगार सुरक्षा और सेवा शर्तों के मुद्दे बने केंद्र में
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण जैसे मुद्दे केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि हजारों परिवारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़े हैं। ऐसे में इन विषयों पर सरकार, विभागों और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
