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नैनीताल के एक वार्ड में हिस्ट्रीशीटर का भाई करा रहा है भांग की खेती व चरस का अवैध कारोबार ! पुलिस हुई सक्रिय..

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अक्तूबर 2019। नगर के नारायण नगर वार्ड में भांग की खेती और चरस का अवैध कारोबार किये जाने की सूचना है। इस बारे में डीएम एवं एसएसपी को भी शिकायत की गई है। क्षेत्रवासी राहुल बाजपेई ने दावा किया है कि वार्ड में करीब एक बीघे में 6 से 7 फिट तक लंबे भांग के 700-800 पेड़ों की फसल खड़ी है और मुरादाबाद के हरथला का निवासी एवं सिविल लाइन थाने से जिला बदर हिस्ट्रीशीटर अपराधी का भाई उसकी मदद से अपने घर से चरस का अवैध कारोबार कर रहा है। उन्होंने बताया कि आज ही एसएसपी सुनील कुमार मीणा से मामले की शिकायत की गई है, जिसके बाद पुलिस सक्रिय हुई है, और संबंधित पुलिस थाने से मामले में जांच कर कार्रवाई करने को कहा गया है।

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नवीन समाचार, बाजपुर (ऊधमसिंह नगर), 1 अक्तूबर 2019। ऊधमसिंह नगर जनपद की बाजपुर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने बन्नाखेड़ा चौकी क्षेत्र के ग्राम बैतखेडी में एक जंगल मे बने घर मे नक़ली शराब की फैक्ट्री पकड़ी है। जिसमे भारी मात्रा में नक़ली शराब बनाने का सामान, सरकारी शराब फैक्ट्री बाज़पुर के नाम के बोतलों के ढक्कन व गुलाब ब्रांड के स्टिकर और भारी मात्रा में स्प्रिट के साथ ही 8 हजार पव्वे बरामद करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

बताया गया है कि त्रिस्तरीय चुनाव को लेकर एसएसपी ऊधमसिंह नगर ने चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से शराब की रोकथाम को लेकर कड़े निर्देश दिये थे, जिसको लेकर कोतवाली बाज़पुर की बन्नाखेड़ा चौकी पुलिस को चेकिंग के दौरान एक शराब से लदे वाहन को पकड़े जाने पर कड़ी पूछताछ में यह बड़ा खुलासा हुआ। पकड़े गए लोगों की शिनाख्त पर एक बड़ी नक़ली शराब फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया । कार्रवाई में 7 लाख रुपये की क़ीमत की 8 हजार नक़ली शराब के पव्वे सहित शराब बनाने के उपकरण, तीन कार, भारी मात्रा में कच्चा माल की बरामदगी सहित तीन आरोपियों की गिरफ्तारी शामिल है। इस पूरे घटना क्रम में एसओजी की भी अहम भूमिका रही है।

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नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 30 सितंबर 2019। एसपी पिथौरागढ़ के निर्देश पर पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए, चेकिंग के दौरान अवैध शराब का बड़ा जखीरा बरामद किया हैै। एक पिकअप और कैंटर में अवैध शराब ले जाए जा रही थी जिसे पुलिस ने चेकिंग के दौरान पकड़ा, तस्करी में शामिल खड़क सिंह, बसंत कुमार और उमेद सिंह जो कि पिथौरागढ़ के ही रहने वाले हैं तीनों तस्करों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पकड़ी गई शराब की कीमत लगभग 37 लाख रुपए बताई जा रही है। पिकअप से पुलिस को 154 पेटी और कैंटर से 462 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई। बताया जा रहा है यह शराब पंचायत चुनाव में इस्तेमाल करने के लिए ले जाई जा रही थी, पुलिस ने दोनों गाड़ियों को भी सीज कर दिया है, एसपी पिथौरागढ़ ने बताया कि शराब की तस्करी में अगर आबकारी विभाग की संलिप्तता पाई जाएगी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, थानाध्यक्ष आसिफ खान और चौकी प्रभारी प्रकाश पांडे के नेतृत्व में टीम को यह बड़ी सफलता मिली, पिथौरागढ़ जिले में अवैध शराब कको लेकर ये अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 सितंबर 2019। हल्द्वानी पुलिस ने नशीली गोलियां व इंजेक्शन बेचने वाले एक नशे के तस्कर को भारी मात्रा में नशे के इंजेक्शन व गोलियांे के साथ गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात बनभूलपुरा थाने के प्रभारी सुशील कुमार के नेतृत्व में गश्त के दौरान पुलिस टीम को चिराग अली शाह बाबा की मजार के समीप एक युवक संदिग्धावस्था में खड़ा दिखाई दिया। शक होने पर जब पुलिस कर्मियों ने उसके बैग की तलाशी ली तो उसमें से भारी मात्रा में नशे के इंजेक्शन, गोलियां व सिरिंज बरामद हुईं। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

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पूछताछ में पकड़े गये तस्कर ने अपना नाम मोहम्मद नईम पुत्र रहीम बख्श निवासी इन्द्रानगर बताया। उसने बताया कि वह यह नशीली गोलियां व इंजेक्शन हल्द्वानी व बरेली के मेडिकल स्टोरों से खरीद कर लाता और यहांएक इंजेक्शन 250 रुपये व नशीली गोलियां 50 रुपये प्रति पत्ते के हिसाब से बेचता था। पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा नशीली गोलियां व इंजेक्शन बेचने की सूचनाएं पहले से थी। पुलिस उसे रंगेहाथ दबोचने का इंतजार कर रही थी।

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-अवैध असलहे व शराब के साथ राजस्व पुलिस ने दो लोगो को किया गिरफ्तार
– ऊधमसिंह नगर जनपद के है दोनों आरोपी, ओखलकांडा के अधोड़ा गांव की है घटना
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल), 21 सितंबर 2019। जनपद के दूरस्थ क्षेत्र अधोड़ा में ऊधमसिंह नगर जनपद के दो लोगों को अवैध शराब व असलहे के साथ गिरफ्तार किया गया है। उनके विरुद्ध शस्त्र व आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा कायम कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।
राजस्व निरीक्षक शकील अहमद ने बताया कि ओखलकांडा विकास खंड के अधोड़ा गांव में मुखबिर ने सूचना दी कि दो लोग गांव में एक बाइक में बंदूक लेकर शराब बेच रहे है। राजस्व पुलिस ने तत्काल निरीक्षक शकील अहमद, उपनिरीक्षक पूरन चंद्र सनवाल और प्रकाश देवत्तला की टीम ने दोनों संदिग्धों को एक देशी बंदूक, और 10 थैली देशी अवैध शराब के 500 मिली के पाउचों के साथ दबोच लिया। पूछताछ उनकी पहचान मलकीत सिंह (25) पुत्र गुरमीत सिंह व सत्यपाल सिंह (32) पुत्र अमन सिह निवासी ग्राम ध्यानपुर नानकमत्ता जिला ऊधमसिंह नगर के रूप में हुई। उनकी मोटरसाइकिल संख्या यूके04एयू-9891 को भी जब्त कर लिया गया। निरीक्षण शकील अहमद ने बताया कि दोनों ने पूछताछ में पुलिस क्षेत्र में कई समय से धंधा करने पर पकड़े नही जाने, किंतु आज राजस्व क्षेत्र में पहली बार आते ही पकड़े जाने की बात कही है। इधर एसडीएम धारी विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि डीएम ने निर्देशों पर पंचायत चुनावों में आचार संहिता का कढ़ाई से पालन कराया जा रहा है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 20 सितंबर 2019। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बार फिर कच्ची-जहरीली शराब ने कहर ढा दिया है। एक दर्जन लोग इसकी चपेट में आ गये हैं, जबकि इनमें से 6 लोगों की मौत भी हो गई है, और पांच गंभीर बताए जा रहे हैं। मामला स्थानीय भाजपा विधायक गणेश जोशी के घर से मात्र 50 मीटर की दूर पर नेशविला रोड क्षेत्र का है। यह घटना तब प्रकाश में आई है जहां एक ओर देहरादून सहित उत्तराखंड पुलिस नशे के खिलाफ अभियान चलाये हुए है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने लंबे समय से निलंबित चल रहे मनोज उपाध्याय को निलंबन के बाद वापस देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी पद देकर उपकृत कर दिया है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 13 सितंबर 2019। एसओजी व काठगोदाम थाना पुलिस ने एक स्विफ्ट कार संख्या डीएल4एएस-8135 से दो तस्करों को 38 पेटियों में भरी लाखों रुपए की हरियाणा ब्रांड की 456 शराब की बोतलों के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। शुक्रवार की दोपहर पुलिस व एसओजी की संयुक्त टीम ने चेकिंग के दौरान गौलापार रोड पर नर्सरी के पास स्विफ्ट कार को रोका तो कार से पुलिस को हरियाणा ब्रांड की शराब बरामद हुई। इस पर पुलिस ने चालक समेत दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पकड़े गये तस्करों ने अपने नाम संजय व विजेंद्र सिंह निवासी हरियाणा बताये हैं। वह इस शराब को हरियाणा से लेकर आये थे और पर्वतीय क्षेत्रों में तस्करी करने के लिए ले जा रहे थे।
इधर हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने बन्ना खेड़ा निवासी गुरुवचन सिंह पुत्र जसवीर सिंह व कैंट बरेली निवासी संजीव कुमार पुत्र पदम प्रकाश के कब्जे से वाहन संख्या यूके06एबी-7603 से देशी गुलाब मार्क शराब की 22 पेटियां बरामद कीं। जबकि हल्द्वानी की ही भोटिया पड़ाव चौकी पुलिस ने राजपुरा धोबीघाट के पास 21 वर्षीय वेद प्रकाश पुत्र पप्पू शर्मा के कब्जे से देशी गुलाब मार्के के 92 पव्वे शराब बरामद की है।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक हाईकोर्ट में हाजिर हों…हाईकोर्ट ने कहा-बड़े माफिया पर हाथ डालने से बचती है उत्तराखंड पुलिस

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जुलाई 2018। उत्तराखंड के युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी और उसकी रोकथाम के मामले में बुधवार को उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड पुलिस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस छोटे-मोटे अपराधियों को तो पकड़ लेती है, लेकिन बड़े माफियाओं पर हाथ डालने में कतराती है। जानलेवा जहरीले के खिलाफ एक बार फिर से सख्ती दिखाते हुए उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश भी दिये। साथ ही कुछ गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि राज्य की एक पीढ़ी नशाखोरी की गर्त में जा रही है। सरकार नशाखोरी पर लगाम लगाने में नाकाम हो रही है। क्या उत्तराखंड राज्य का निर्माण इसीलिये किया गया था ? सरकार बड़े माफियाओं को पकड़ने में नाकाम रही है। खंडपीठ ने सरकार से अभी तक माफियाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों की पूरी जानकारी भी न्यायालय को उपलब्ध कराने तथा उनके खिलाफ अभी तक की गयी कार्यवाही की जानकारी भी देने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ व न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। याची श्वेता मासीवाल की ओर से याचिका में कहा गया कि सरकार व प्रशासन युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी पर कोई प्रतिबंध तथा नशे के सौदागरों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाये हैं। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि
उल्लेखनीय है कि पूर्व में याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने प्रदेश के 27 विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा निदेशक, विद्यालयी शिक्षा निदेशक व सभी जिलाधिकारियों व जिलों के पुलिस प्रमुखों को पक्षकार बनाने को कहा था। आज अधिकांश पक्षकारों की ओर से जवाब पेश किया गया। उनकी ओर से कहा गया कि वे नशे के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे हैं। लेकिन खंडपीठ ने उनके जवाब से असहमति जाहिर करते हुए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा। साथ ही सरकार को नशा माफियाओं के खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी जानकारी देने को कहा है।

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कालाढूंगी पुलिस ने काशीपुर निवासी दो चरस तस्कर दबोचे, बरामद की 1 किलो चरस 

कालाढूंगी पुलिस की गिरफ्त में आये चरस तस्कर

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 5 जुलाई 2018। पूरे प्रदेश व खासकर नैनीताल जनपद में लंबे समय से नशे के सौदागरों के खिलाफ चल रहे अभियान पर कालाढुंगी पुलिस अब जाकर जागी है। लंबे समय से क्षेत्र में चरस व स्मैक के तस्करों के निर्बाध रूप से सक्रिय होने और युवाओं के जानलेवा नशे की गिरफ्त में फंसने की क्षेत्रीय जनता की अनेक शिकायतों के बढ़ते दबाव के बाद कालाढुंगी पुलिस ने बृहस्पतिवार को हल्द्वानी-कालाढूंगी मार्ग पर भाखड़ा पुल के समीप घेराबंदी कर दो चरस तस्करों को गिरफ्त में लिया है। उनके कब्जे से पूरे एक किलो चरस बरामद की गयी है। इस बरामदगी को भले कालाढुंगी पुलिस अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करे, परंतु इतनी बड़ी मात्रा में हुई चरस की बरामदगी से एक तरह से उसकी अपनी अब तक की निष्क्रियता की भी पोल-पट्टी खुल रही है। साफ हो गया है कि छोटे से कालाढुंगी कस्बे में चरस की कितनी अधिक खपत है।
बताया गया है कि सीओ रामनगर लोकजीत सिंह तथा थाना प्रभारी नरेश चौहान के निर्देशन में कालाढूंगी पुलिस को यह सफलता बीती रात्रि भाखड़ा पुल के पास चेकिंग के दौरान मिली। इस दौरान थाना काशीपुर के अंतर्गत सुभाष नगर में नहर पुलिया के पास रहने वाले 22 वर्षीय अमन प्रताप पुत्र जयप्रकाश के कब्जे से 450 ग्राम व 23 वर्षीय तरुण कुमार पुत्र विरेंद्र चौहान के कब्जे से 550 ग्राम चरस बरामद की गयी। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस टीम में उप निरीक्षक संजय बृजवाल तथा आरक्षी नवीन कुमार, किशन नाथ व दिनेश कार्की शामिल रहे।

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जनपद के पुलिस कप्तान द्वारा शेयर की गयी फेसबुक पोस्ट

देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड और खासकर ‘दहाड़ने’ और जिले के साथ ही ‘प्रदेश’ के लिए ‘ताना-बाना बुन’ रहे पुलिस कप्तान के जनपद नैनीताल में यह क्या हो रहा है। एक ओर 80 लाख रुपए के 200 मोबाइल चोरी होने की घटना पर नैनीताल पुलिस ने ‘लाखों’ के मोबाइल लिखकर ‘गोल-मोल’ किया तो अब ‘केवल 20 लाख’ की चोरी बताकर और इसमें से भी केवल 3 मोबाइल ढूंढकर और इन्हें डेढ़ लाख का बताकर अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह को पकड़ने का दावा कर खुद ही अपनी पीठ ठोंकी जा रही है।

दुकानदार जसप्रीत सिंह द्वारा किया जा रहा 80 लाख के 200 मोबाइल चोरी होने का दावा ⇓

उधर जिले के ही रामनगर क्षेत्र में एसएसपी के नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को मुंह चिढ़ाते हुए कुमाऊं एसटीएफ 145 पेटी महंगी अंग्रेजी शराब पकड़ी तो इसके अगले ही दिन शहर के बीचों-बीच डंगवाल टावर स्थित होटल में दिन-दहाड़े ‘सेक्स होता’ पकड़ा गया।

रामनगर के एमपी इंटर कॉलेज में शराब की बोतलें व भारी मात्रा में नशे के लिए प्रयुक्त सिरिंज पकड़ी जा रही हैं, जिसकी शिकायत रामनगर की जीवनधारा सोसायटी द्वारा पुलिस कप्तान से की गयी है।

इधर नैनीताल में स्वयं सेवी युवाओं द्वारा चलाए जा रहे सफाई अभियान में खुलासा हो रहा है कि नगर के सभी शांत स्थान शराब पीने का अड्डा बन गये हैं। इधर कुछ समय से नगर में धड़ल्ले से स्मैक जैसा जानलेवा नशा भी आने लगा है, और नगर के अच्छे घरों के युवा भी इनकी चपेट में आ रहे हैं। जबकि पुलिस अब तक मात्र 2-3 ग्राम स्मैक पकड़कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है। इन स्थितियों को भविष्य में जनपद में आपराधिक घटनाओं की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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पीरूमदारा में कुमाऊँ एसटीएफ द्वारा 16 अप्रैल 2018 को पकड़ा गया अंग्रेजी शराब का जखीरा

पीरूमदारा में एसटीएफ कुमाऊ ने छापा मारकर “नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करने वाली” नैनीताल पुलिस की नाक के नीचे से लाखों की अवैध शराब बरामद की है। शराब एक कमरे में छुपा कर रखी गई थी। पकड़ी गई शराब को दो ट्रकों में लादकर पीरुमदारा चौकी लाया गया है। शराब ब्रांडेड और महंगी बताई जा रही है। इससे एक बार फिर पुष्टि हो गई है कि रामनगर में अवैध खनन और शराब का धंधा पुलिस की शह पर खूब फल-फूल रहा है।

बताया गया है कि शराब का यह जखीरा पीरूमद्वारा गांव के आवासीय क्षेत्र में राजपाल रावत के घर में अंग्रेजी शराब के एक सेल्समैन ने अवैध रूप से इकट्ठा किया था।सोमवार को शिकायत मिलने पर एसटीएफ कुमाऊं के इंस्पेक्टर एमपी सिंह ने पीरूमद्वारा पुलिस को साथ लेकर गोदाम में छापा मारा तो वहां अंग्रेजी शराब की 145 पेटियां बरामद हुुई।  सेल्समेन को भी पूछताछ के लिए एसटीएफ ने हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस माामले को सिर्फ अवैध भंडारण का मामला बताने की कोशिश कर रही है।

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पिछली सरकार को ‘डेनिस’ पर घेरने वाली ‘संस्कारी’ उत्तराखंड सरकार ! राज्य का खजाना भरने को इस हद तक चले ही गये कि घर-घर गाड़ियों पर शराब की सप्लाइ के बाद अब परचून की दुकानों पर भी शराब बेचोगे। पर शायद इससे भी राज्य की जरूरतें पूरी न हो पाएं। बेहतर उपाय यह है कि अपनी ‘जनोपयोगी शराब नीति’ में राज्य के दीर्घकालीन आर्थिक हित में स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों के मध्याह्न भोजन में भी शराब परोसने का प्राविधान कर दो। इससे तात्कालिक तौर पर आपका नून-तेल का खर्चा तो बचेगा ही, बच्चों को जो शराब की आदत बचपन से लगेगी तो बड़े होने पर भी उनकी तलब सरकार का खजाना भरती रहेगी। और ‘गुणवत्तायुक्त’ शराब तो आपकी है ही, तो चिंता किस बात की ?

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में सरकार ने कुछ दिनों पहले जारी अपनी आबकारी नीति में कुछ बदलाव करते हुए 20 किमी के दायरे में एक व्यक्ति या फर्म को चार दुकानें आवंटित करने के पहले लिए गए निर्णय को वापस लिया, वहीं  मोहल्ले की परचून की दुकानों में अंग्रेजी शराब की उपलब्धता बनाने का प्राविधान कर दिया है। कैबिनेट की बैठक में बार लाइसेंस नीति में भी संशोधन किया गया है। बार लाइसेंस एक साल की बजाय तीन साल तक के लिए दिया जाएगा। साथ ही 20 कमरों तक के होटलों का बार लाइसेंस की फीस 5 लाख से घटाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। यह भी पीने वालों के लिए अच्छी खबर है।

अब पीने वालों को शराब के ठेकों तक जाकर अपना वक्त जाया नहीं करना पड़ेगा, अपने मोहल्ले की दुकान में ही बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखे की तरह उन्हें शराब भी मिलने लगेगी। यह बात अलग है कि महिलाओं के लिए अब मोहल्ले की दुकान तक जाना भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्हें शराबियों की तन को भेदने वाली तीखी नजरों से गुजरना पड़ेगा, अश्लील फब्तियां सुनने को मजबूर होना पड़ेगा। हो सकता है शराबियों की छेड़खानी भी झेलनी पड़े। राज्य की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए मातृशक्ति के लिए इतनी क़ुरबानी देनी तो बनती है।

गौरतलब है कि अब तक अंग्रेजी शराब अनुज्ञापित दुकान या फिर ठेके पर ही मिलती रही है। अब सरकार ने शराब की उपलब्धता को मोहल्ले की परचून की दुकान तक होगी। इसमें शर्त इतनी भर रखी गई है कि परचून की दुकान का साल भर का टर्नओवर कम से कम 5 लाख रुपये होना चाहिए और वह 5 लाख रुपये लाइसेंस फीस जमा कर सके।

मालूम हो कि गत वर्ष शराब को जनता से दूर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था, जिसमें शराब की दुकानों को हाईवे से दूर रखने का तर्क दिया गया था। इसकी काट के रूप में सरकार ने नगर निकायों की सीमा में हाईवे को नए सिरे से अधिसूचित कर जिला मार्ग घोषित कर दिये थे। उसके बाद प्रदेश की भाजपा सरकार ने दुकान खोलने की सीमा निर्धारित कर रात में शराब की दुकानें न खोलने का निर्णय लिया, इस निर्णय पर भी सरकार अधिक समय तक नहीं टिक पाई। वहीं इधर पिछले दिनों घोषित आबकारी नीति में 20 किमी के दायरे में एक व्यक्ति या फर्म को चार लाइसेंस देने को मंजूरी दी गई। इस बार की कैबिनेट बैठक में सरकार ने इस नीति को भी पलट दिया है।

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₹ 2900 करोड़ की “शराब पिलाने का बनाया लक्ष्य, राज्य बनने के 18 सालों में 38 गुने से अधिक बढ़ाई शराब की बिक्री

-प्रतिदिन लगभग ₹आठ लाख व हर नागरिक को ₹ आठ रुपये की शराब पिलाने का लक्ष्य 

हम-आप चाहे शराब पीते हों अथवा नहीं, पर सरकार हम सबको मानो ‘पीके’ बनाने पर तुली हुई है। सत्ता में आने से पूर्व शराब व शराब माफिया पर नाक-भौं सिकोड़ने वाली राज्य की भाजपा सरकार भी पिछली सरकारों के नक्शे-कदम पर चलते हुए अपनी जनता को शराब पिलाकर राज्य की आर्थिक सेहत सुधारने का अरमान बनाए बैठी है। वह भी कम-कम नहीं, राज्य के हर बच्चे-बड़़े, महिला-पुरुष-वृद्ध को औसतन ₹ आठ व हर रोज करीब ₹ आठ लाख की शराब पिलाकर राज्य की तिजोरी में ₹ 2900 करोड़ डालने का लक्ष्य बना डाला है। उस पर कुतर्क यह कि यदि सरकार शराब नहीं पिलाएगी तो जनता गुणवत्ताविहीन शराब पीकर मर सकती है। यह तर्क सही है, और जनता की इतनी ही चिंता है तो क्यों अधिक पिलाकर मारने पर तुली है सरकार। है कोई जवाब ?

दैनिक जागरण, 18 अप्रैल 2005

स्थिति यह है उत्तराखंड के लोगों को नये वित्त वर्ष में लगभग ₹ 2900 करोड़ की शराब पीनी होगी, वरना सरकार के लक्ष पूरे नहीं होंगे। राज्य के हर व्यक्ति की प्रतिदिन इसमें लगभग ₹ आठ की ‘‘हिस्सेदारी’ होगी। हैरत की बात है कि 18 साल पहले राज्य बनाने के दौरान जिस पहाड़ में मात्र ₹ 75 करोड रपए की शराब बिकती थी, अब वहां ₹ 2650 करोड़ की शराब अकेले ठेकों से बिकेगी जबकि  270 करोड़ अन्य करों से बटोरे जाने हैं। आबकारी विभाग एक साल की कुल शराब  2650 करोड़ में नीलाम करेगा। इसके बाद लगभग ₹ 270 करोड़ का मुनाफा शराब बेचने वाली दुकानें और बार कमाएंगे। राज्य में ₹ 2650 करोड़ की शराब को कैसे बेचा जाएगा, इसका पूरा खाका तैयार हो रहा है। यह शराब राज्य के 252 देसी और 260 विदेशी शराब की दुकानों में बेची जाएगी। पिछले वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने राज्य में ₹ 2400 करोड़ की शराब बेचने का लक्ष्य रखा था। आबकारी विभाग इस लक्ष्य को पाने के करीब है। विभाग अब तक ₹ 2180 करोड़ की शराब बेच चुका है और शेष लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शराब के दाम बढ़ाकर अप्रैल तक एक माह का समय बढ़ा दिया गया है। अब प्रदेश में जो 2650 करोड़ की शराब बिकेगी। उसका आगाज एक मई 2018 से होगा। इस भारी भरकम लक्ष्य को पूरा करने के लिए आबकारी विभाग राज्य में नई शराब की दुकानें खोलने की योजना बना रहा है।

पिछले 18 सालों से राज्य की सरकारें भले ही इस पहाड़ी प्रदेश में मौजूद संसाधनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने में विफल साबित हुई हों लेकिन शराब के जरिए सरकारी खजाना भरने में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। उत्तराखंड में 10086292 लोग रहते हैं, जिनमें 51,37,773 पुरुष और 49,48,519 महिलाएं हैं। अगर जोड़-भाग करें तो उत्तराखंड में रहने वाला हर व्यक्ति के हिस्से लगभग लगभग आठ रुपये की शराब आती है।

ऐसे वसूले जाएंगे ₹ 2650 करोड़ 

आबकारी विभाग राज्य में ₹ 2650 करोड़ की शराब की नीलामी करेगा। इसके अलावा एक्ससाइज ड्यूटी से 500 करोड़, शीरा से 70 करोड़, आर्मी कैंटीन से ₹ 100 करोड़, बीयर शुल्क से ₹ 80 करोड़, फैक्टरी लाइसेंस से लगभग ₹ 500 करोड़ और बार लाइसेंस की फीस के मद में लगभग ₹ 25 करोड़ वसूलेगा।

चार दुकानों का ग्रुप बनेगा

आबकारी विभाग पहली बार शराब बेचने वाली चार दुकानों का ग्रुप बनाने जा रहा है। इसके तहत एक जगह आसपास की चार दुकानों का ग्रुप बनाया जाएगा। चारों दुकानें आपस में मिलकर शराब की बिक्री करेंगी।

सब कुछ होगा ऑनलाइन

आबकारी विभाग ने नए वित्तीय वर्ष के लिए शराब की बिक्री को ऑनलाइन कर दिया है। यानि शराब की दुकानों पर बिकने वाली हर बोतल मैनुअल की बजाय ऑनलाइन बिकेगी। इससे दुकानों में बिकने वाली तस्करी से लाई जाने वाली शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही जा रही है।

शराब कारोबार का काला पक्ष

शराब के कारोबार का एक ‘‘काला’ पक्ष भी है। यह हैं  राज्य में मौजूद शराब तस्कर। पुलिस रिकार्ड में उत्तराखंड पुलिस ने 2013-14 में लगभग 95 करोड़, 2014-15 में लगभग 100 करोड़, 2016-17 में लगभग 90 करोड़ की अवैध शराब पकड़ी। यह वह शराब है जो हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से तस्करी करके उत्तराखंड लाई गई।

One thought on “नैनीताल के एक वार्ड में हिस्ट्रीशीटर का भाई करा रहा है भांग की खेती व चरस का अवैध कारोबार ! पुलिस हुई सक्रिय..

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